गोंडा में खाद संकट पर अखिलेश यादव का BJP पर हमला: 'दोगुनी लाइन से उखाड़ फेंकेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 5 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े किसानों का वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि आज खाद के लिए लाइन में खड़े ये किसान अगले विधानसभा चुनाव में BJP के विरुद्ध इससे भी बड़ी कतार लगाकर उसे सत्ता से बाहर कर देंगे।
अखिलेश यादव का आरोप
अखिलेश यादव ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि भरी बरसात में गोंडा के किसान खाद लेने के लिए कतार में खड़े हैं और उनका कहना है कि अगले चुनाव में इससे दोगुनी लाइन BJP के विरुद्ध वोट डालने के लिए लगेगी, जिससे BJP हमेशा के लिए सत्ता से बाहर हो जाएगी। उन्होंने लिखा — 'जब खेत मुस्कुराएगा, तब देश मुस्कुराएगा!'
एक अन्य पोस्ट में सपा प्रमुख ने कहा कि 'BJP का भ्रष्टाचार' का नाला जब तक बहता रहेगा, कुछ नहीं बदलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के सामने एकमात्र संकट BJP है और पार्टी के जाते ही सब कुछ सुधर जाएगा।
गोंडा में खाद संकट की स्थिति
खरीफ सीजन के दौरान यूरिया और डीएपी की बढ़ती माँग के बीच गोंडा जिले की सहकारी समितियों पर किसानों की लंबी कतारें लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। माधवगंज और रेतवागाड़ा साधन सहकारी समितियों पर सोमवार और मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान यूरिया लेने पहुँचे।
कई किसानों ने सुबह से शाम तक इंतजार करने के बाद भी खाद न मिलने की शिकायत की। सावन के व्रत के दौरान भी महिलाओं और बुजुर्ग किसानों के बारिश में घंटों कतार में खड़े रहने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चित हुईं।
प्रशासन और अधिकारियों का पक्ष
समिति स्तर के अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध स्टॉक का लगातार वितरण किया जा रहा है, लेकिन अचानक बढ़ी माँग और भीड़ के कारण दबाव की स्थिति बन गई। कुछ स्थानों पर वितरण कार्य में लगे कर्मचारियों की अनुपस्थिति से भी अव्यवस्था की शिकायतें सामने आईं।
जिला प्रशासन और कृषि विभाग का दावा है कि जिले में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के जिले में पहुँचकर खाद वितरण व्यवस्था की समीक्षा और छापेमारी के बावजूद कई समितियों पर किसानों को घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है। गौरतलब है कि कृषि संकट और किसान असंतोष को सपा अपने चुनावी अभियान का केंद्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश में है। खाद की कमी और वितरण की अव्यवस्था जैसे मुद्दे ग्रामीण मतदाताओं को सीधे प्रभावित करते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार खाद वितरण की स्थिति को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और विपक्ष इस मुद्दे को किस हद तक चुनावी मंच पर ले जाता है।