4 अक्टूबर 2026
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बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: महागठबंधन में टकराव, पटना स्नातक सीट पर जदयू विधायक ने खोला मोर्चा

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बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: महागठबंधन में टकराव, पटना स्नातक सीट पर जदयू विधायक ने खोला मोर्चा

सारांश

बिहार विधान परिषद के चुनावी रण में न सिर्फ महागठबंधन के राजद और कांग्रेस तीन सीटों पर आमने-सामने हैं, बल्कि पटना स्नातक सीट पर जदयू विधायक अनंत सिंह ने खुद अपनी पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है — गठबंधन की राजनीति का असली चेहरा सामने है।

मुख्य बातें

बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान, मतगणना 27 अक्टूबर को।
महागठबंधन में टकराव: राजद (6 सीट) और कांग्रेस (5 सीट) के उम्मीदवार पटना स्नातक , दरभंगा स्नातक और कोसी स्नातक पर आमने-सामने।
एनडीए ने चार सीटें BJP और चार सीटें जदयू को दीं; जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार पटना स्नातक से मैदान में।
जदयू विधायक अनंत सिंह (मोकामा) ने जन सुराज प्रत्याशी डॉ.
अनुज सिंह का समर्थन किया, नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार की घोषणा की।
नीरज कुमार ने नीतीश कुमार से मुलाकात की; नीतीश ने मजबूती से चुनाव लड़ने का संदेश दिया।
जन सुराज ने सभी 8 सीटों पर प्रत्याशी उतारकर मुकाबला बहुकोणीय बनाया।

बिहार विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन की आंतरिक एकता की पोल खुलती दिख रही है — राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार कई सीटों पर आमने-सामने हैं, जबकि पटना स्नातक सीट पर जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर ही बगावत के सुर उठ रहे हैं। 23 अक्टूबर 2026 को आठ सीटों पर मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना, लेकिन उससे पहले ही गठबंधनों की अंदरूनी राजनीति चर्चा का केंद्र बन गई है।

चुनावी तस्वीर: कौन कहाँ

बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर यह चुनाव हो रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सीटों का बँटवारा साफ रखा है — भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जदयू को चार-चार सीटें मिली हैं।

दूसरी ओर महागठबंधन में तालमेल का अभाव स्पष्ट दिखता है। राजद ने छह सीटों पर और कांग्रेस ने पाँच सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक और पटना स्नातक — इन तीन सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। दरभंगा शिक्षक और पटना शिक्षक सीटों पर राजद ने उम्मीदवार नहीं उतारा है और यहाँ कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में हैं।

जन सुराज का त्रिकोणीय दाँव

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब एनडीए और महागठबंधन दोनों अपनी-अपनी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन के कई सहयोगी दलों के प्रत्याशी कई सीटों पर एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े थे और उसे 'फ्रेंडली फाइट' का नाम दिया गया था।

पटना स्नातक सीट: जदयू में घर का भेदी

सबसे दिलचस्प मुकाबला पटना स्नातक सीट पर है। यहाँ जदयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के सामने जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह हैं। लेकिन असली पेंच यह है कि मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह खुले तौर पर डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में आ गए हैं।

1 अक्टूबर 2026 को अनुज सिंह के नामांकन के दौरान अनंत सिंह उनके साथ मौजूद थे। उन्होंने नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने की भी घोषणा कर दी है। अनंत सिंह का तर्क है कि विधान परिषद का चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़ा जाता, इसलिए वे इसे जदयू के विरुद्ध कदम नहीं मानते। उनका नीरज कुमार से विरोध व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा बताया जा रहा है।

नीतीश कुमार का संदेश और जदयू की चुनौती

इस आंतरिक विवाद के बीच नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार ने उन्हें मजबूती से चुनाव लड़ने और जीत के लिए पूरा प्रयास करने का संदेश दिया। इस तरह एक ओर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नीरज कुमार के पक्ष में है, तो दूसरी ओर उसी दल का एक विधायक प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थन में मैदान में उतर चुका है।

आगे क्या होगा

यह चुनाव केवल आठ सीटों की जीत-हार का मामला नहीं रह गया है। यह बिहार में गठबंधन की राजनीति की असली परीक्षा है — राज्य में विपक्षी एकजुटता की ज़मीनी हकीकत और जदयू जैसे दलों में भीतरी अनुशासन की स्थिति दोनों दाँव पर हैं। 27 अक्टूबर 2026 को आने वाले नतीजे बताएंगे कि बिहार का राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठने वाला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी परतें गहरी हैं। महागठबंधन की 'फ्रेंडली फाइट' की परंपरा दरअसल गठबंधन अनुशासन की खोखली नींव को उजागर करती है — जब राजद और कांग्रेस तीन सीटों पर एक-दूसरे के वोट काटेंगे, तो फायदा साफ तौर पर एनडीए को होगा। इससे भी बड़ा सवाल जदयू के भीतर से उठ रहा है: जब एक विधायक खुलेआम अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करे और उसे 'व्यक्तिगत विरोध' का लेबल लगाकर पार्टी चुप रहे, तो यह नीतीश कुमार की संगठनात्मक पकड़ पर भी सवाल खड़ा करता है। 27 अक्टूबर के नतीजे महज सीटों की जीत-हार नहीं, बल्कि 2025 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधनों की असली ताकत का पैमाना होंगे।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 कब होगा?
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और 27 अक्टूबर 2026 को मतगणना होगी। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
पटना स्नातक सीट पर जदयू में क्या विवाद है?
मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जन सुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन किया है। 1 अक्टूबर 2026 को डॉ. अनुज सिंह के नामांकन में भी वे मौजूद रहे और उन्होंने नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने की घोषणा की है।
महागठबंधन में सीटों का बँटवारा क्यों नहीं हुआ?
राजद ने 6 और कांग्रेस ने 5 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक और पटना स्नातक सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। महागठबंधन में सीट तालमेल की कमी 2025 के विधानसभा चुनाव में भी देखी गई थी, जब सहयोगी दलों के उम्मीदवार कई सीटों पर एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े थे।
जन सुराज का इस चुनाव में क्या रोल है?
जन सुराज ने सभी 8 सीटों पर प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय और बहुकोणीय बना दिया है। पटना स्नातक सीट पर जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह को जदयू के बागी विधायक अनंत सिंह का समर्थन मिलने से यह सीट सबसे चर्चित बन गई है।
एनडीए ने बिहार विधान परिषद चुनाव में सीटें कैसे बाँटी हैं?
एनडीए ने 8 सीटों को बराबर बाँटा है — BJP और जदयू को 4-4 सीटें मिली हैं। जदयू ने पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार समेत चार उम्मीदवार उतारे हैं और नीतीश कुमार ने नीरज कुमार को मजबूती से चुनाव लड़ने का संदेश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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