क्या स्टील प्लांट ने वन भूमि का अतिक्रमण किया? ओडिशा सरकार को एनजीटी का नोटिस

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क्या स्टील प्लांट ने वन भूमि का अतिक्रमण किया? ओडिशा सरकार को एनजीटी का नोटिस

सारांश

ओडिशा में झारसुगुड़ा जिले के एक इस्पात संयंत्र पर वन भूमि के अतिक्रमण का आरोप, एनजीटी ने ओडिशा सरकार सहित कई अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। क्या यह मामला न्याय की ओर बढ़ेगा?

Key Takeaways

  • एनजीटी ने ओडिशा सरकार को नोटिस जारी किया है।
  • 5 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण का आरोप।
  • स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज़ें उठ रही हैं।
  • वन मंजूरी के बिना निर्माण गतिविधियां चल रही हैं।
  • स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं।

भुवनेश्वर, 3 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ओडिशा सरकार, जिला कलेक्टर और झारसुगुड़ा के पुलिस अधीक्षक सहित अन्य को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उन आरोपों के संबंध में जारी किया गया है कि झारसुगुड़ा जिले में एक एकीकृत इस्पात संयंत्र ने 5 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण किया है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सत्रुघन मेहर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधिकरण ने सभी संबंधित सरकारी प्राधिकारियों के साथ-साथ उक्त स्टील कंपनी के प्रतिनिधियों को आदेश प्राप्त होने के एक महीने के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया कि आयरन एंड स्टील कंपनी झारसुगुड़ा गांव के मारकुटा में एक एकीकृत इस्पात संयंत्र, एक कैप्टिव पावर प्लांट और एक सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट चला रही है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उक्त कंपनी ने झारसुगुड़ा जिले के मारकुटा में आरओआर में ग्राम्य जंगल किसान के रूप में दर्ज वन भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया है।

उन्होंने आगे दावा किया कि कंपनी ने पहले 5.229 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रस्ताव रद्द हो गया।

याचिकाकर्ता के वकील शंकर प्रसाद पाणि ने शुक्रवार को कहा, "कंपनी ने डायवर्जन के लिए कोई नया प्रस्ताव भी दायर नहीं किया है।"

शंकर प्रसाद पाणि ने आगे बताया कि आवेदक द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में, झारसुगुड़ा के प्रभागीय वन अधिकारी ने खुलासा किया है कि कंपनी ने अब तक एकीकृत इस्पात संयंत्र और अन्य परियोजनाओं के संबंध में वन मंजूरी प्राप्त नहीं की है। हालांकि, निर्माण गतिविधियां वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना ही की गई हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि आवेदक ने 21 जुलाई को उप महानिदेशक (वन), पर्यावरण एवं वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, ओडिशा सरकार के समक्ष वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण की जांच करने का अनुरोध करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

8 जुलाई को, मरकुटा ग्राम पंचायत के नायब सरपंच ने वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के संबंध में झारसुगुड़ा के वन विभाग के वन अधिकारी और झारसुगुड़ा के तहसीलदार के समक्ष भी आवेदन दिया था, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा इस संबंध में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

Point of View

NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

एनजीटी ने किसे नोटिस जारी किया है?
एनजीटी ने ओडिशा सरकार, जिला कलेक्टर और झारसुगुड़ा के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है।
क्या आरोप हैं इस्पात संयंत्र पर?
आरोप है कि इस्पात संयंत्र ने 5 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया है।
क्या इस्पात कंपनी ने वन मंजूरी ली है?
नहीं, झारसुगुड़ा के प्रभागीय वन अधिकारी ने कहा है कि कंपनी ने अभी तक वन मंजूरी प्राप्त नहीं की है।
क्या कोई कार्रवाई हुई है?
स्थानीय अधिकारियों द्वारा अब तक कोई महत्वपूर्ण कार्रवाई नहीं की गई है।
क्या सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले में क्या किया है?
सामाजिक कार्यकर्ता ने एनजीटी में याचिका दायर की है और अवैध अतिक्रमण की जांच की मांग की है।
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