3 सितंबर 2026
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राजौरी SSP नरेश सिंह ने प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टरों को दिया अनुशासन और जनसेवा का संदेश

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राजौरी SSP नरेश सिंह ने प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टरों को दिया अनुशासन और जनसेवा का संदेश

सारांश

राजौरी के SSP नरेश सिंह ने 2019 और 2024 बैच के प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टरों को साफ संदेश दिया — वर्दी भरोसे का प्रतीक है, न केवल पोशाक। जनसेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर के साथ अनुशासनहीनता पर सख्त विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

मुख्य बातें

SSP नरेश सिंह ने 3 सितंबर 2026 को राजौरी में प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टरों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किया।
सत्र में 2019 और 2024 बैच के PSI अधिकारी तथा ASP सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
SSP ने ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनता के प्रति जवाबदेही को पुलिसिंग का मूल बताया।
दुर्व्यवहार या नैतिक मानकों से समझौते पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
जनता और पुलिस के बीच विश्वास बहाली को राजौरी पुलिस की प्राथमिकता बताया गया।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में पुलिस सेवा को अधिक जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) नरेश सिंह ने 3 सितंबर 2026 को जिले में तैनात प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टरों (PSI) के साथ एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में 2019 और 2024 बैच के PSI अधिकारी शामिल हुए।

बैठक का उद्देश्य और उपस्थिति

इस संवाद सत्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सहित जिले के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य लक्ष्य युवा अधिकारियों को पुलिस सेवा के मूल मूल्यों — ईमानदारी, अनुशासन और जनता के प्रति जवाबदेही — से परिचित कराना था। यह सत्र उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत राजौरी पुलिस नई पीढ़ी के अधिकारियों को ज़मीनी स्तर पर तैयार करने पर बल दे रही है।

SSP का संदेश: वर्दी है जिम्मेदारी का प्रतीक

SSP नरेश सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पुलिस की वर्दी महज एक पोशाक नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'पुलिस कर्मियों को अपनी ड्यूटी निभाते समय ईमानदारी, पेशेवर व्यवहार और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखना चाहिए। फील्ड में आपका आचरण ही पुलिस विभाग की छवि बनाता है।' उन्होंने PSI अधिकारियों से आग्रह किया कि वे संवेदनशीलता और निष्पक्षता को अपनी पुलिसिंग का आधार बनाएँ।

जनता और पुलिस के बीच विश्वास पर जोर

SSP ने कहा कि सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह पुलिसिंग आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। उनके अनुसार, पुलिसिंग तभी सफल मानी जाएगी जब आम नागरिक बिना किसी भय के थाने में अपनी शिकायत लेकर आ सके। यह टिप्पणी उस संदर्भ में महत्वपूर्ण है जब जम्मू-कश्मीर में पुलिस-जन संबंधों को सुधारने पर प्रशासनिक स्तर पर लगातार बल दिया जा रहा है।

अनुशासनहीनता पर सख्त चेतावनी

SSP नरेश सिंह ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि दुर्व्यवहार, लापरवाही या पेशेवर एवं नैतिक मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह चेतावनी विशेष रूप से उन युवा अधिकारियों के लिए थी जो अभी प्रोबेशन अवधि में हैं और जिनके लिए यह प्रारंभिक प्रशिक्षण काल उनके पूरे करियर की नींव रखता है।

आगे की राह

सत्र का समापन इस निर्देश के साथ हुआ कि सभी PSI अधिकारी समर्पण और पेशेवर रवैये के साथ ड्यूटी निभाएँ और जनसेवा को अपनी पुलिसिंग जिम्मेदारियों के केंद्र में रखें। इस तरह के संवाद सत्र राजौरी पुलिस की उस कोशिश को दर्शाते हैं जिसमें नए अधिकारियों को सेवा की शुरुआत में ही सही दिशा देने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीन पर होती है। जम्मू-कश्मीर में पुलिस-जन संबंधों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, और केवल एक बैठक में दिए गए निर्देश तब तक अर्थपूर्ण नहीं होते जब तक उनकी पालना की निगरानी के लिए कोई ठोस तंत्र न हो। SSP की चेतावनी सख्त है, पर यह देखना होगा कि विभागीय कार्रवाई की यह प्रतिबद्धता कागज़ों से बाहर निकलकर व्यवहार में भी दिखती है या नहीं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजौरी में SSP नरेश सिंह ने प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टरों के साथ यह सत्र क्यों आयोजित किया?
यह सत्र नए अधिकारियों को पुलिस सेवा के मूल मूल्यों — ईमानदारी, अनुशासन और जनता के प्रति जवाबदेही — से परिचित कराने के लिए आयोजित किया गया। राजौरी पुलिस का उद्देश्य प्रोबेशन काल में ही युवा अधिकारियों को सही दिशा देना है।
इस सत्र में कौन-कौन से बैच के अधिकारी शामिल हुए?
सत्र में 2019 और 2024 बैच के प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टर शामिल हुए। इसके अलावा ASP और जिले के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे।
SSP नरेश सिंह ने अनुशासनहीनता पर क्या चेतावनी दी?
SSP ने स्पष्ट किया कि दुर्व्यवहार, लापरवाही या पेशेवर एवं नैतिक मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
SSP के अनुसार सफल पुलिसिंग की पहचान क्या है?
SSP नरेश सिंह के अनुसार पुलिसिंग तभी सफल मानी जाएगी जब आम नागरिक बिना किसी भय के थाने में अपनी शिकायत लेकर आ सके। सुलभता, निष्पक्षता और पारदर्शिता को उन्होंने आधुनिक पुलिसिंग की बुनियाद बताया।
यह संवाद सत्र जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
जम्मू-कश्मीर में पुलिस-जन संबंधों को मजबूत करना प्रशासनिक प्राथमिकता रही है। राजौरी जैसे संवेदनशील जिले में नए अधिकारियों को जनसेवा और जवाबदेही का प्रशिक्षण देना इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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