संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की दलीलें समाप्त, 4 अगस्त को हिंदू पक्ष की बारी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में संभल शाही जामा मस्जिद के कोर्ट कमिश्नर सर्वे विवाद पर 28 जुलाई 2026 को सुनवाई हुई, जिसमें मुस्लिम पक्ष ने अपनी संपूर्ण दलीलें प्रस्तुत कीं। सुनवाई अधूरी रहने के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने अगली तारीख 4 अगस्त निर्धारित की है, जब हिंदू पक्ष अपने तर्क रखेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने से उपजा है, जिसमें निचली अदालत द्वारा संभल की शाही जामा मस्जिद का कोर्ट कमिश्नर सर्वे कराने के निर्देश को वैध ठहराया गया था। मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
मुस्लिम पक्ष की मुख्य दलीलें
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सिविल कोर्ट को इस प्रकार का सर्वे आदेश जारी करने का अधिकार क्षेत्र ही नहीं था। उनका स्पष्ट मत है कि ऐसे मामलों में अदालत को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वाद सुनवाई योग्य है या नहीं — उसके बाद ही किसी जाँच या सर्वे का निर्देश दिया जा सकता है।
मुस्लिम पक्ष का यह भी कहना है कि मस्जिद से जुड़े विवाद में कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर सर्वे कराना कानूनी प्रक्रिया के विपरीत है। इसी आधार पर उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने की माँग की।
आगे की सुनवाई
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि 4 अगस्त की सुनवाई में हिंदू पक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत करेगा। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक आदेश पारित करेगी।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर यह विवाद पिछले कुछ समय से न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई धार्मिक स्थलों से जुड़े मामले अदालतों में विचाराधीन हैं। 4 अगस्त की सुनवाई के बाद इस मामले की दिशा और आगे की कानूनी राह स्पष्ट होने की उम्मीद है।