क्या इंदौर के भागीरथपुरा का पानी अब सुरक्षित है? कैलाश विजयवर्गीय ने साझा की लैब रिपोर्ट

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क्या इंदौर के भागीरथपुरा का पानी अब सुरक्षित है? कैलाश विजयवर्गीय ने साझा की लैब रिपोर्ट

सारांश

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी के बीच एक राहत भरी खबर आई है। हालिया लैब रिपोर्ट में पानी के नमूनों में खतरनाक बीमारियों के कीटाणु नहीं पाए गए हैं। यह रिपोर्ट स्थानीय निवासियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

Key Takeaways

  • भागीरथपुरा का पानी अब सुरक्षित होने की संभावना है।
  • हालिया लैब रिपोर्ट में खतरनाक कीटाणु नहीं पाए गए हैं।
  • स्थानीय निवासियों को अभी भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
  • पानी संकट का कारण सीवेज था।
  • अधिकारियों की जांच जारी है।

इंदौर, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी त्रासदी के बीच राहत की खबर आई है। श्री अरोबिंदो मेडिकल कॉलेज और पीजी इंस्टीट्यूट की एक हालिया लैब रिपोर्ट के अनुसार, वहां से लिए गए पानी के पांच नमूनों में मुख्य पानी से फैलने वाली खतरनाक बीमारियों के कीटाणु नहीं मिले हैं।

राज्य के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने 'एक्स' हैंडल पर रिपोर्ट साझा करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव तथा संभागीय कमिश्नर डॉ. सुदाम पी खाड़े के नेतृत्व में भागीरथपुरा में पीने के पानी को साफ करने के लिए किए गए उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।"

सेंट्रल क्लिनिकल मॉलिक्यूलर लेबोरेटरी द्वारा 4 जनवरी को जारी रिपोर्ट में, आरटी-पीसीआर तकनीक का उपयोग करते हुए भागीरथपुरा से लिए गए नमूनों का विश्लेषण किया गया था।

सभी पांच नमूनों (एस-01 से एस-05) को साफ बोतलों में 25-25 मिलीलीटर में लिया गया था। ये बैक्टीरियल कीटाणुओं जैसे ई. कोलाई ओ157, जेनेरिक ई. कोलाई, विभ्रियो कोलेरा, साल्मोनेला और वायरल पैथोजन रोटावायरस तथा एंटरोवायरस के लिए नेगेटिव पाए गए।

रिपोर्ट ने कहा है कि ये परिणाम दर्शाते हैं कि सभी पांच पानी के नमूनों के आरटी-पीसीआर विश्लेषण में लक्षित बैक्टीरियल और वायरल पैथोजन के लिए नेगेटिव परिणाम आए हैं।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पानी की गुणवत्ता की आगे की पुष्टि के लिए कल्चर-बेस्ड माइक्रोबायोलॉजिकल विश्लेषण और रूटीन फिजिकोकेमिकल परीक्षण किया जा सकता है।

यह परिणाम दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए संकट में एक सकारात्मक विकास है, जो पीने के पानी की पाइपलाइनों में सीवेज के मिलने के कारण हुआ था। स्थानीय निवासियों ने महीनों से बदबूदार, गंदे नल के पानी की शिकायत की थी। इस आउटब्रेक के कारण बड़े पैमाने पर डायरिया और उल्टी हुई है, जिसमें चार मौतें और 200 से अधिक लोग बीमार हुए हैं। कई लोगों को इंटेंसिव केयर में भर्ती कराया गया है।

अधिकारियों ने लीक को ठीक कर दिया है और टैंकर से पानी की आपूर्ति की है। इसके अलावा, अधिकारियों को निलंबित किया गया है और जांच शुरू की गई है।

जबकि पहले दूसरी लैब के परीक्षण में कुछ नमूनों में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हुई थी, इंदौर के एक प्रमुख संस्थान के इस एडवांस्ड आरटी-पीसीआर पैनल से पता चलता है कि परीक्षण किए गए नमूनों में ये खास खतरनाक पैथोजन मौजूद नहीं हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने निवासियों से पूरी तरह से ठीक होने तक पानी उबालकर पीने या टैंकर का पानी इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

Point of View

NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

भागीरथपुरा का पानी अब कितना सुरक्षित है?
हालिया लैब रिपोर्ट में पानी के नमूनों में खतरनाक बीमारियों के कीटाणु नहीं पाए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि पानी सुरक्षित है।
क्या स्थानीय निवासियों को अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत है?
हाँ, स्वास्थ्य अधिकारियों ने निवासियों को सलाह दी है कि वे अभी भी पानी उबालकर पिएं या टैंकर का पानी इस्तेमाल करें।
इस पानी संकट का कारण क्या था?
यह संकट पीने के पानी की पाइपलाइनों में सीवेज मिलने के कारण हुआ था, जिसमें एक निलंबित पुलिस चौकी के टॉयलेट की लीक शामिल थी।
क्या इस मामले में कोई कार्रवाई की गई है?
जी हाँ, अधिकारियों को निलंबित किया गया है और इस मामले की जांच शुरू की गई है।
क्या आगे की जांच की जाएगी?
रिपोर्ट में आगे की जांच के लिए कल्चर-बेस्ड माइक्रोबायोलॉजिकल विश्लेषण और रूटीन फिजिकोकेमिकल परीक्षण की सिफारिश की गई है।
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