गुड्डू बादशाह हत्याकांड: दिल्ली पुलिस ने 12,000 किमी के अंतर-राज्यीय ऑपरेशन में 8 आरोपी दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 3 सितंबर को मोहम्मद इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह की हत्या का मामला सुलझाने का दावा किया। 28 जुलाई को दिल्ली के पुल प्रहलादपुर स्थित लाल कुआं में गोली मारकर की गई इस हत्या की जांच में पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु में करीब 12,000 किलोमीटर की अंतर-राज्यीय कार्रवाई के बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह एक पूर्व-नियोजित साजिश थी जिसमें विभिन्न आरोपियों ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
मुख्य घटनाक्रम
28 जुलाई को पुल प्रहलादपुर के लाल कुआं में चुंगी नंबर 3 के पास डी-29 में गोलीबारी की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस को मोहम्मद इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह मृत अवस्था में मिले, जबकि मोहम्मद फारुख गोली लगने से घायल पाए गए। क्राइम टीम और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और खून से सने सबूत, खाली कारतूस, जिंदा कारतूस तथा धातु के प्रोजेक्टाइल बरामद कर जब्त किए।
शुरुआत में फारुख ने खुद को घायल पीड़ित के रूप में पेश किया। लेकिन कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) विश्लेषण, तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर उसके बयानों में विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद साजिश में उसकी कथित भूमिका उजागर हुई और उसे 28 जुलाई को ही गिरफ्तार कर लिया गया।
हत्या की कथित साजिश
पुलिस की जांच के अनुसार, यह हत्या बिहार के सुपौल में पुरानी दुश्मनी का परिणाम थी। मुख्य आरोपी शमशाद और अशफाक की गुड्डू बादशाह से पुरानी रंजिश थी। आरोपियों ने कथित तौर पर पुराना विवाद सुलझाने का बहाना बनाकर पीड़ित को बिहार से दिल्ली बुलाया। समझौते की आड़ में बुलाई गई इस कथित बैठक का इस्तेमाल जाल के रूप में किया गया और लाल कुआं के एक किराए के गोदाम में ले जाकर गुड्डू की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
पुलिस के अनुसार, अलग-अलग आरोपियों ने हत्या की टीम को लाने-ले जाने, रहने का इंतजाम करने, हमला करने और सबूत मिटाने जैसी भूमिकाएं निभाईं।
आठों आरोपियों की पहचान और भूमिका
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आठ आरोपी इस प्रकार हैं:
मो. फारुख (27), दिल्ली के पुल प्रहलादपुर का निवासी — पीड़ित का भरोसा जीतकर उसे किराए के मकान में बुलाया और आरोपियों के बीच समन्वय किया। मो. आफताब, बिहार के सुपौल का निवासी — हत्या टीम की आवाजाही और एकत्रीकरण में मदद की; उसे तमिलनाडु के तिरुपुर में स्थानीय पुलिस की सहायता से पकड़ा गया। मो. इरफान (23), उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के साहिबाबाद का निवासी — अपराध के बाद पनाह और लॉजिस्टिकल सहायता दी; उसकी निशानदेही पर एक अवैध पिस्तौल, एक अतिरिक्त मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए गए।
मो. शमशाद (28), बिहार के सुपौल का निवासी — मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक; इंटरनेट-आधारित संचार प्लेटफॉर्म के जरिए सह-आरोपियों के संपर्क में रहा। मो. अशफाक (23), बिहार के सुपौल का निवासी — अपराध की योजना और समन्वय में शामिल रहा। पुलिस के अनुसार, शमशाद और अशफाक का सुपौल में दर्ज हत्या के एक अन्य मामले में भी आपराधिक रिकॉर्ड है। मो. रहमतुल्लाह उर्फ छोटू (22), बिहार के सुपौल का निवासी — हमले को अंजाम देने में भाग लिया और बाद में सबूत छिपाने में मदद की।
अमन यादव (25), दिल्ली के लाल कुआं के पुल प्रहलादपुर का निवासी — सह-आरोपियों के लिए रहने और लॉजिस्टिक्स का इंतजाम किया; घटना की रात अपनी मोटरसाइकिल पर आफताब, रहमतुल्लाह और शोएब के साथ गया और गोलीबारी में शामिल हुआ। मो. शोएब अख्तर, बिहार के सुपौल का निवासी — तमिलनाडु से दिल्ली आने के दौरान हमले की टीम के साथ था।
तकनीकी जांच और बरामदगी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने मोबाइल फोन बंद कर, ठिकाने बदलकर और इंटरनेट-आधारित या हॉटस्पॉट संचार का उपयोग करके गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की। हालांकि, तकनीकी निगरानी, फील्ड इंटेलिजेंस, CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से पुलिस उन्हें ट्रेस करने में सफल रही।
जांच के दौरान एक अवैध पिस्तौल, एक अतिरिक्त मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। अमन यादव और फारुख द्वारा छिपाए गए दो और अवैध हथियारों तथा अन्य संबंधित सामग्री की बरामदगी की कार्रवाई जारी है। बरामद हथियारों और कारतूसों की फोरेंसिक व बैलिस्टिक जांच की जा रही है।
आगे की जांच
सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश किया जा चुका है। पुलिस ने बताया कि यह जांच दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु — पाँच राज्यों में एक साथ छापेमारी के साथ करीब 12,000 किलोमीटर की दूरी तय करके पूरी की गई। आगे की जांच जारी है और शमशाद के डिजिटल व संचार लिंक की पुष्टि की प्रक्रिया चल रही है।