15 जुलाई 2026
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अखिलेश यादव का भाजपा पर कविता-वार: 'काला चश्मा लगाकर गुमराह करने वाले अब जाने वाले'

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अखिलेश यादव का भाजपा पर कविता-वार: 'काला चश्मा लगाकर गुमराह करने वाले अब जाने वाले'

सारांश

अखिलेश यादव ने एक्स पर कविता के जरिए भाजपा सरकार को घेरा — बुलडोजर, फर्जी मुकदमे, आरक्षण कटौती और पीडीए उत्पीड़न के आरोप एक साथ। 'अब जाने वाले हैं' — यह सिर्फ तंज नहीं, चुनावी शंखनाद है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 30 मई 2026 को एक्स पर कविता पोस्ट कर भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला।
कविता में बुलडोजर कार्रवाई , फर्जी मुकदमे , आरक्षण में कटौती और पीडीए वर्ग पर जुल्म के आरोप लगाए गए।
शिक्षामित्रों का मानदेय घटाने, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भटकाने और अधिवक्ताओं पर लाठी चलाने का भी उल्लेख।
कविता का समापन — 'अब हैं जाने वाले, लौटकर न आने वाले' — को चुनावी संकेत माना जा रहा है।
बयान ऐसे समय आया जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हो रही हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 30 मई 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक तीखी कविता पोस्ट कर उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर सीधा हमला बोला। कविता में उन्होंने कानून-व्यवस्था, बुलडोजर कार्रवाई, आरक्षण, पत्रकारों पर अत्याचार और आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित कई वर्गों की उपेक्षा के आरोप गिनाए। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में जनता सत्ता परिवर्तन का फैसला करेगी।

कविता में क्या कहा अखिलेश ने

सपा प्रमुख ने एक्स पर लिखी कविता में भाजपा सरकार पर एक के बाद एक आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, 'काला चश्मा लगाकर आने वाले, अपने सच्चे मुकदमे हटवाने वाले। झूठे-फर्ज़ी मुक़दमे लगवाने वाले घमंड में रावण तक को हराने वाले।' कविता में बुलडोजर से घर-दुकान ढहाने, बिजली-पानी के लिए सताने और पत्रकारों पर अपशब्द बरसाने के आरोप भी शामिल किए गए।

पीडीए और आरक्षण पर निशाना

अखिलेश ने कविता की अगली पंक्तियों में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग पर 'घोर जुल्म' और आरक्षण पर 'कैंची चलाने' का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षामित्रों का मानदेय घटाने, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भटकाने और अधिवक्ताओं पर लाठी चलवाने का भी उल्लेख किया। साथ ही मणिकर्णिका घाट तुड़वाने और संतों पर झूठे आरोप लगाने जैसे संवेदनशील मुद्दे भी उठाए।

राजनीतिक संदेश और चुनावी संकेत

कविता का समापन करते हुए सपा प्रमुख ने लिखा, 'अब हैं जाने वाले, लौटकर न आने वाले।' यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं और विभिन्न दल चुनावी रणनीति को धार देने में जुटे हैं। गौरतलब है कि सपा लगातार पीडीए गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

भाजपा की ओर से इस कविता पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालाँकि, पार्टी नेता आलोचकों का कहना है कि सपा के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और प्रदेश सरकार के विकास कार्यों को नजरअंदाज करते हैं।

आगे क्या

अखिलेश यादव की यह काव्य-शैली की राजनीतिक टिप्पणी सपा के चुनावी अभियान को नई धार देने की कोशिश मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में सपा और भाजपा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सपा के अपने कार्यकाल में भी इनमें से कई समस्याएँ बनी रहीं — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह काव्य-आक्रोश जमीनी संगठन में तब्दील होता है, या महज सोशल मीडिया की लहर बनकर रह जाता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने भाजपा पर कविता में क्या-क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने कविता में भाजपा सरकार पर बुलडोजर से घर-दुकान ढहाने, फर्जी मुकदमे लगाने, आरक्षण में कटौती, पीडीए वर्ग पर जुल्म, पत्रकारों पर अपशब्द और अधिवक्ताओं पर लाठी चलाने जैसे आरोप लगाए। साथ ही शिक्षामित्रों का मानदेय घटाने और आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का भी उल्लेख किया।
'काला चश्मा' वाले तंज का क्या मतलब है?
अखिलेश यादव ने 'काला चश्मा लगाकर जनता को गुमराह करने वाले' वाक्यांश भाजपा नेतृत्व पर व्यंग्य के रूप में इस्तेमाल किया, जिसका आशय है कि सरकार जानबूझकर असलियत छुपाकर जनता को भ्रमित कर रही है। यह पूरी कविता का केंद्रीय रूपक है।
अखिलेश यादव ने यह कविता कहाँ और कब पोस्ट की?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यह कविता 30 मई 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट की। इसमें उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों पर एक के बाद एक व्यंग्यात्मक पंक्तियाँ लिखीं।
इस बयान का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियाँ बढ़ रही हैं और सपा पीडीए गठबंधन को मजबूत करने में जुटी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की काव्य-शैली की आलोचना सोशल मीडिया पर व्यापक वर्गों तक पहुँचने की कोशिश है।
पीडीए वर्ग क्या है और अखिलेश ने इसका जिक्र क्यों किया?
पीडीए का अर्थ है पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — वह सामाजिक गठबंधन जिसे सपा अपना मुख्य वोट आधार मानती है। अखिलेश ने कविता में इस वर्ग पर 'घोर जुल्म' का आरोप लगाकर इन समुदायों में भाजपा के खिलाफ भावनात्मक लामबंदी की कोशिश की है।
राष्ट्र प्रेस
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