पृथिका प्रदीप ने मैड्रिड आर्चरी वर्ल्ड कप में जीता कांस्य पदक, टीम इवेंट में भारत को रजत
सारांश
मुख्य बातें
17 वर्षीय पृथिका प्रदीप ने 12 जुलाई 2025 को मैड्रिड में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज 4 में महिलाओं के व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर सीनियर अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी में अपनी दमदार दस्तक दी। इसके बाद उन्होंने महिला कंपाउंड टीम इवेंट में भी भारत के लिए रजत पदक सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।
व्यक्तिगत कांस्य पदक का सफर
कांस्य पदक मुकाबले में पृथिका प्रदीप ने तुर्किये की हेजल बुरुन को 145-142 के स्कोर से पराजित कर अपना पहला विश्व कप पदक हासिल किया। यह उनके करियर का पहला वर्ल्ड कप पोडियम था। सेमीफाइनल में वे मलेशिया की फातिन नूरफतेह मैट सालेह से 144-142 के करीबी अंतर से हारकर फाइनल में जगह बनाने से चूक गई थीं। गौरतलब है कि पृथिका ने पिछले वर्ष ढाका में आयोजित एशियन आर्चरी चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था, और यह पदक उस उपलब्धि के बाद उनके बढ़ते कद की पुष्टि करता है।
महिला कंपाउंड टीम इवेंट में रजत
व्यक्तिगत स्पर्धा से पहले, पृथिका ने अनुभवी तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम और चिकिथा तानिपार्थी के साथ मिलकर महिला कंपाउंड टीम इवेंट में भारत को फाइनल तक पहुँचाया। भारतीय तिकड़ी ने क्वालीफिकेशन में 1024 का स्कोर करते हुए सातवीं वरीयता के साथ टूर्नामेंट में प्रवेश किया था। राह में उन्होंने डेनमार्क, मेज़बान स्पेन और तीसरी वरीयता प्राप्त रिपब्लिक ऑफ कोरिया को पराजित किया।
स्वर्ण पदक मुकाबले में भारत को टॉप सीड कोलंबिया के हाथों 228-232 से हार का सामना करना पड़ा। कोलंबिया का प्रतिनिधित्व सारा लोपेज, एलेजांद्रा उस्कियानो और मारियाना रोड्रिगेज ने किया।
पुरुष टीम और मिक्स्ड इवेंट का प्रदर्शन
पुरुषों की कंपाउंड टीम — साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु और कुशल दलाल — कांस्य पदक मुकाबले में जर्मनी से मात्र 232-233 के अंतर से हारकर पदक से वंचित रह गई। इससे पहले उन्हें सेमीफाइनल में मेक्सिको के खिलाफ शूट-आउट में हार झेलनी पड़ी थी। मिक्स्ड कंपाउंड टीम भी मेक्सिको से एक और शूट-आउट में हारकर क्वार्टर-फाइनल में ही बाहर हो गई।
व्यक्तिगत पुरुष स्पर्धा में ऋषभ यादव आगे
पुरुषों के व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट में ऋषभ यादव क्वार्टर-फाइनल तक पहुँचकर भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता रहे, जबकि साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु और कुशल दलाल तीसरे राउंड में ही बाहर हो गए।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय तीरंदाजी युवा प्रतिभाओं के दम पर नई ऊँचाइयाँ छू रही है। पृथिका जैसी किशोर तीरंदाज का सीनियर स्तर पर इस तरह का प्रदर्शन भारतीय तीरंदाजी के भविष्य के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।