3 सितंबर 2026
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नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: विदेशी नागरिकों से ठगी के आरोप में तीन गिरफ्तार

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नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: विदेशी नागरिकों से ठगी के आरोप में तीन गिरफ्तार

सारांश

नोएडा के सेक्टर-138 में देर रात छापेमारी में पुलिस ने एक अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। तीन राज्यों से आए तीन आरोपी गिरफ्तार — आरोप है कि ये विदेशी सिम और फर्जी पहचान से विदेशी नागरिकों को ठग रहे थे। 9 कंप्यूटर और 4 आईफोन समेत बड़ी मात्रा में उपकरण जब्त।

मुख्य बातें

नोएडा पुलिस ने 2-3 सितंबर 2026 की देर रात सेक्टर-138 में एक अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारा।
गिरफ्तार तीन आरोपी: मंसूरी राशिद (26) अहमदाबाद, तरुण मिश्रा (39) सिरोही और चन्द्रकांत (39) करवर से।
पुलिस ने 9 डेस्कटॉप कंप्यूटर , 9 सीपीयू , 9 हेडफोन , 1 राउटर और 4 आईफोन बरामद किए।
आरोपी कथित तौर पर फर्जी पहचान और विदेशी सिम कार्ड के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते थे।
ठगी की अवधि, पीड़ितों की संख्या और धन हस्तांतरण के तरीके की जाँच जारी है।

नोएडा पुलिस ने 2-3 सितंबर 2026 की देर रात सेक्टर-138 स्थित प्लॉट संख्या-58 की इमारत की तीसरी मंजिल पर संचालित एक अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी पहचान और विदेशी सिम कार्ड के जरिए विदेशी नागरिकों को ठगी का शिकार बना रहा था।

छापेमारी का घटनाक्रम

थाना सेक्टर-142 पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर-138 की उक्त इमारत में अवैध गतिविधियाँ चल रही हैं। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने देर रात मौके पर दबिश दी और वहाँ एक सक्रिय कॉल सेंटर संचालित होता पाया।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 9 सीपीयू, 9 डेस्कटॉप कंप्यूटर, 9 माउस, 9 कीबोर्ड, 9 हेडफोन, 1 राउटर और 4 आईफोन बरामद किए। ये उपकरण साइबर ठगी के नेटवर्क की व्यापकता का संकेत देते हैं।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

गिरफ्तार तीनों आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों से हैं। मंसूरी राशिद (26 वर्ष) गुजरात के अहमदाबाद का निवासी है। तरुण मिश्रा (39 वर्ष) राजस्थान के सिरोही जिले का रहने वाला बताया गया है। चन्द्रकांत (39 वर्ष) कर्नाटक के करवर क्षेत्र का निवासी है।

यह तथ्य कि तीनों आरोपी तीन अलग-अलग राज्यों से हैं, जाँचकर्ताओं के अनुसार इस ऑपरेशन के अंतर-राज्यीय संगठित स्वरूप की ओर इशारा करता है।

ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए विदेशी सिम कार्ड और कंप्यूटर-मोबाइल के माध्यम से विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे और उनके साथ धोखाधड़ी करते थे। प्रारंभिक जाँच में यह सामने आया है, हालाँकि ठगी के सटीक तरीके और पीड़ितों की संख्या की जाँच अभी जारी है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को विदेशी सिम कार्ड कहाँ से प्राप्त होते थे और ठगी से अर्जित रकम को किस माध्यम से ट्रांसफर या उपयोग किया जाता था।

जाँच की दिशा

बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे कॉल सेंटर के संचालन की अवधि, विदेशी नागरिकों से संपर्क के तरीके और ठगी के व्यापक नेटवर्क की जानकारी मिलने की संभावना है। जाँच के दौरान इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी खुलासे हो सकते हैं।

गौरतलब है कि साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच नोएडा पुलिस लगातार ऐसे फर्जी कॉल सेंटरों के खिलाफ अभियान चला रही है। यह छापेमारी उसी सिलसिले की एक कड़ी है। आने वाले दिनों में गिरफ्तार आरोपियों की पूछताछ से इस नेटवर्क की पूरी परतें खुलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संगठित अंतर-राज्यीय नेटवर्क है — जो विदेशी सिम कार्ड की आपूर्ति श्रृंखला के बिना संभव नहीं। असली सवाल यह है कि ये सिम कार्ड किसके जरिए आ रहे थे और ठगी की रकम कहाँ जा रही थी — जिसका जवाब अभी जाँच में है। नोएडा लंबे समय से साइबर ठगी के हब के रूप में चर्चा में रहा है; जब तक आपूर्ति श्रृंखला — सिम विक्रेता, हवाला नेटवर्क, भर्तीकर्ता — नहीं तोड़ी जाती, तब तक छापेमारी केवल सतह को खरोंचती रहेगी।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा के फर्जी कॉल सेंटर में क्या हुआ?
नोएडा पुलिस ने 2-3 सितंबर 2026 की देर रात सेक्टर-138 स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर छापा मारकर अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि यह गिरोह विदेशी नागरिकों को फर्जी पहचान और विदेशी सिम कार्ड के जरिए ठग रहा था।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और कहाँ के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार तीन आरोपियों में मंसूरी राशिद (26) गुजरात के अहमदाबाद, तरुण मिश्रा (39) राजस्थान के सिरोही जिले और चन्द्रकांत (39) कर्नाटक के करवर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। तीनों अलग-अलग राज्यों से होना इस गिरोह के अंतर-राज्यीय स्वरूप का संकेत देता है।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने मौके से 9 सीपीयू, 9 डेस्कटॉप कंप्यूटर, 9 माउस, 9 कीबोर्ड, 9 हेडफोन, एक राउटर और चार आईफोन बरामद किए। इन उपकरणों का डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण जाँच का अहम हिस्सा है।
आरोपी विदेशी नागरिकों को कैसे ठगते थे?
पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर विदेशी सिम कार्ड और कंप्यूटर-मोबाइल के माध्यम से विदेशी नागरिकों से संपर्क करते और धोखाधड़ी करते थे। ठगी के सटीक तरीके और कुल पीड़ितों की संख्या की जाँच अभी जारी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ जारी है। जाँच में यह पता लगाने की कोशिश है कि विदेशी सिम कार्ड कहाँ से आते थे, ठगी की रकम कैसे ट्रांसफर होती थी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
राष्ट्र प्रेस
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