20 सितंबर 2026
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अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा प्रहार: 'झूठी बातों पर अब कोई भरोसा नहीं, जनता सुनने के मूड में नहीं'

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अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा प्रहार: 'झूठी बातों पर अब कोई भरोसा नहीं, जनता सुनने के मूड में नहीं'

सारांश

अखिलेश यादव ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में भाजपा पर मंदिर चोरी से लेकर भ्रष्टाचार, किसान, रोज़गार और पीडीए भेदभाव तक दर्जनों आरोप एक साथ दाग दिए — और सीधे कहा कि 'जनता अब उन्हें सुनने के मूड में नहीं है।' यह यूपी की सियासत में सपा का अब तक का सबसे व्यापक एकल प्रहार है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 20 सितंबर 2026 को एक्स पर लंबी पोस्ट के ज़रिए बिना नाम लिए भाजपा पर हमला बोला।
आरोपों में मंदिर चोरी, मुकदमों की वापसी, शंकराचार्य पर प्रहार, और बाबासाहेब की मूर्तियाँ तोड़ने जैसे गंभीर इल्जाम शामिल हैं।
जनता के टैक्स के ₹2.5 करोड़ प्रतिदिन 'नकली छवि' पर खर्च करने का आरोप लगाया।
किसानों को खाद-पानी-बिजली न मिलना, भर्ती परीक्षाओं का अदालतों में फँसना और आरक्षण को नुकसान पहुँचाने के भी आरोप।
पीडीए समाज के साथ कथित भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में रिकॉर्ड वृद्धि का मुद्दा भी उठाया।
भाजपा की ओर से पोस्ट पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 20 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए बिना नाम लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोला। लखनऊ में रविवार को जारी इस पोस्ट में उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की दुर्दशा और रोज़गार समेत दर्जनों मुद्दों पर सरकार को घेरा और कहा कि जनता अब उन्हें सुनने के मूड में नहीं है।

मुख्य आरोप और बयान

अखिलेश ने एक्स पर लिखा, 'मंदिर में चोरी करवाने वाले और दुखी मां का अपमान करने वालों की झूठी बात का भरोसा अब कोई नहीं कर रहा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने अपने ऊपर से मुकदमे हटवाए हों, जो पूज्य शंकराचार्य पर प्रहार करवाते हों और जो संविधान का विरोध करने के लिए बाबासाहेब की मूर्तियाँ तक तोड़ रहे हों, उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

सपा अध्यक्ष ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अन्याय, हाथरस की पीड़िता को अंतिम संस्कार तक न्याय न मिलने, एक युवा विधवा को जेल में तड़पाने और प्राध्यापकों, पत्रकारों तथा ईमानदार अधिकारियों को अभद्र भाषा से संबोधित किए जाने का भी आरोप लगाया।

आर्थिक और प्रशासनिक विफलताओं पर निशाना

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कॉरिडोर, पुल, एक्सप्रेसवे, मंदिर और पानी की टंकी के नाम पर निर्माण में भ्रष्टाचार हो रहा है और जनता के टैक्स के ₹2.5 करोड़ प्रतिदिन 'नकली छवि' बनाने पर खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर झूठे मुकदमे लगाने, फर्जी एनकाउंटर और बुलडोजर से घर गिराने के भी आरोप लगाए।

उनके अनुसार भ्रष्टाचार के पैसे को सोने की सिल्ली में ढलवाने और कमीशनखोरी के कारण महंगाई बढ़ी है, जिससे खाना-पीना, दवाई-इलाज और पढ़ाई तक महंगी हो गई है। उन्होंने जीएसटी के कारण छोटे दुकानदारों और कारखानों के प्रभावित होने तथा हस्तकलाओं और शिल्पकारों को नुकसान का भी उल्लेख किया।

