बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: महागठबंधन में टकराव, पटना स्नातक सीट पर जदयू विधायक ने खोला मोर्चा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन की आंतरिक एकता की पोल खुलती दिख रही है — राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार कई सीटों पर आमने-सामने हैं, जबकि पटना स्नातक सीट पर जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर ही बगावत के सुर उठ रहे हैं। 23 अक्टूबर 2026 को आठ सीटों पर मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना, लेकिन उससे पहले ही गठबंधनों की अंदरूनी राजनीति चर्चा का केंद्र बन गई है।
चुनावी तस्वीर: कौन कहाँ
बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर यह चुनाव हो रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सीटों का बँटवारा साफ रखा है — भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जदयू को चार-चार सीटें मिली हैं।
दूसरी ओर महागठबंधन में तालमेल का अभाव स्पष्ट दिखता है। राजद ने छह सीटों पर और कांग्रेस ने पाँच सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक और पटना स्नातक — इन तीन सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। दरभंगा शिक्षक और पटना शिक्षक सीटों पर राजद ने उम्मीदवार नहीं उतारा है और यहाँ कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में हैं।
जन सुराज का त्रिकोणीय दाँव
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब एनडीए और महागठबंधन दोनों अपनी-अपनी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन के कई सहयोगी दलों के प्रत्याशी कई सीटों पर एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े थे और उसे 'फ्रेंडली फाइट' का नाम दिया गया था।
पटना स्नातक सीट: जदयू में घर का भेदी
सबसे दिलचस्प मुकाबला पटना स्नातक सीट पर है। यहाँ जदयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के सामने जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह हैं। लेकिन असली पेंच यह है कि मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह खुले तौर पर डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में आ गए हैं।
1 अक्टूबर 2026 को अनुज सिंह के नामांकन के दौरान अनंत सिंह उनके साथ मौजूद थे। उन्होंने नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने की भी घोषणा कर दी है। अनंत सिंह का तर्क है कि विधान परिषद का चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़ा जाता, इसलिए वे इसे जदयू के विरुद्ध कदम नहीं मानते। उनका नीरज कुमार से विरोध व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा बताया जा रहा है।
नीतीश कुमार का संदेश और जदयू की चुनौती
इस आंतरिक विवाद के बीच नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार ने उन्हें मजबूती से चुनाव लड़ने और जीत के लिए पूरा प्रयास करने का संदेश दिया। इस तरह एक ओर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नीरज कुमार के पक्ष में है, तो दूसरी ओर उसी दल का एक विधायक प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थन में मैदान में उतर चुका है।
आगे क्या होगा
यह चुनाव केवल आठ सीटों की जीत-हार का मामला नहीं रह गया है। यह बिहार में गठबंधन की राजनीति की असली परीक्षा है — राज्य में विपक्षी एकजुटता की ज़मीनी हकीकत और जदयू जैसे दलों में भीतरी अनुशासन की स्थिति दोनों दाँव पर हैं। 27 अक्टूबर 2026 को आने वाले नतीजे बताएंगे कि बिहार का राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठने वाला है।