ओडिशा डीजीपी (जेल) सुशांत कुमार नाथ पर यौन उत्पीड़न का आरोप, पूर्व महिला जेलर ने दर्ज कराई FIR
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के चौद्वार सर्किल जेल की एक पूर्व महिला जेलर ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (जेल) सुशांत कुमार नाथ पर यौन उत्पीड़न, धमकी और कैरियर बर्बाद करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। चौद्वार पुलिस ने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75(2), 351(2) और 3(5) के अंतर्गत मामला संख्या 713/26 दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। इन आरोपों के बाद ओडिशा सरकार ने नाथ का तबादला कर उन्हें गृह विभाग में विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) के रूप में तैनात किया है।
आरोपों का विवरण
पीड़िता की लिखित शिकायत के अनुसार, 16 जून 2025 को डीजीपी (जेल) नाथ ने चौद्वार सर्किल जेल का दौरा किया, जब वह छुट्टी पर थीं। कथित तौर पर 18 जुलाई 2025 को सेवा में लौटने के बाद उन्होंने फोन पर नाथ से बातचीत की, जिसमें नाथ ने उन्हें कुलदीप राठा नामक अपने कथित मित्र से मुलाकात कराने को कहा।
शिकायत में कहा गया है कि राठा ने मुलाकात के दौरान पीड़िता के साथ तस्वीर खिंचवाई और बाद में उनका मोबाइल नंबर हासिल कर आपत्तिजनक इमोजी वाले संदेश भेजने शुरू किए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 29 अगस्त 2025 और 25-26 सितंबर 2025 को राठा के माध्यम से दो अलग-अलग होटलों में उनसे अकेले मिलने का दबाव डाला गया, जिसे उन्होंने दोनों बार अस्वीकार कर दिया।
धमकी और प्रतिशोध के आरोप
पूर्व जेलर ने यह भी आरोप लगाया है कि नाथ के कथित प्रस्तावों को ठुकराने के बाद उन्हें जान से मारने और करियर व प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ मिलीं। उन्होंने दावा किया कि इनकार के बाद से उन्हें डीजीपी (जेल) द्वारा लगातार निशाना बनाया जा रहा था।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि 2 और 3 अक्टूबर 2025 की दरमियानी रात को चौद्वार सर्किल जेल से दो कुख्यात अपराधियों के फरार होने की जाँच को कथित तौर पर गुमराह किया गया, जिम्मेदारी दूसरों पर डाली गई और उन्हें झूठा फँसाने के लिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई।
सरकार की प्रतिक्रिया
ओडिशा सरकार ने रविवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए डीजीपी (जेल) सुशांत कुमार नाथ का तबादला गृह विभाग में कर उन्हें ओएसडी के पद पर तैनात किया। यह कदम आरोप सामने आते ही उठाया गया, जिसे प्रशासनिक हलकों में शिकायत की गंभीरता के प्रति संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बनाए गए POSH अधिनियम के तहत, विभागीय स्तर पर भी आंतरिक समिति द्वारा जाँच अनिवार्य होती है। अभी तक इस संदर्भ में विभागीय कार्रवाई की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कानूनी पहलू
चौद्वार पुलिस ने बीएनएस की धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न), धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) और धारा 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है और जाँच प्रक्रिया जारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी सेवाओं में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेने की माँग लगातार उठती रही है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़िता को अक्सर प्रतिशोध का सामना करना पड़ता है, जो शिकायत दर्ज कराने की इच्छाशक्ति को कमज़ोर करता है।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसी मामले की तहकीकात कर रही है। आरोपी अधिकारी सुशांत कुमार नाथ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अदालती प्रक्रिया और विभागीय जाँच के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे।