टिल्लू ताजपुरिया गैंग के दो सदस्य गिरफ्तार, पिस्तौल और 8 कारतूस बरामद; दिल्ली में तीन और मामलों में पुलिस की कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 1 जुलाई 2026 को कुख्यात टिल्लू उर्फ ताजपुरिया गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया — यह कार्रवाई अलीपुर थाने में दर्ज हत्या की कोशिश के एक संगीन मामले में हुई, जिसमें विवादित संपत्ति पर कब्जे के दौरान 12 राउंड फायरिंग की गई थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल और 8 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
मुख्य गिरफ्तारी और बरामदगी
क्राइम ब्रांच की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपी संदीप उर्फ डागू और दीपक को दबोचा। पुलिस के अनुसार, जब टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो दोनों भागने लगे, जिसके बाद पीछा कर उन्हें काबू किया गया। आरोपियों के पास से एक काले रंग की स्कॉर्पियो कार, अवैध हथियार और कारतूस भी जब्त किए गए।
गौरतलब है कि टिल्लू ताजपुरिया गैंग दिल्ली-NCR में संपत्ति विवादों और जबरन वसूली से जुड़े कई मामलों में पहले भी नामित रहा है। यह गिरफ्तारी गैंग के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में पुलिस की ताज़ा कड़ी है।
दरियागंज में वाहन चोरों पर शिकंजा
दरियागंज पुलिस ने 26-27 जून की दरमियानी रात दो संदिग्धों को अलग-अलग स्कूटर चलाते हुए देखा। रोकने पर दोनों घबराकर स्कूटर छोड़कर भागने लगे, लेकिन पुलिस ने कुछ ही दूरी पर उन्हें पकड़ लिया। आरोपियों की पहचान मोहम्मद शादमान और मो. कैफ के रूप में हुई है। मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस ने एक 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस को शिकायत मिली थी कि ठगों ने एक पीड़िता को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बनाए रखकर RTGS के जरिए ₹7.22 लाख की धोखाधड़ी की।
तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हावड़ा में छापेमारी की और समीरन रॉय, प्रिंस शॉ तथा समर चटर्जी को हिरासत में लिया। आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 18 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।
आगे की कार्रवाई
तीनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ताजपुरिया गैंग मामले में आरोपियों से पूछताछ जारी है और गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। साइबर फ्रॉड मामले में डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।