सुप्रीम कोर्ट में शाही जामा मस्जिद और श्री हरिहर मंदिर विवाद पर सुनवाई कल
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नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट कल मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित शाही जामा मस्जिद के लिए चंदौसी कोर्ट द्वारा जारी सर्वेक्षण आदेश को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध 'कॉज लिस्ट' के अनुसार, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगी।
यह याचिका मस्जिद समिति द्वारा दायर की गई है, जिसमें शाही जामा मस्जिद के संबंध में चल रहे विवाद पर सर्वे के आदेश का विरोध किया गया है। हिंदू वादियों का आरोप है कि यह मस्जिद एक पहले से विद्यमान मंदिर के ढांचे पर बनाई गई थी।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा सर्वेक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार करने वाली एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
यह विवाद हिंदू पक्ष के इस दावे से संबंधित है कि मस्जिद एक प्राचीन हरिहर मंदिर के अवशेषों पर स्थित है, जिसे कथित तौर पर मुग़ल काल में नष्ट किया गया था। दूसरी ओर, मस्जिद समिति ने इस मुकदमे की वैधता पर सवाल उठाया है और जिस तरीके से सर्वेक्षण का आदेश दिया गया, उस पर आपत्ति जताई है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चंदौसी ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश को सही ठहराया, जिसमें स्थल के सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने इस आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं पाई।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मस्जिद समिति की उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके बाद, मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यह दावा किया कि सर्वेक्षण का आदेश उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर दिए बिना और स्थापित कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए पारित किया गया था।
यह मामला 'पूजा स्थल अधिनियम, 1991' के संदर्भ में महत्वपूर्ण बनता है, जो पूजा स्थलों के स्वरूप परिवर्तन पर रोक लगाता है और यह अनिवार्य करता है कि उनका धार्मिक स्वरूप वैसा ही बना रहे, जैसा वह 15 अगस्त, 1947 को था।
हालांकि, हिंदू पक्ष का तर्क है कि यह विवाद इस अधिनियम के दायरे से बाहर है और इसके लिए वह 'प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958' के प्रावधानों का हवाला देता है।
शाही जामा मस्जिद विवाद को लेकर पहले भी तनाव उत्पन्न हो चुका है। अदालत के आदेश पर हुए एक सर्वे के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।
अदालत के समक्ष अपनी दलीलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने बताया है कि शाही जामा मस्जिद केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक है और सहायक रिकॉर्ड की अनुपस्थिति में इसे सार्वजनिक पूजा स्थल के रूप में नहीं माना जा सकता।