अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा प्रहार: 'झूठी बातों पर अब कोई भरोसा नहीं, जनता सुनने के मूड में नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 20 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए बिना नाम लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोला। लखनऊ में रविवार को जारी इस पोस्ट में उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की दुर्दशा और रोज़गार समेत दर्जनों मुद्दों पर सरकार को घेरा और कहा कि जनता अब उन्हें सुनने के मूड में नहीं है।
मुख्य आरोप और बयान
अखिलेश ने एक्स पर लिखा, 'मंदिर में चोरी करवाने वाले और दुखी मां का अपमान करने वालों की झूठी बात का भरोसा अब कोई नहीं कर रहा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने अपने ऊपर से मुकदमे हटवाए हों, जो पूज्य शंकराचार्य पर प्रहार करवाते हों और जो संविधान का विरोध करने के लिए बाबासाहेब की मूर्तियाँ तक तोड़ रहे हों, उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
सपा अध्यक्ष ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अन्याय, हाथरस की पीड़िता को अंतिम संस्कार तक न्याय न मिलने, एक युवा विधवा को जेल में तड़पाने और प्राध्यापकों, पत्रकारों तथा ईमानदार अधिकारियों को अभद्र भाषा से संबोधित किए जाने का भी आरोप लगाया।
आर्थिक और प्रशासनिक विफलताओं पर निशाना
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कॉरिडोर, पुल, एक्सप्रेसवे, मंदिर और पानी की टंकी के नाम पर निर्माण में भ्रष्टाचार हो रहा है और जनता के टैक्स के ₹2.5 करोड़ प्रतिदिन 'नकली छवि' बनाने पर खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर झूठे मुकदमे लगाने, फर्जी एनकाउंटर और बुलडोजर से घर गिराने के भी आरोप लगाए।
उनके अनुसार भ्रष्टाचार के पैसे को सोने की सिल्ली में ढलवाने और कमीशनखोरी के कारण महंगाई बढ़ी है, जिससे खाना-पीना, दवाई-इलाज और पढ़ाई तक महंगी हो गई है। उन्होंने जीएसटी के कारण छोटे दुकानदारों और कारखानों के प्रभावित होने तथा हस्तकलाओं और शिल्पकारों को नुकसान का भी उल्लेख किया।
किसान, युवा और रोज़गार पर चिंता
सपा नेता ने कहा कि किसानों को खाद, सिंचाई का पानी और बिजली नहीं मिल रही, छुट्टा पशुओं से खेती नहीं बच पा रही और किसानों व मजदूरों को उनकी फसल और मेहनत का सही दाम नहीं मिल रहा। उन्होंने 1090 और 69000 वाले अभ्यर्थियों, यूपीएसएसएससी, टीईटी और सैन्य भर्ती के अभ्यर्थियों को उपेक्षित और उत्पीड़ित बताया। लेटरल एंट्री, संविदा और 'नॉट फाउंड सूटेबल' के ज़रिए आरक्षण को नुकसान पहुँचाने का आरोप भी लगाया।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव के आरोप
अखिलेश ने कहा कि संबंधित शासनकाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा का रिकॉर्ड बना है और हिरासत में मौतों के मामले सामने आए हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि 'अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा ही जीरो हो गया है' और 'हथेली गरम, पुलिस नरम' का फार्मूला जनता में लोकप्रिय हो गया है। आईपीएस के फरार होने और थाने पर छापे पड़ने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
सपा अध्यक्ष ने पीडीए समाज के साथ कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि पीडीए समाज के लोगों के आवास गंगाजल से धुलवाए जाते हैं तथा उनसे मिलने से पहले उन्हें साबुन से नहलाया जाता है।
सपा का राजनीतिक संदेश
अखिलेश ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा, 'ऐसे लोगों की बातों का अब कोई असर नहीं हो रहा है क्योंकि वो खुद दिन भर किसी के असर में रहते हैं। जनता अब उनको सुनने के मूड में नहीं है।' गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सियासी तापमान बढ़ा हुआ है और सपा भाजपा सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करने की कोशिश में जुटी है। भाजपा की ओर से इस पोस्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।