सुप्रीम कोर्ट में संभल के शाही जामा मस्जिद सर्वे की सुनवाई स्थगित, अगली तारीख तीन सप्ताह बाद

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सुप्रीम कोर्ट में संभल के शाही जामा मस्जिद सर्वे की सुनवाई स्थगित, अगली तारीख तीन सप्ताह बाद

सारांश

संभल के शाही जामा मस्जिद के सर्वे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और आने वाली सुनवाई का महत्व।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट में शाही जामा मस्जिद सर्वे का मामला चल रहा है।
  • मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
  • हिंदू पक्ष का कहना है कि सर्वे आवश्यक है।
  • अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई का विषय था, जो अब टल गया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद आयोजित करने का आदेश दिया है।

यह मामला उस याचिका से संबंधित है, जिसे मुस्लिम पक्ष ने दायर किया है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में निचली अदालत द्वारा संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के लिए कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति के निर्देश को बरकरार रखा था।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि निचली अदालत को इस तरह से सर्वे कराने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मस्जिद से जुड़े विवाद में कोर्ट कमिश्नर द्वारा सर्वे कराने का आदेश न्यायिक प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से बाहर है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।

पहले की सुनवाई में, हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने उच्च न्यायालय को बताया था कि शाही मस्जिद पहले से ही एक संरक्षित स्मारक है। ऐसे में यहां प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित स्थल पर मंदिर से संबंधित प्राचीन साक्ष्यों को मिटाया जा रहा है, इसलिए वहां सर्वे कराना आवश्यक है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि कोर्ट कमिश्नर द्वारा कराया जाने वाला सर्वे कानून के दायरे में है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है, तो उस पर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का प्रावधान स्वतः लागू नहीं होता।

मुस्लिम पक्ष ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर आगे क्या कानूनी दिशा निर्धारित होती है।

Point of View

जबकि हिंदू पक्ष इसे आवश्यक मानता है। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई इस विवाद का निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
NationPress
16/03/2026

Frequently Asked Questions

इस विवाद का मुख्य कारण क्या है?
यह विवाद शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर है, जिसमें मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई कब निर्धारित की है?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद करने का निर्देश दिया है।
हिंदू पक्ष का इस मामले में क्या कहना है?
हिंदू पक्ष का कहना है कि शाही जामा मस्जिद पहले से ही संरक्षित स्मारक है और वहां सर्वे कराना आवश्यक है।
कोर्ट कमिश्नर द्वारा सर्वे कराने का क्या कानूनी आधार है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि कोर्ट कमिश्नर द्वारा सर्वे कराना कानून के दायरे में है और इसमें कोई अवैधता नहीं है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस विवाद का निपटारा कर सकता है और यह तय कर सकता है कि सर्वे को आगे बढ़ाया जाए या नहीं।
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