गोल्डी बराड़-लिपिन नेहरा गैंग के दो गुर्गे दिल्ली में गिरफ्तार, 6 हथियार और कारतूस बरामद
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 14 जुलाई 2026 को गोल्डी बराड़-लिपिन नेहरा गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की। पकड़े गए आरोपियों की पहचान रणदीप उर्फ रिंकू (36), निवासी झज्जर, हरियाणा, और हितेश कुमार (23), निवासी रेवाड़ी, हरियाणा के रूप में हुई है। उनके पास से छह आधुनिक फायरआर्म्स, दो सिंगल शॉट पिस्टल और आठ जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तारी कैसे हुई
दिल्ली पुलिस की एंटी-गैंगस्टर स्क्वॉड (एजीएस) और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने गुप्त मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर द्वारका स्थित यूईआर-2 के पास ताजपुर इलाके में जाल बिछाया। निगरानी के दौरान दोनों आरोपी कार में आते दिखे। पुलिस को देखते ही उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन छापेमारी दल ने उन्हें दबोच लिया। उनकी कार भी जब्त कर ली गई।
गैंग में इनकी भूमिका
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी गैंग के लिए अवैध हथियारों की आपूर्ति करने और रंगदारी से वसूली गई रकम गैंग के सदस्यों तक पहुँचाने का काम करते थे। यह सब वे कथित तौर पर लिपिन नेहरा के सीधे निर्देश पर करते थे। दोनों पर हरियाणा में रंगदारी से जुड़े कई फायरिंग मामलों में भी शामिल होने के आरोप हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी रणदीप ने हरियाणा के एक कारोबारी से ₹1 करोड़ की रंगदारी माँगी थी। पिछले वर्ष उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लिपिन नेहरा के इशारे पर उस कारोबारी को धमकियाँ भी दी थीं।
कनाडा से एन्क्रिप्टेड ऐप के ज़रिए संचालन
जाँच में सामने आया है कि कनाडा में बैठा लिपिन नेहरा भारत में अपने साथियों को एन्क्रिप्टेड सिग्नल ऐप के माध्यम से अवैध हथियारों और गोला-बारूद की खेप हासिल करने के निर्देश देता था। गैंग ने विशेष रूप से हितेश कुमार और रणदीप राठी को हथियारों की खेप लेने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी।
गौरतलब है कि एनसीआर क्षेत्र में संगठित अपराध, रंगदारी और अवैध हथियारों के इस्तेमाल के मामलों में लगातार वृद्धि के मद्देनज़र एजीएस को ऐसे नेटवर्क पर निगरानी रखने और दिल्ली व आसपास के राज्यों में सक्रिय गैंग सदस्यों की पहचान करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी।
आगे की जाँच
पुलिस अब आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि बरामद हथियारों के मूल स्रोत का पता लगाया जा सके और गैंग के अन्य सदस्यों की पहचान हो सके। जाँचकर्ता यह भी खंगाल रहे हैं कि अवैध हथियारों की तस्करी का रास्ता क्या था, गैंगवार के लिए हथियार कैसे पहुँचाए जाते थे और रंगदारी वसूली का पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित होता था। इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।