21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक PRC विवाद: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — '10 साल से रहने वालों को ही मिलेगा प्रमाण पत्र'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक PRC विवाद: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर बोले — '10 साल से रहने वालों को ही मिलेगा प्रमाण पत्र'

सारांश

कर्नाटक में PRC को लेकर छिड़ी राजनीतिक जंग में उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने सीधे मोर्चा संभाला — 10 साल के निवास की शर्त और कानून के दायरे में काम करने का दावा। BJP के बांग्लादेशी प्रवासी कोण को उन्होंने सीधे नकारा, लेकिन बहस थमती नहीं दिख रही।

मुख्य बातें

परमेश्वर ने 21 जुलाई को बेंगलुरु में PRC योजना का बचाव किया।
PRC के लिए पात्रता शर्त: कम से कम 10 साल से कर्नाटक में निवास।
प्रमुख दस्तावेज़ी आधार 2002 की मतदाता सूची ; करीब 50-60% लोगों के पास रिकॉर्ड संभव।
सूखा राहत के तहत प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ ; PD खातों में कुल ₹329 करोड़ उपलब्ध।
कैबिनेट विस्तार पर हाईकमान से चर्चा जारी; युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देने पर विचार।
BJP ने बांग्लादेशी प्रवासियों को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया, सरकार ने खारिज किया।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार, 21 जुलाई को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट (PRC) योजना का पुरज़ोर बचाव किया और स्पष्ट किया कि यह प्रमाण पत्र केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो कम से कम 10 वर्षों से राज्य में निवास कर रहे हैं। बांग्लादेशी प्रवासियों को लाभ पहुँचाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा, "हम अपनी बेटियों की शादी बांग्लादेशियों से नहीं कर सकते।"

PRC योजना का ढाँचा और पात्रता

परमेश्वर ने बताया कि आवेदकों को यह साबित करना होगा कि वे पिछले 10 वर्षों से कर्नाटक में रह रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर आवेदक यह साबित करते हैं कि वे पिछले 10 साल से कर्नाटक में रह रहे हैं, तो उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।" सरकार ने 2002 की मतदाता सूची को प्रमुख दस्तावेज़ी आधार बनाया है, और उनके अनुमान के अनुसार करीब 50 से 60 प्रतिशत लोगों के पास ऐसे रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कर्नाटक में जन्मे आवेदकों को भी PRC जारी करने का निर्णय लिया है। जिन लोगों के पास आवश्यक दस्तावेज़ नहीं हैं, उनके लिए यह प्रमाण पत्र एक वैकल्पिक पहचान और निवास प्रमाण के रूप में काम करेगा।

BJP के आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा बांग्लादेशी प्रवासियों को बसाने में सहायता करने के आरोपों पर परमेश्वर ने कहा, "हम न तो केंद्र सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं और न ही किसी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। हम पूरी तरह से कानून के अनुसार काम कर रहे हैं।" उन्होंने याद दिलाया कि तहसीलदार पहले से ही जाति प्रमाण पत्र जारी करते आए हैं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भी ऐसे प्रमाण पत्र माँगे गए थे।

उन्होंने BJP पर पलटवार करते हुए कहा, "एक तरफ BJP नेताओं ने विधानसभा में कई बार आरोप लगाया है कि बांग्लादेशियों और दूसरे राज्यों के लोगों की संख्या बढ़ रही है। जब मैं गृह मंत्री था, तब मैंने ऐसे आरोपों का कई बार जवाब दिया था।" गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में प्रवासी निवासियों के दस्तावेज़ीकरण को लेकर राजनीतिक तनाव उभरा हो।

सूखा प्रबंधन और राहत राशि

PRC विवाद के अलावा, परमेश्वर ने सूखे की स्थिति पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने पीने के पानी की व्यवस्था के लिए प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ जारी किए हैं और डिप्टी कमिश्नरों के व्यक्तिगत जमा (PD) खातों में कुल ₹329 करोड़ उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक तालुक को ₹1 करोड़ देने की घोषणा भी की गई है।

उन्होंने कहा कि डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सूखाग्रस्त तालुकों की पहचान कर रिपोर्ट सौंपें, जिसके बाद राज्य को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "इस फैसले से किसानों और आम लोगों को लाभ मिलना चाहिए — खासकर उन्हें जो रोज़गार न मिलने के कारण पलायन को मजबूर हैं।"

कैबिनेट विस्तार पर संकेत

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि पार्टी के नेता इस विषय पर चर्चा के लिए दिल्ली गए हैं और हाईकमान की मंजूरी के बाद ही विस्तार होगा। उन्होंने 2028 के विधानसभा चुनावों से इसे जोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि निर्णय तय मानकों के आधार पर होगा, जिसमें युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है।

आगे क्या होगा

PRC को लेकर राजनीतिक बहस थमने के आसार फिलहाल कम हैं। BJP ने इस मुद्दे को राज्य विधानसभा और सार्वजनिक मंच दोनों पर उठाने की रणनीति बनाई हुई है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध और कानून-सम्मत है। सूखाग्रस्त जिलों की अधिकारिक घोषणा और कैबिनेट विस्तार — दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति की केंद्र में रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 10 साल के निवास को सत्यापित करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और दुरुपयोग-रोधी है — इस पर सरकार ने कोई ठोस तंत्र नहीं बताया। परमेश्वर का 'बांग्लादेशी बेटियाँ' वाला बयान राजनीतिक रूप से तीखा ज़रूर है, पर यह उस मूल चिंता का जवाब नहीं देता कि दस्तावेज़ सत्यापन की ज़िम्मेदारी किस पर होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रवासी पहचान और नागरिकता के सवाल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। बिना स्वतंत्र ऑडिट तंत्र के, यह योजना विपक्ष को राजनीतिक हथियार देती रहेगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक का परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट (PRC) क्या है?
PRC एक सरकारी प्रमाण पत्र है जो कर्नाटक में दीर्घकालिक निवासियों को उनकी पहचान और निवास साबित करने के लिए जारी किया जाता है। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर के अनुसार, यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिनके पास 2002 की मतदाता सूची जैसे पुराने दस्तावेज़ नहीं हैं।
PRC के लिए कौन पात्र है?
जो व्यक्ति कम से कम 10 वर्षों से कर्नाटक में रह रहे हैं और इसे दस्तावेज़ों से साबित कर सकते हैं, वे PRC के लिए पात्र हैं। इसके अलावा, कर्नाटक में जन्मे आवेदकों को भी यह प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
BJP ने PRC पर क्या आरोप लगाए हैं?
BJP ने आरोप लगाया है कि PRC योजना बांग्लादेशी प्रवासियों को राज्य में बसाने में मदद कर रही है और उन्हें सरकारी सुविधाएँ व आधार कार्ड दिलाए जा रहे हैं। सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह कानून-सम्मत है।
कर्नाटक में सूखा राहत के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
सरकार ने पीने के पानी की व्यवस्था के लिए प्रत्येक जिले को ₹5 करोड़ जारी किए हैं और डिप्टी कमिश्नरों के PD खातों में कुल ₹329 करोड़ उपलब्ध हैं। प्रत्येक तालुक को ₹1 करोड़ देने की भी घोषणा की गई है, जबकि सूखाग्रस्त जिलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार कब होगा?
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर के अनुसार, पार्टी नेता दिल्ली में हाईकमान से चर्चा कर रहे हैं और मंजूरी मिलने के बाद ही विस्तार होगा। निर्णय में युवा नेतृत्व को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 5 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 2 महीने पहले