पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी नहीं: राजा वडिंग बोले — चन्नी मेरे बड़े भाई, रंधावा से रिश्ते अटूट
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने 10 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में पार्टी के भीतर कथित गुटबाजी की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उनके वरिष्ठ नेता और 'बड़े भाई' हैं, जिनसे वह लगातार सीख रहे हैं। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ किसी स्थायी दरार से भी इनकार किया और कहा कि दोनों के बीच 20-30 वर्षों के पारिवारिक संबंध हैं जो किसी भी गलतफहमी से टूट नहीं सकते।
चन्नी बनाम वडिंग — एक निर्मित विवाद?
मीडिया में चल रही 'चन्नी बनाम वडिंग' की चर्चा पर वडिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी कोई प्रतिस्पर्धा अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने कहा, 'चन्नी साहब बड़े नेता हैं, मैं अभी छोटा हूं। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं। बनाम बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है।' वडिंग ने यह भी जोड़ा कि वह न केवल चन्नी से, बल्कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से सीख रहे हैं, और अनुभव से मिली सीख किसी और माध्यम से हासिल नहीं होती।
बैठक से अनुपस्थिति पर वडिंग का रुख
एक अहम बैठक में शामिल न किए जाने के सवाल पर वडिंग ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। उनका कहना था कि गिले-शिकवों के माहौल में कभी-कभी ऐसी बातें मुंह से निकल जाती हैं जिन्हें वापस नहीं लिया जा सकता, इसलिए उनकी अनुपस्थिति बेहतर है। उन्होंने कहा, 'जो भी बातें होंगी, पहले उन्हें सुन लिया जाएगा। उसके बाद अगली बैठक में मैं सबके साथ बैठकर अपनी बात रखूंगा।' यह रवैया पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया के प्रति उनके संयमित नजरिए को दर्शाता है।
रंधावा से रिश्ते: राजनीति से परे पारिवारिक बंधन
सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ मतभेद के सवाल पर वडिंग ने बताया कि दोनों तब एक-दूसरे के दावेदार थे जब उन्हें पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया गया। बाद में रंधावा को राजस्थान का प्रभारी बनाया गया। वडिंग ने कहा, 'पिछले 20-30 वर्षों से हमारे पारिवारिक संबंध हैं। मैं उनके घर जाता हूं, वह मेरे घर आते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि रंधावा की पत्नी उनकी बहन समान हैं और उनका बेटा परिवार का भांजा। उन्होंने कहा कि यदि कोई नाराजगी है तो उसे बातचीत से दूर किया जाएगा, जैसे पहले राणा गुरजीत सिंह और रंधावा के बीच मतभेद समय के साथ सुलझ गए थे।
पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) विपक्ष में है और आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार चला रही है। ऐसे में पार्टी की एकजुटता 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिहाज से अहम मानी जाती है। आलोचकों का कहना है कि नेतृत्व के भीतर यह कथित खींचतान पार्टी की जमीनी रणनीति को प्रभावित कर सकती है। वडिंग का यह बयान उन्हीं चिंताओं को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि वडिंग ने यह भी स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई होगी तो वह वरिष्ठ नेताओं से क्षमा माँगने में भी संकोच नहीं करेंगे — एक ऐसा बयान जो पार्टी अनुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।