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अखिलेश यादव का आरोप: खाद-बीज-डीजल की महंगाई से किसान बर्बाद, मोदी सरकार के 12 साल में आय दोगुनी नहीं हुई

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अखिलेश यादव का आरोप: खाद-बीज-डीजल की महंगाई से किसान बर्बाद, मोदी सरकार के 12 साल में आय दोगुनी नहीं हुई

सारांश

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर अखिलेश यादव का सीधा वार — किसानों की आय दोगुनी नहीं, आधी रह गई। डीजल, खाद और एनपीके उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरे संकट की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 8 जून को मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर किसानों की दुर्दशा को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ, बल्कि आय और कमज़ोर हुई है।
डीजल, खाद, बीज और एनपीके उर्वरकों की बढ़ती कीमतों से किसानों का मौसमी बजट बिगड़ा, खेती घाटे का सौदा बनी।
सपा प्रमुख ने चेतावनी दी कि यदि कृषि लागत नियंत्रित नहीं की गई तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि किसान खेती और अपनी ज़मीन से दूर होते जा रहे हैं, जो कृषि क्षेत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार, 8 जून को लखनऊ में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्षों में किसानों की आय दोगुनी होने के बजाय और कमज़ोर हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजल, खाद और बीज की लगातार बढ़ती कीमतों ने कृषि को घाटे का सौदा बना दिया है और किसान गहरे आर्थिक संकट में हैं।

मुख्य आरोप: वादा बनाम हकीकत

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन 12 वर्षों के शासन के बाद यह वादा खोखला साबित हुआ है। उनके अनुसार, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा, जबकि उत्पादन लागत आसमान छू रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई की मार ने किसानों और आम उपभोक्ताओं दोनों का जीवन दूभर कर दिया है।

खाद-बीज और डीजल: तिहरी मार

सपा प्रमुख ने विस्तार से बताया कि डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि के बाद अब एनपीके उर्वरकों — यानी नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश युक्त खाद — के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे किसानों का मौसमी बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और सिंचाई पर बढ़ता खर्च कृषि को आर्थिक रूप से अव्यवहारिक बना रहा है। बिजली और उत्पादन लागत की पुरानी चुनौतियों के ऊपर उर्वरकों की नई महंगाई किसानों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है।

सरकार की नीतियों पर सवाल

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीतियों का सीधा बोझ किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को किसानों की तकलीफों की कोई चिंता नहीं है और महंगाई लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। यह ऐसे समय में आया है जब मोदी सरकार अपने 12 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट की चेतावनी

सपा अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि कृषि क्षेत्र में बढ़ते संकट के कारण किसानों का खेती से मोहभंग हो रहा है और वे धीरे-धीरे अपनी ज़मीन से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि खेती की लागत नियंत्रित करने और किसानों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर और दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा कृषि राज्य है और यहाँ के किसानों की स्थिति राष्ट्रीय कृषि संकट का आईना मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि कृषि लागत में वृद्धि — खासकर एनपीके उर्वरकों और डीजल की — वैश्विक आपूर्ति शृंखला दबावों से भी जुड़ी है, जिसे सिर्फ केंद्र सरकार की नीति पर नहीं थोपा जा सकता। असली सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में सपा के अपने शासनकाल में कृषि लागत नियंत्रण के लिए क्या ठोस ढाँचा खड़ा किया गया था — और आज की आलोचना में वह जवाबदेही कहाँ है।
RashtraPress
8 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने किसानों की आय दोगुनी न होने का आरोप क्यों लगाया?
अखिलेश यादव ने मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह आरोप लगाया कि सरकार का किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ। उनके अनुसार, डीजल, खाद और बीज की बढ़ती कीमतों के कारण खेती की लागत इतनी बढ़ गई है कि किसानों की वास्तविक आय घटी है।
एनपीके उर्वरकों की कीमत बढ़ने से किसानों पर क्या असर पड़ा?
नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश युक्त एनपीके उर्वरकों का उपयोग फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए व्यापक रूप से होता है। इनकी कीमतें बढ़ने से किसानों का मौसमी बजट बिगड़ा है और कृषि की कुल लागत में और इज़ाफा हुआ है।
अखिलेश यादव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर क्या चेतावनी दी?
सपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि खेती की लागत नियंत्रित करने और किसानों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर और दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान धीरे-धीरे खेती और अपनी ज़मीन से दूर होते जा रहे हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने का वादा कब और किसने किया था?
केंद्र सरकार ने वर्षों पहले किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य घोषित किया था। अखिलेश यादव के अनुसार, मोदी सरकार के 12 वर्षों के शासन के बाद यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बजाय कमज़ोर हुई है।
उत्तर प्रदेश के किसानों के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
अखिलेश यादव के अनुसार, उत्तर प्रदेश के किसान बिजली, सिंचाई, उत्पादन लागत, डीजल और अब उर्वरकों की बढ़ती कीमतों से एक साथ जूझ रहे हैं। उपज का उचित मूल्य न मिलना और लागत का लगातार बढ़ना खेती को घाटे का सौदा बना रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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