प्रीति पवार का खुलासा: कॉमनवेल्थ गोल्ड से पहले कैसे घटाया 1.5 किलो वजन, क्या है पूरी रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला मुक्केबाज प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो, स्कॉटलैंड में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 10 पदक अपने नाम किए, जिनमें 7 गोल्ड मेडल शामिल हैं — एक ऐतिहासिक प्रदर्शन। पदक जीतकर लौटने पर प्रीति के परिवार में खुशी का माहौल है और उनके घरवाले गर्व से भरे हुए हैं।
वजन नियंत्रण: मुक्केबाज की सबसे बड़ी चुनौती
प्रीति पवार ने बताया कि मुकाबले से पहले वजन को सीमा में रखना किसी भी मुक्केबाज के लिए सबसे कठिन काम होता है। उन्होंने कहा, 'वजन कम करना निश्चित रूप से एक चुनौती है — यह एथलीट पर निर्भर करता है। जहाँ तक मेरी बात है, मैं लंबे समय से ऐसा कर रही हूँ। बाउट से पहले मैं लगभग 1.5 किलो वजन कम करती हूँ।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान आहार पर सबसे ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। अंतिम चरण में खाना बंद कर दिया जाता है और वजन घटाने के बाद शरीर में पानी की कमी पूरी करना सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है।
वेइन-इन के बाद रिकवरी की रणनीति
प्रीति ने बताया कि वजन जाँच और मुकाबले के बीच कम से कम 3 घंटे का समय मिलता है। उन्होंने अपना दिनचर्या साझा करते हुए कहा कि यदि मुकाबला सुबह 11 बजे होता है, तो वे सुबह 6:30 बजे तक वजन घटा लेती हैं और 7 बजे तक री-हाइड्रेशन शुरू कर देती हैं। इसके बाद सही पोषण लेना और यदि संभव हो तो थोड़ी नींद लेना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
मानसिक तैयारी के बारे में उन्होंने कहा, 'मुझे कल्पना करना पसंद है — मैं मुकाबले से पहले विज़ुअलाइज़ेशन करती हूँ। इससे मुझे मानसिक रूप से बहुत मदद मिलती है।'
एशियन गेम्स की तैयारी
प्रीति ने बताया कि वे आगामी एशियन गेम्स की तैयारी में जुटी हैं। उनके अनुसार एशिया में कई मजबूत देश हैं जो मुक्केबाजी में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं, इसलिए यह चुनौती बड़ी होगी। हालाँकि उन्होंने कहा कि पिछले मार्च में हुई एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने का अनुभव उनके काम आएगा, क्योंकि एशियन गेम्स में भी ज्यादातर वही प्रतिद्वंद्वी होंगे जिनसे वे पहले भिड़ चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग कैंप में कोचों के साथ मिलकर गेम प्लान तैयार किया जाएगा।
क्विलिंग: दबाव से राहत का अनोखा तरीका
प्रीति पवार सिर्फ रिंग में ही नहीं, बल्कि कला के क्षेत्र में भी प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें क्विलिंग और कैलीग्राफी का शौक है। बेलफास्ट में कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले हुए ट्रेनिंग कैंप में उन्होंने खाली समय में क्विलिंग से तेजस्विन शंकर के लिए एक पोस्टर बनाया, जिसे तेजस्विन ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
प्रीति ने कहा, 'मुझे लगता है कि कुछ समय के लिए ध्यान भटकाना जरूरी है। ओवरथिंकिंग अच्छी नहीं होती। क्विलिंग मुझे दबाव संभालने और मानसिक शांति पाने में मदद करती है।' एशियन गेम्स में प्रीति की यही संतुलित मानसिकता उनका सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है।