सुचिका तारियाल को एशियन गेम्स MMA सेमीफाइनल में 700 ग्राम वजन के नियम से मिली हार, ब्रॉन्ज से करना पड़ा संतोष
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स 2026 के मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) इवेंट में भारतीय फाइटर सुचिका तारियाल का ऐतिहासिक सफर एक विवादित सेमीफाइनल के बाद ब्रॉन्ज मेडल पर जाकर थम गया। कोच निखिल कुंदर ने खुलासा किया कि आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के बाद मुकाबला ड्रॉ घोषित होने पर एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (AMMA) के 'कम वजन वाले खिलाड़ी' के नियम के तहत प्रतिद्वंद्वी को विजेता घोषित किया गया। सुचिका अपनी प्रतिद्वंद्वी से 700 ग्राम भारी थीं, और यही फर्क उनकी फाइनल में पहुँचने की राह में रोड़ा बन गया।
विवादित सेमीफाइनल का पूरा घटनाक्रम
शुरुआत में सुचिका को सिंगापुर की हुई हून टेओ के विरुद्ध मुकाबले में हार दर्शाई गई, जिसके बाद भारतीय टीम ने इस फैसले के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया। विरोध के पश्चात मुकाबला आर्बिट्रेशन में गया और तीन जजों ने पूरे मुकाबले की दोबारा समीक्षा तथा स्कोरिंग की।
कोच कुंदर ने बताया, 'हमें भरोसा था कि सुचिका ने फाइट जीत ली है। नियम के मुताबिक, जब आर्बिट्रेशन होता है, तो हम तीन जज चुनते हैं। उन तीन जजों को मुकाबले को दोबारा स्कोर करने का मौका मिलता है। जब उन्होंने दोबारा स्कोरिंग की, तो इसे ड्रॉ घोषित कर दिया गया।'
AMMA के नियमों ने पलटा पूरा खेल
मुकाबला ड्रॉ घोषित होने के बाद AMMA के नियमों के अनुसार सिंगापुरी टीम के सामने दो विकल्प थे — या तो वे काउंटर-आर्बिट्रेशन (जवाबी मध्यस्थता) के लिए जाएँ, या वजन के आधार पर फैसला स्वीकार करें। सिंगापुर ने काउंटर-आर्बिट्रेशन न चुनकर वजन-आधारित निर्णय का विकल्प लिया।
कुंदर ने कहा, 'दुर्भाग्य से, सुचिका उनसे 700 ग्राम भारी थी। और इसी आधार पर, यह मैच उनकी प्रतिद्वंद्वी को दे दिया गया।' उनका स्पष्ट मानना था कि यह परिणाम फाइट के दौरान सुचिका के वास्तविक प्रदर्शन के अनुरूप नहीं था। उन्होंने कहा, 'अगर आप फाइट की तकनीकी बारीकियों और स्कोरिंग को देखें, तो सुचिका जीती थीं।'
भारत के लिए ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल
सेमीफाइनल की इस विवादित हार के बावजूद सुचिका तारियाल ने एशियन गेम्स में MMA के इतिहास में भारत का पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 36 वर्षीया सुचिका जूडो, कुराश और फाइटिंग जिउ-जित्सु जैसे कई कॉम्बैट स्पोर्ट्स में अपना लोहा मनवा चुकी हैं। उन्होंने क्वार्टरफाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।
गौरतलब है कि MMA को आइची-नागोया एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किया गया है, जिससे यह ब्रॉन्ज मेडल भारतीय कॉम्बैट स्पोर्ट्स के लिए और भी विशेष महत्व रखता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कोच कुंदर के बयान से यह सवाल उठता है कि क्या वजन-आधारित टाई-ब्रेकर नियम तकनीकी प्रदर्शन का उचित मूल्यांकन करता है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नियमों की समीक्षा ज़रूरी है, खासकर तब जब आर्बिट्रेशन में ड्रॉ जैसी स्थिति उत्पन्न हो। यह घटना भारतीय MMA परिदृश्य में नियम-जागरूकता और वेट मैनेजमेंट की अहमियत को भी उजागर करती है।
आगे की राह में सुचिका के इस ऐतिहासिक पदक से उम्मीद है कि भारत में MMA को और बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारतीय फाइटर्स बेहतर तैयारी के साथ उतरेंगे।