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अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला: रुपया कमजोर, चाय से पेट्रोल-डीजल तक सब महंगा

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अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला: रुपया कमजोर, चाय से पेट्रोल-डीजल तक सब महंगा

सारांश

मैनपुरी में अखिलेश यादव ने भाजपा को महंगाई, बिजली संकट और कानून-व्यवस्था पर घेरा। रुपये की गिरावट को आम जनता की थाली तक जोड़ते हुए उन्होंने 2027 के लिए पीडीए एकता का शंखनाद किया।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 13 जून को मैनपुरी में भाजपा सरकार पर महंगाई, बिजली कटौती और स्मार्ट मीटर को लेकर हमला बोला।
उनके अनुसार डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से चाय, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस सभी महंगी हो गई हैं।
ग्रामीण इलाकों में लोगों ने स्मार्ट मीटर उखाड़ फेंके — सपा ने इसे जनाक्रोश का प्रतीक बताया।
सपा ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ अब 'प्यार, दया और अपनापन' का नारा भी अपनाया।
2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा ने सामाजिक सद्भाव और सर्व-समावेशी गठबंधन की रणनीति की घोषणा की।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 13 जून को मैनपुरी में आयोजित एक जनसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महंगाई, बिजली संकट, स्मार्ट मीटर विवाद और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनता अब बदलाव के लिए तैयार है।

रुपये की कमजोरी और महंगाई का बोझ

अखिलेश यादव ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, चाय, डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस समेत तमाम जरूरी चीजें महंगी हो गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बजट पहले से ही दबाव में है और मध्यम व निम्न आय वर्ग के परिवारों पर बोझ बढ़ता जा रहा है।

स्मार्ट मीटर और बिजली संकट

सपा प्रमुख ने स्मार्ट मीटर मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में लोगों ने स्मार्ट मीटर उखाड़कर फेंक दिए, जो सरकार की इस नीति के प्रति जनाक्रोश को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नेता एयर कंडीशनर की सुविधा में रहते हैं, जबकि प्रदेश की आम जनता को पर्याप्त बिजली नसीब नहीं होती।

पीडीए की राजनीति और 2027 का लक्ष्य

अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने पीडीए — पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक — के आह्वान का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित, परेशान और अपमानित तबके एकजुट हो रहे हैं और यही एकता 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए चुनौती बनी थी। गौरतलब है कि अब पार्टी पीडीए का अर्थ 'प्यार, दया और अपनापन' के रूप में भी प्रचारित कर रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सपा सभी समुदायों को साथ लेकर सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश देने के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी।

भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप

सपा अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर कथित फर्जी एनकाउंटर के आरोप भी लगाए और कहा कि सरकार ने न केवल आम नागरिकों बल्कि विपक्षी नेताओं के साथ भी अन्याय किया है। उन्होंने अयोध्या में चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है। ये आरोप अभी तक सत्यापित नहीं हैं और भाजपा की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या

2027 के विधानसभा चुनाव में अभी करीब डेढ़ साल का समय है, लेकिन सपा ने जमीनी स्तर पर अभियान तेज कर दिया है। मैनपुरी जैसे सपा के परंपरागत गढ़ों में इस तरह की जनसभाएं पार्टी की चुनावी तैयारियों का हिस्सा मानी जा रही हैं। महंगाई और बिजली जैसे स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर सपा भाजपा के खिलाफ जनमत तैयार करने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 के लिए सपा की जमीनी कथा का पहला मसौदा है। रुपये की कमजोरी को थाली तक जोड़ना चतुर राजनीतिक फ्रेमिंग है — लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या सपा के पास महंगाई का कोई ठोस वैकल्पिक आर्थिक एजेंडा है। पीडीए का विस्तार 'प्यार, दया और अपनापन' तक करना संकेत देता है कि पार्टी सिर्फ पहचान-आधारित गोलबंदी से आगे बढ़कर व्यापक मतदाता आधार छूना चाहती है — जो 2022 की हार का सबक है। फर्जी एनकाउंटर और अयोध्या घोटाले के आरोप बिना सत्यापन के उछाले गए हैं, जो विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने मैनपुरी में क्या कहा?
अखिलेश यादव ने 13 जून को मैनपुरी में भाजपा सरकार पर महंगाई, बिजली संकट और स्मार्ट मीटर विवाद को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रुपये की कमजोरी से चाय से लेकर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस तक सब महंगा हो गया है।
रुपये की कमजोरी का आम जनता पर क्या असर पड़ रहा है?
अखिलेश यादव के अनुसार डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ती है, जिसका असर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ता है। इससे निम्न और मध्यम आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।
सपा का पीडीए फॉर्मूला क्या है और 2027 में इसकी क्या भूमिका होगी?
पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — यह सपा की चुनावी गोलबंदी की रणनीति है। अब पार्टी इसका अर्थ 'प्यार, दया और अपनापन' भी बता रही है ताकि व्यापक मतदाता आधार तक पहुंचा जा सके। 2027 के विधानसभा चुनाव में यही गठबंधन सपा की मुख्य रणनीति होगी।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर विवाद क्या है?
अखिलेश यादव ने दावा किया कि ग्रामीण इलाकों में लोगों ने सरकार द्वारा लगाए गए स्मार्ट मीटर उखाड़कर फेंक दिए, जो इस नीति के प्रति जनाक्रोश को दर्शाता है। स्मार्ट मीटर को लेकर उत्तर प्रदेश में पहले से विवाद चल रहा है।
2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में सपा की क्या तैयारी है?
सपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पीडीए गठबंधन के तहत सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की रणनीति बनाई है। मैनपुरी जैसे परंपरागत गढ़ों में जनसभाएं कर पार्टी महंगाई और बिजली जैसे स्थानीय मुद्दों पर जनमत तैयार करने में जुटी है।
राष्ट्र प्रेस
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