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पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी नहीं: राजा वडिंग बोले — चन्नी मेरे बड़े भाई, रंधावा से रिश्ते अटूट

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पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी नहीं: राजा वडिंग बोले — चन्नी मेरे बड़े भाई, रंधावा से रिश्ते अटूट

सारांश

पंजाब कांग्रेस में 'चन्नी बनाम वडिंग' की चर्चाओं के बीच प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने एकता का संदेश दिया — चन्नी को बड़ा भाई और रंधावा को परिवार का हिस्सा बताया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बयान 2027 की तैयारी में बिखरी पार्टी को सच में जोड़ पाएगा?

मुख्य बातें

राजा वडिंग ने 10 जुलाई 2026 को पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी की खबरों को सिरे से नकारा।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को वडिंग ने 'बड़े भाई' और वरिष्ठ मार्गदर्शक बताया।
वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ 20-30 वर्षों के पारिवारिक संबंधों का हवाला दिया।
वडिंग ने माना कि एक अहम बैठक में उनकी अनुपस्थिति बेहतर थी ताकि गिले-शिकवों का माहौल न बिगड़े।
रंधावा को राजस्थान प्रभारी और वडिंग को पंजाब अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कथित मतभेद उभरे थे।

पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने 10 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में पार्टी के भीतर कथित गुटबाजी की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उनके वरिष्ठ नेता और 'बड़े भाई' हैं, जिनसे वह लगातार सीख रहे हैं। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ किसी स्थायी दरार से भी इनकार किया और कहा कि दोनों के बीच 20-30 वर्षों के पारिवारिक संबंध हैं जो किसी भी गलतफहमी से टूट नहीं सकते।

चन्नी बनाम वडिंग — एक निर्मित विवाद?

मीडिया में चल रही 'चन्नी बनाम वडिंग' की चर्चा पर वडिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी कोई प्रतिस्पर्धा अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने कहा, 'चन्नी साहब बड़े नेता हैं, मैं अभी छोटा हूं। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं। बनाम बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है।' वडिंग ने यह भी जोड़ा कि वह न केवल चन्नी से, बल्कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से सीख रहे हैं, और अनुभव से मिली सीख किसी और माध्यम से हासिल नहीं होती।

बैठक से अनुपस्थिति पर वडिंग का रुख

एक अहम बैठक में शामिल न किए जाने के सवाल पर वडिंग ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। उनका कहना था कि गिले-शिकवों के माहौल में कभी-कभी ऐसी बातें मुंह से निकल जाती हैं जिन्हें वापस नहीं लिया जा सकता, इसलिए उनकी अनुपस्थिति बेहतर है। उन्होंने कहा, 'जो भी बातें होंगी, पहले उन्हें सुन लिया जाएगा। उसके बाद अगली बैठक में मैं सबके साथ बैठकर अपनी बात रखूंगा।' यह रवैया पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया के प्रति उनके संयमित नजरिए को दर्शाता है।

रंधावा से रिश्ते: राजनीति से परे पारिवारिक बंधन

सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ मतभेद के सवाल पर वडिंग ने बताया कि दोनों तब एक-दूसरे के दावेदार थे जब उन्हें पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया गया। बाद में रंधावा को राजस्थान का प्रभारी बनाया गया। वडिंग ने कहा, 'पिछले 20-30 वर्षों से हमारे पारिवारिक संबंध हैं। मैं उनके घर जाता हूं, वह मेरे घर आते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि रंधावा की पत्नी उनकी बहन समान हैं और उनका बेटा परिवार का भांजा। उन्होंने कहा कि यदि कोई नाराजगी है तो उसे बातचीत से दूर किया जाएगा, जैसे पहले राणा गुरजीत सिंह और रंधावा के बीच मतभेद समय के साथ सुलझ गए थे।

पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) विपक्ष में है और आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार चला रही है। ऐसे में पार्टी की एकजुटता 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिहाज से अहम मानी जाती है। आलोचकों का कहना है कि नेतृत्व के भीतर यह कथित खींचतान पार्टी की जमीनी रणनीति को प्रभावित कर सकती है। वडिंग का यह बयान उन्हीं चिंताओं को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि वडिंग ने यह भी स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई होगी तो वह वरिष्ठ नेताओं से क्षमा माँगने में भी संकोच नहीं करेंगे — एक ऐसा बयान जो पार्टी अनुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि वास्तविक एकता का प्रमाण। पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व की यह खींचतान नई नहीं है; 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की विदाई के बाद से पार्टी कभी पूरी तरह एकजुट नहीं हो पाई। असली परीक्षा 2027 के विधानसभा चुनावों में होगी, जब AAP सरकार के खिलाफ एकमत विपक्षी आवाज की जरूरत होगी — और तब तक ये 'पारिवारिक रिश्ते' चुनावी रणनीति की कसौटी पर कसे जाएंगे।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा वडिंग ने पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी पर क्या कहा?
वडिंग ने गुटबाजी से स्पष्ट इनकार किया और कहा कि 'चन्नी बनाम वडिंग' की कहानी मीडिया द्वारा निर्मित है। उन्होंने चन्नी को अपना वरिष्ठ और बड़े भाई समान बताते हुए कहा कि वह उनसे सीख रहे हैं, न कि प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
वडिंग और रंधावा के बीच मतभेद क्यों उभरे?
जब वडिंग को दूसरी बार पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष घोषित किया गया, तब कथित तौर पर रंधावा की नाराजगी सामने आई। वडिंग ने खुद कहा कि साढ़े चार साल तक कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन दोबारा नाम की घोषणा के बाद स्थिति बदली — संभवतः किसी गलतफहमी या गलत जानकारी के कारण।
क्या वडिंग और रंधावा के रिश्ते सुधर सकते हैं?
वडिंग ने भरोसा जताया कि दोनों के बीच 20-30 वर्षों के पारिवारिक संबंध हैं और किसी भी नाराजगी को बातचीत से दूर किया जा सकता है। उन्होंने राणा गुरजीत सिंह और रंधावा के पुराने मतभेद सुलझने का उदाहरण भी दिया।
वडिंग एक अहम बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए?
वडिंग ने खुद बताया कि गिले-शिकवों के माहौल में उनकी उपस्थिति स्थिति को बिगाड़ सकती थी। उन्होंने कहा कि पहले सभी की बातें सुनी जाएंगी, फिर अगली बैठक में वह अपना पक्ष रखेंगे और जरूरत पड़ी तो माफी भी माँगेंगे।
पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी एकता 2027 चुनावों के लिए क्यों जरूरी है?
पंजाब में AAP सरकार के खिलाफ कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है और 2027 विधानसभा चुनावों में सत्ता वापसी के लिए एकजुट नेतृत्व अनिवार्य है। आलोचकों का कहना है कि नेतृत्व की कथित खींचतान जमीनी रणनीति और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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