किसान, युवा और रोज़गार पर चिंता

सपा नेता ने कहा कि किसानों को खाद, सिंचाई का पानी और बिजली नहीं मिल रही, छुट्टा पशुओं से खेती नहीं बच पा रही और किसानों व मजदूरों को उनकी फसल और मेहनत का सही दाम नहीं मिल रहा। उन्होंने 1090 और 69000 वाले अभ्यर्थियों, यूपीएसएसएससी, टीईटी और सैन्य भर्ती के अभ्यर्थियों को उपेक्षित और उत्पीड़ित बताया। लेटरल एंट्री, संविदा और 'नॉट फाउंड सूटेबल' के ज़रिए आरक्षण को नुकसान पहुँचाने का आरोप भी लगाया।

कानून-व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव के आरोप

अखिलेश ने कहा कि संबंधित शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा का रिकॉर्ड बना है और हिरासत में मौतों के मामले सामने आए हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि 'अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा ही जीरो हो गया है' और 'हथेली गरम, पुलिस नरम' का फार्मूला जनता में लोकप्रिय हो गया है। आईपीएस के फरार होने और थाने पर छापे पड़ने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

सपा अध्यक्ष ने पीडीए समाज के साथ कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि पीडीए समाज के लोगों के आवास गंगाजल से धुलवाए जाते हैं तथा उनसे मिलने से पहले उन्हें साबुन से नहलाया जाता है।

सपा का राजनीतिक संदेश

अखिलेश ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा, 'ऐसे लोगों की बातों का अब कोई असर नहीं हो रहा है क्योंकि वो खुद दिन भर किसी के असर में रहते हैं। जनता अब उनको सुनने के मूड में नहीं है।' गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सियासी तापमान बढ़ा हुआ है और सपा भाजपा सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करने की कोशिश में जुटी है। भाजपा की ओर से इस पोस्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यूपी चुनावी रणनीति की झलक है — एक ही पोस्ट में इतने विविध मुद्दों को समेटना स्पष्ट संकेत देता है कि सपा हर वर्ग के मतदाता तक एक साथ पहुँचना चाहती है। हालाँकि, आरोपों की यह बाढ़ अपने आप में एक जोखिम है — जब हर बात आरोप बन जाए तो कोई भी बात पैनी नहीं रहती। असली परीक्षा यह है कि क्या सपा इन आरोपों को ज़मीनी अभियान और विधानसभा में ठोस साक्ष्य के साथ आगे ले जा पाती है, या यह पोस्ट भी सोशल मीडिया के शोर में दब जाती है। भाजपा की चुप्पी अभी रणनीतिक हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जनता के बीच इनमें से कौन-सा मुद्दा सबसे ज़्यादा गूँजता है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने भाजपा पर क्या-क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने भाजपा पर मंदिर में चोरी करवाने, मुकदमे हटवाने, बाबासाहेब की मूर्तियाँ तोड़ने, महंगाई, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की विफलता, किसानों और युवाओं की उपेक्षा तथा पीडीए समाज से भेदभाव समेत दर्जनों आरोप लगाए। यह पोस्ट 20 सितंबर 2026 को एक्स पर जारी की गई।
अखिलेश यादव की यह पोस्ट कब और कहाँ जारी की गई?
यह पोस्ट 20 सितंबर 2026 को रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी की गई। सपा का मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में है।
अखिलेश यादव ने किसानों और युवाओं के बारे में क्या कहा?
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को खाद, सिंचाई का पानी और बिजली नहीं मिल रही तथा छुट्टा पशुओं से खेती नहीं बच पा रही। युवाओं के लिए उन्होंने कहा कि नौकरी-भर्तियाँ अदालतों में फँसी हैं और लेटरल एंट्री व संविदा नियुक्तियों से आरक्षण को नुकसान हो रहा है।
पीडीए समाज को लेकर अखिलेश ने क्या आरोप लगाए?
अखिलेश ने आरोप लगाया कि पीडीए समाज के लोगों के आवास गंगाजल से धुलवाए जाते हैं और उनसे मिलने से पहले उन्हें साबुन से नहलाया जाता है। उन्होंने इसे सामाजिक भेदभाव का गंभीर उदाहरण बताया।
भाजपा ने अखिलेश यादव की इस पोस्ट पर क्या प्रतिक्रिया दी?
रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश यादव की इस पोस्ट पर भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए सपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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