एनजीटी ने भीषण गर्मी पर लिया स्वतः संज्ञान, 10 राज्यों और केंद्र से 19 अगस्त तक मांगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को गंभीर पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य संकट मानते हुए 29 मई 2026 को केंद्र सरकार और 10 राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने 22 मई को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया और सभी पक्षों को हलफनामे के ज़रिए जवाब एवं एक्शन प्लान दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित है।
मुख्य घटनाक्रम
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ को पक्षकार बनाया है। ट्रिब्यूनल ने मौसम विभाग के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जबकि नई दिल्ली समेत कई इलाके हीटवेव की चपेट में हैं।
शहर और गाँव — दोनों प्रभावित
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि हीटवेव का असर केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। शहरों में कंक्रीट संरचनाएँ, हरियाली की कमी, वाहनों एवं औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषण और बढ़ती बिजली खपत तापमान को और अधिक बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को खुले में लंबे समय तक काम करना पड़ता है, जहाँ शीतलन सुविधाएँ और सरकारी सहायता बेहद सीमित है।
एनजीटी के सुझाव और कानूनी आधार
ट्रिब्यूनल ने केंद्र और राज्य सरकारों को सुझाव दिया कि अब अस्थायी उपायों से काम नहीं चलेगा। इसके लिए क्षेत्रवार जलवायु अनुकूलन योजना, आधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, थर्मल मैपिंग, ओपन क्लाइमेट डेटा और स्कूल-कॉलेज स्तर पर मौसम निगरानी जैसी दीर्घकालिक व्यवस्थाएँ ज़रूरी हैं। एनजीटी ने यह भी रेखांकित किया कि बढ़ती गर्मी का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से है, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत गंभीर चिंता का विषय है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत के कई राज्यों में लू से जनजीवन प्रभावित है और दिहाड़ी मज़दूरों, किसानों तथा बाहरी कामगारों पर इसका सर्वाधिक असर पड़ रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनजीटी ने जलवायु-संबंधी मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया हो, लेकिन इस बार नोटिस की व्यापकता — 10 राज्य और कई केंद्रीय मंत्रालय — इसे असाधारण बनाती है।
आगे क्या होगा
सभी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रीय विभागों को हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब और विस्तृत एक्शन प्लान दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को एनजीटी में होगी, जहाँ सरकारों की तैयारी और इरादे की असली परीक्षा होगी।