28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश में खाद-बीज संकट: जीतू पटवारी का आरोप, किसान आधी रात से लगा रहे लाइन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश में खाद-बीज संकट: जीतू पटवारी का आरोप, किसान आधी रात से लगा रहे लाइन

सारांश

बोवनी के मौसम में मध्य प्रदेश के कई जिलों में किसान आधी रात से खाद के लिए कतार में — कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे सरकारी विफलता करार देते हुए ₹6,000 की सम्मान निधि को 'ऊंट के मुंह में राई' बताया और मुख्यमंत्री मोहन यादव तथा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सीधी चुनौती दी।

मुख्य बातें

कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 11 जून को राज्य सरकार पर खाद-बीज उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया।
अशोकनगर, सिवनी, विदिशा, गुना, राजगढ़ सहित कई जिलों में किसान आधी रात से खाद के लिए कतार लगा रहे हैं।
पीएम-किसान सम्मान निधि की ₹6,000 सालाना सहायता को पटवारी ने बढ़ती कृषि लागत के सामने अपर्याप्त बताया।
राष्ट्रीय आँकड़ों के अनुसार 2023 में खेती से जुड़े आत्महत्या के मामलों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई।
पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधे चुनौती दी।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 11 जून को राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बोवनी के इस अहम मौसम में किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। उन्होंने कहा कि अशोकनगर, सिवनी, विदिशा, गुना और राजगढ़ सहित कई जिलों में किसान आधी रात से खाद के लिए कतार में खड़े हैं और ई-टोकन के लिए रातभर जाग रहे हैं।

किसानों की ज़मीनी हकीकत

पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'राज्य के अशोकनगर, सिवनी, विदिशा, गुना, राजगढ़ जैसे कई जिलों में किसान आधी रात से खाद के लिए लाइन लगा रहे हैं, ई-टोकन के लिए रातभर जाग रहे हैं, बोवनी के इस समय में खाद-बीज की किल्लत झेल रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ की बुवाई का मौसम चरम पर है और किसानों के लिए समय पर आदान उपलब्धता जीवन-रेखा के समान है।

मोदी सरकार के दावों पर सीधा सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की स्थिति में सुधार के दावों पर पलटवार करते हुए पटवारी ने कहा, 'मेरी समझ से यह परे है कि आप कौन-से देश के किसानों की समृद्धि की तस्वीर बता रहे हैं, क्योंकि मध्य प्रदेश का गरीब, कर्जदार किसान तो आज भी खाद, बीज, सिंचाई, उचित मूल्य, बढ़ते कर्ज के संकट से जूझ रहा है।' उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा और पीएम-किसान सम्मान निधि की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए, यह पूछते हुए कि जब डीजल, खाद, बीज और कृषि लागत लगातार बढ़ रही है तो किसानों की वास्तविक आय क्यों नहीं बढ़ रही।

किसान आत्महत्या और सम्मान निधि पर चिंता

पटवारी ने किसान आत्महत्याओं के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आँकड़ों के अनुसार 2023 में खेती-किसानी से जुड़े आत्महत्या के मामलों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली ₹6,000 की सालाना सहायता को उन्होंने 'ऊंट के मुंह में राई' करार दिया, क्योंकि उनके अनुसार यह राशि बढ़ती कृषि लागत, महंगी खाद, बिजली, सिंचाई और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में सक्षम नहीं है।

केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को चेतावनी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को निशाने पर लेते हुए पटवारी ने कहा, 'किसान को अब भाषण नहीं, समय पर खाद चाहिए। सरकारी प्रचार नहीं, उपज का लाभकारी मूल्य चाहिए। किसान को हैशटैग नहीं, खेती की गारंटी चाहिए।' उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी आगाह किया कि जब तक खेत की मेड़ पर खड़ा किसान समृद्ध नहीं होगा, तब तक सोशल मीडिया पर लिखी गई 'किसान समृद्धि' झूठी ही मानी जाएगी।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विपक्ष ने मध्य प्रदेश में कृषि आदान की किल्लत को लेकर सरकार को घेरा हो। बोवनी के मौसम में खाद-बीज संकट की यह तस्वीर राज्य सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ाती है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस आरोप का जवाब देती है या आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे सत्ता में कोई भी दल हो। असली सवाल यह है कि ई-टोकन जैसी डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बावजूद रातभर की कतारें क्यों नहीं रुक रहीं — यह आपूर्ति श्रृंखला की संरचनात्मक खामी है, जिसे विपक्ष उजागर कर रहा है पर समाधान का रोडमैप किसी के पास नहीं दिखता।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में खाद-बीज संकट क्या है?
बोवनी के मौसम में मध्य प्रदेश के अशोकनगर, सिवनी, विदिशा, गुना और राजगढ़ सहित कई जिलों में किसानों को खाद और बीज की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। किसान आधी रात से कतार लगाने और ई-टोकन के लिए रातभर जागने को मजबूर हैं।
जीतू पटवारी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बोवनी के अहम मौसम में किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध नहीं करा रही। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि किसान को भाषण नहीं, खाद चाहिए।
पीएम-किसान सम्मान निधि की ₹6,000 की राशि पर पटवारी ने क्या कहा?
पटवारी ने ₹6,000 की सालाना सहायता को 'ऊंट के मुंह में राई' करार दिया। उनका तर्क है कि यह राशि बढ़ती कृषि लागत, महंगी खाद, बिजली, सिंचाई और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में नाकाफी है।
किसान आत्महत्या पर क्या आँकड़े सामने आए हैं?
पटवारी के अनुसार राष्ट्रीय आँकड़े बताते हैं कि 2023 में खेती-किसानी से जुड़े आत्महत्या के मामलों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने इसे देश के सामने सबसे बड़ी चिंता का विषय बताया।
मध्य प्रदेश सरकार ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अभी तक राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का इस मुद्दे पर कोई बयान अभी तक उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले