15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 12 अगस्त को होगी अगली पेशी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 12 अगस्त को होगी अगली पेशी

सारांश

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। 15 जुलाई को होनी थी सुनवाई, अब 12 अगस्त को होगी। रिप्रेजेंटेटिव सूट का प्रश्न भी अनसुलझा है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय में 15 जुलाई को निर्धारित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद की सुनवाई टल गई।
अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सूट संख्या 17 को रिप्रेजेंटेटिव सूट माना था; हिंदू पक्ष के अन्य वादी इसे चुनौती दे रहे हैं।
मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 1968 के समझौते से यह विवाद पहले ही सुलझ चुका है।
शाही ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने 5 जुलाई को भड़काऊ बयानों से बचने की अपील की थी।

सर्वोच्च न्यायालय में मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर बुधवार, 15 जुलाई को निर्धारित सुनवाई टल गई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। यह मामला देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक-कानूनी विवादों में से एक माना जाता है।

मुख्य घटनाक्रम

इस सुनवाई में मुख्य विवाद के साथ-साथ एक अहम प्रक्रियागत प्रश्न भी तय होना था — हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल विभिन्न याचिकाओं में से कौन सी याचिका रिप्रेजेंटेटिव सूट के रूप में आगे बढ़े। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहले सूट संख्या 17 को रिप्रेजेंटेटिव सूट का दर्जा दिया था। हालाँकि हिंदू पक्ष के अन्य वादियों का तर्क है कि उनकी याचिकाएँ अलग मुद्दों और दलीलों पर आधारित हैं, इसलिए केवल एक याचिका को प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उससे सटी शाही ईदगाह मस्जिद के बीच का है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 17वीं सदी में मुगल शासक औरंगजेब के काल में प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़कर इस स्थल पर मस्जिद का निर्माण कराया गया था, और यह भूमि भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी वैधता का दावा करता है। मस्जिद पक्ष का कहना है कि 1968 के समझौते के अंतर्गत यह विवाद पहले ही सुलझाया जा चुका है। इस मामले में स्वामित्व अधिकार, पूजा का अधिकार और स्थल की पुरातात्विक जाँच जैसे बहुआयामी कानूनी प्रश्न उलझे हुए हैं।

मुस्लिम पक्ष की अपील

गौरतलब है कि 5 जुलाई को शाही ईदगाह कमेटी के सचिव एवं अधिवक्ता तनवीर अहमद ने लोगों से अपील की थी कि इस विवाद पर भड़काऊ बयानों से बचा जाए। उन्होंने कहा था, 'लंबित मामलों में भड़काऊ बयानबाजी उचित नहीं है, लोगों को कानून पर भरोसा रखना चाहिए।'

तनवीर अहमद ने यह भी कहा था कि मस्जिद और मंदिर के रास्ते अलग-अलग हैं — मस्जिद में पाँच वक्त नमाज होती है और मंदिर में भजन-पूजन। उन्होंने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

आगे क्या होगा

अब सभी पक्षों की नजरें 12 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जब सर्वोच्च न्यायालय रिप्रेजेंटेटिव सूट के प्रश्न पर और मुख्य विवाद पर आगे की दिशा तय कर सकता है। यह मामला अयोध्या विवाद के बाद देश की न्यायिक व्यवस्था के सामने खड़े सबसे जटिल धार्मिक-भूमि विवादों में गिना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति और 1968 के समझौते की कानूनी स्थिति जैसे उलझे सवाल इसे और लंबा खींच सकते हैं। मुस्लिम पक्ष की संयम की अपील सकारात्मक संकेत है, पर असली परीक्षा तब होगी जब सर्वोच्च न्यायालय मूल प्रश्नों पर सुनवाई शुरू करेगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद क्या है?
यह मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उससे सटी शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा भूमि-स्वामित्व विवाद है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 17वीं सदी में औरंगजेब के शासनकाल में केशवदेव मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी, जबकि मुस्लिम पक्ष मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी वैधता का दावा करता है।
सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई कब होगी?
15 जुलाई को निर्धारित सुनवाई टल जाने के बाद अब अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। इस तारीख पर रिप्रेजेंटेटिव सूट के प्रश्न और मुख्य विवाद दोनों पर सुनवाई होने की उम्मीद है।
रिप्रेजेंटेटिव सूट का विवाद क्या है?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सूट संख्या 17 को रिप्रेजेंटेटिव सूट माना था, जिसका अर्थ है कि यह याचिका सभी हिंदू पक्षों का प्रतिनिधित्व करेगी। हिंदू पक्ष के अन्य वादियों का कहना है कि उनकी याचिकाएँ अलग मुद्दों पर आधारित हैं, इसलिए केवल एक याचिका को यह दर्जा नहीं दिया जा सकता।
1968 के समझौते का इस विवाद में क्या महत्व है?
मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि 1968 में हुए एक समझौते के तहत यह विवाद पहले ही सुलझाया जा चुका है। हिंदू पक्ष इस समझौते की वैधता और उसके दायरे को चुनौती देता है, और यह प्रश्न भी न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
शाही ईदगाह कमेटी ने क्या अपील की थी?
5 जुलाई को शाही ईदगाह कमेटी के सचिव और अधिवक्ता तनवीर अहमद ने लोगों से अपील की थी कि इस विवाद पर भड़काऊ बयानों से बचें और न्यायालय के फैसले का इंतजार करें। उन्होंने इस स्थल को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले