कर्नाटक PRC विवाद: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — '10 साल से रहने वालों को ही मिलेगा प्रमाण पत्र'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार, 21 जुलाई को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट (PRC) योजना का पुरज़ोर बचाव किया और स्पष्ट किया कि यह प्रमाण पत्र केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो कम से कम 10 वर्षों से राज्य में निवास कर रहे हैं। बांग्लादेशी प्रवासियों को लाभ पहुँचाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा, "हम अपनी बेटियों की शादी बांग्लादेशियों से नहीं कर सकते।"
PRC योजना का ढाँचा और पात्रता
परमेश्वर ने बताया कि आवेदकों को यह साबित करना होगा कि वे पिछले 10 वर्षों से कर्नाटक में रह रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर आवेदक यह साबित करते हैं कि वे पिछले 10 साल से कर्नाटक में रह रहे हैं, तो उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।" सरकार ने 2002 की मतदाता सूची को प्रमुख दस्तावेज़ी आधार बनाया है, और उनके अनुमान के अनुसार करीब 50 से 60 प्रतिशत लोगों के पास ऐसे रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कर्नाटक में जन्मे आवेदकों को भी PRC जारी करने का निर्णय लिया है। जिन लोगों के पास आवश्यक दस्तावेज़ नहीं हैं, उनके लिए यह प्रमाण पत्र एक वैकल्पिक पहचान और निवास प्रमाण के रूप में काम करेगा।
BJP के आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा बांग्लादेशी प्रवासियों को बसाने में सहायता करने के आरोपों पर परमेश्वर ने कहा, "हम न तो केंद्र सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं और न ही किसी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। हम पूरी तरह से कानून के अनुसार काम कर रहे हैं।" उन्होंने याद दिलाया कि तहसीलदार पहले से ही जाति प्रमाण पत्र जारी करते आए हैं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भी ऐसे प्रमाण पत्र माँगे गए थे।
उन्होंने BJP पर पलटवार करते हुए कहा, "एक तरफ BJP नेताओं ने विधानसभा में कई बार आरोप लगाया है कि बांग्लादेशियों और दूसरे राज्यों के लोगों की संख्या बढ़ रही है। जब मैं गृह मंत्री था, तब मैंने ऐसे आरोपों का कई बार जवाब दिया था।" गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में प्रवासी निवासियों के दस्तावेज़ीकरण को लेकर राजनीतिक तनाव उभरा हो।
सूखा प्रबंधन और राहत राशि
PRC विवाद के अलावा, परमेश्वर ने सूखे की स्थिति पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने पीने के पानी की व्यवस्था के लिए प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ जारी किए हैं और डिप्टी कमिश्नरों के व्यक्तिगत जमा (PD) खातों में कुल ₹329 करोड़ उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक तालुक को ₹1 करोड़ देने की घोषणा भी की गई है।
उन्होंने कहा कि डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सूखाग्रस्त तालुकों की पहचान कर रिपोर्ट सौंपें, जिसके बाद राज्य को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "इस फैसले से किसानों और आम लोगों को लाभ मिलना चाहिए — खासकर उन्हें जो रोज़गार न मिलने के कारण पलायन को मजबूर हैं।"
कैबिनेट विस्तार पर संकेत
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि पार्टी के नेता इस विषय पर चर्चा के लिए दिल्ली गए हैं और हाईकमान की मंजूरी के बाद ही विस्तार होगा। उन्होंने 2028 के विधानसभा चुनावों से इसे जोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि निर्णय तय मानकों के आधार पर होगा, जिसमें युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
PRC को लेकर राजनीतिक बहस थमने के आसार फिलहाल कम हैं। BJP ने इस मुद्दे को राज्य विधानसभा और सार्वजनिक मंच दोनों पर उठाने की रणनीति बनाई हुई है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध और कानून-सम्मत है। सूखाग्रस्त जिलों की अधिकारिक घोषणा और कैबिनेट विस्तार — दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति की केंद्र में रहेंगे।