राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा: NDA ने किया स्वागत, विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता के सवाल
सारांश
मुख्य बातें
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद पर रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर 3 सितंबर को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों ने इस नियुक्ति का खुलकर स्वागत किया, वहीं विपक्षी नेताओं ने मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कथित अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए।
NDA नेताओं की प्रतिक्रिया
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने मिश्रा को बधाई देते हुए कहा, 'जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व किया और भारत को जीत दिलाई। हमें उम्मीद है कि वह इस नई जिम्मेदारी को भी उसी तरह संभालेंगे और यहाँ पारदर्शिता भी लाएंगे।' BJP विधायक राम कदम ने कहा कि सीईओ पद के लिए 6,000 से अधिक आवेदन मिले थे और चयन प्रक्रिया में ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जिसमें हिंदू धर्म में आस्था और देशभक्ति का संयोग हो।
BJP सांसद संतोष पांडे ने कहा, 'हमें गर्व है कि ऐसे देशभक्त और ईमानदार व्यक्ति को नियुक्त किया गया है, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 43 साल मातृभूमि की सेवा में समर्पित किए। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिसकी दुनिया भर में तारीफ हुई।' BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वायत्त और स्वतंत्र संस्था है तथा नियुक्तियों के संबंध में इसके अपने नियम हैं।
पश्चिम बंगाल BJP के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि मिश्रा राम मंदिर के भव्य निर्माण कार्य की ठीक से देखरेख करेंगे। छत्तीसगढ़ के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस नियुक्ति को 'बड़ा संयोग और सौभाग्य' बताते हुए कहा कि मिश्रा न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक अहम हस्ती हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मिश्रा की नियुक्ति से यह सुनिश्चित होगा कि 'अतीत में हुई घटनाएं दोबारा न हों।'
उत्तर प्रदेश के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि जिस व्यक्ति ने ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाई हो, वह निश्चित रूप से देशभक्त और राष्ट्रवादी है। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने भी नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि गड़बड़ियों की रिपोर्ट मिलने पर नए लोगों को लाना संस्थान के कामकाज को बेहतर बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम है।
सावधानी भरी प्रतिक्रिया
BJP के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मिश्रा की क्षमता को स्वीकार करते हुए भी सतर्क किया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अच्छा काम किया। लेकिन यहाँ हालात अलग हैं — यहाँ छिपे हुए दुश्मन हैं, इसलिए थोड़ी सावधानी बरतनी होगी।' यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि यह NDA के भीतर से ही नई भूमिका की जटिलताओं को रेखांकित करती है।
विपक्ष की चिंताएँ और आरोप
समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने मिश्रा का स्वागत करते हुए बताया कि वे उनके संसदीय क्षेत्र के भटपार रानी विधानसभा क्षेत्र के भोपतपुरा गाँव के निवासी हैं। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में IAS और IPS अधिकारी सरकारी दबाव के कारण स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाते, जिससे मिश्रा की जिम्मेदारी और चुनौतीपूर्ण हो जाएगी। राजभर ने अयोध्या में चढ़ावे की कथित चोरी और महीनों तक घटनाओं को दबाए रखने की बातों का भी उल्लेख किया, और कहा कि इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक SIT गठित की थी तथा राष्ट्रीय स्तर पर भी जाँच बैठाई गई थी।
कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने इस नियुक्ति की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि कुछ संत इस मंदिर को 'BJP और RSS के लिए लूट का अड्डा' मानते हैं। उन्होंने कहा, 'संतों का कहना है कि यह काम संतों का है। कुछ संत तो इसे राम मंदिर मानने को भी तैयार नहीं हैं।' पटोले ने सरकार पर आस्था का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप भी लगाया।
मंदिर प्रबंधन का पृष्ठभूमि संदर्भ
गौरतलब है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने किया था और यह 500 साल के कानूनी और सामाजिक संघर्ष के बाद अस्तित्व में आया। ट्रस्ट एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन इसके प्रबंधन पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मंदिर के वित्तीय प्रबंधन को लेकर जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हैं।
आगे की राह
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के सामने एक ओर निर्माण कार्य की देखरेख और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाकर विपक्ष और संतों की आशंकाओं को दूर करने की भी जिम्मेदारी है। राजनीतिक दलों के बीच इस नियुक्ति पर एकमत न होना यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में राम मंदिर ट्रस्ट का प्रबंधन एक प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना रहेगा।