अखिलेश यादव का भाजपा पर कविता-वार: 'काला चश्मा लगाकर गुमराह करने वाले अब जाने वाले'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 30 मई 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक तीखी कविता पोस्ट कर उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर सीधा हमला बोला। कविता में उन्होंने कानून-व्यवस्था, बुलडोजर कार्रवाई, आरक्षण, पत्रकारों पर अत्याचार और आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित कई वर्गों की उपेक्षा के आरोप गिनाए। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में जनता सत्ता परिवर्तन का फैसला करेगी।
कविता में क्या कहा अखिलेश ने
सपा प्रमुख ने एक्स पर लिखी कविता में भाजपा सरकार पर एक के बाद एक आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, 'काला चश्मा लगाकर आने वाले, अपने सच्चे मुकदमे हटवाने वाले। झूठे-फर्ज़ी मुक़दमे लगवाने वाले घमंड में रावण तक को हराने वाले।' कविता में बुलडोजर से घर-दुकान ढहाने, बिजली-पानी के लिए सताने और पत्रकारों पर अपशब्द बरसाने के आरोप भी शामिल किए गए।
पीडीए और आरक्षण पर निशाना
अखिलेश ने कविता की अगली पंक्तियों में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग पर 'घोर जुल्म' और आरक्षण पर 'कैंची चलाने' का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षामित्रों का मानदेय घटाने, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भटकाने और अधिवक्ताओं पर लाठी चलवाने का भी उल्लेख किया। साथ ही मणिकर्णिका घाट तुड़वाने और संतों पर झूठे आरोप लगाने जैसे संवेदनशील मुद्दे भी उठाए।
राजनीतिक संदेश और चुनावी संकेत
कविता का समापन करते हुए सपा प्रमुख ने लिखा, 'अब हैं जाने वाले, लौटकर न आने वाले।' यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं और विभिन्न दल चुनावी रणनीति को धार देने में जुटे हैं। गौरतलब है कि सपा लगातार पीडीए गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
भाजपा की ओर से इस कविता पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालाँकि, पार्टी नेता आलोचकों का कहना है कि सपा के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और प्रदेश सरकार के विकास कार्यों को नजरअंदाज करते हैं।
आगे क्या
अखिलेश यादव की यह काव्य-शैली की राजनीतिक टिप्पणी सपा के चुनावी अभियान को नई धार देने की कोशिश मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में सपा और भाजपा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के संकेत हैं।