देशभर में भीषण हीट-वेव का कहर: दिल्ली, राजस्थान, बिहार और यूपी में लू की चेतावनी जारी
सारांश
मुख्य बातें
देशभर में 26 मई 2026 को भीषण हीट-वेव का प्रकोप जारी है, जिसमें दिल्ली, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों में लू की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान में कोई राहत नहीं मिलने की संभावना है।
सरकारी तैयारियाँ और प्रशासन की प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार के मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि सभी अस्पतालों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे दोपहर की तेज धूप में घर से बाहर न निकलें और अनावश्यक पैदल चलने से बचें। उनके अनुसार प्रशासन स्थिति पर पूरी नज़र बनाए हुए है।
बिहार के गोपालगंज जिला प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों को 31 मई तक बंद रखने का आदेश दिया है। वहीं कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई केवल सुबह 11 बजे तक सीमित कर दी गई है।
मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी
चंडीगढ़ स्थित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वैज्ञानिक शिविंदर सिंह ने बताया कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अगले दो दिनों तक लू की स्थिति बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि 28 मई के बाद पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी हवाओं के कारण नमी बढ़ेगी और वर्षा गतिविधियों में वृद्धि की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष लू वाले दिनों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है।
पटना के मौसम विज्ञानी आशीष कुमार ने बताया कि बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, बक्सर और अरवल जिलों में विशेष रूप से लू की गंभीर स्थिति है और पूरे राज्य में लू की चेतावनी जारी है।
राजस्थान में नौतपा का प्रकोप
राजस्थान में नौतपा के दौरान भीषण गर्मी का असर साफ दिख रहा है। धौलपुर में सड़कें और बाज़ार सुनसान पड़े हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार वहाँ तापमान 47-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा है और रात का तापमान भी असामान्य रूप से अधिक है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि गर्मी से लोगों की स्थिति काफी गंभीर हो गई है।
आम जनता पर असर
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी लोग बेहाल हैं। एक नागरिक प्रखन ने बताया, 'जरा हालात तो देखिए, हम अपने चेहरे रुमाल से ढके हुए हैं, ORS के पैकेट साथ रखते हैं और चलते-फिरते पानी पी रहे हैं। पेड़ों की कमी से और भी ज़्यादा परेशानी हो रही है। अगर सड़क के किनारे और पेड़ होते, तो शायद लोगों को इस गर्मी में इतनी तकलीफ नहीं होती।' यह बयान शहरी हरियाली की कमी और बढ़ते तापमान के बीच गहरे संबंध को उजागर करता है।
क्या होगा आगे
IMD के अनुमान के अनुसार 28 मई के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक प्रशासन और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष की भीषण गर्मी जलवायु परिवर्तन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हो सकती है।