श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 12 अगस्त को होगी अगली पेशी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर बुधवार, 15 जुलाई को निर्धारित सुनवाई टल गई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। यह मामला देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक-कानूनी विवादों में से एक माना जाता है।
मुख्य घटनाक्रम
इस सुनवाई में मुख्य विवाद के साथ-साथ एक अहम प्रक्रियागत प्रश्न भी तय होना था — हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल विभिन्न याचिकाओं में से कौन सी याचिका रिप्रेजेंटेटिव सूट के रूप में आगे बढ़े। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहले सूट संख्या 17 को रिप्रेजेंटेटिव सूट का दर्जा दिया था। हालाँकि हिंदू पक्ष के अन्य वादियों का तर्क है कि उनकी याचिकाएँ अलग मुद्दों और दलीलों पर आधारित हैं, इसलिए केवल एक याचिका को प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उससे सटी शाही ईदगाह मस्जिद के बीच का है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 17वीं सदी में मुगल शासक औरंगजेब के काल में प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़कर इस स्थल पर मस्जिद का निर्माण कराया गया था, और यह भूमि भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है।
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी वैधता का दावा करता है। मस्जिद पक्ष का कहना है कि 1968 के समझौते के अंतर्गत यह विवाद पहले ही सुलझाया जा चुका है। इस मामले में स्वामित्व अधिकार, पूजा का अधिकार और स्थल की पुरातात्विक जाँच जैसे बहुआयामी कानूनी प्रश्न उलझे हुए हैं।
मुस्लिम पक्ष की अपील
गौरतलब है कि 5 जुलाई को शाही ईदगाह कमेटी के सचिव एवं अधिवक्ता तनवीर अहमद ने लोगों से अपील की थी कि इस विवाद पर भड़काऊ बयानों से बचा जाए। उन्होंने कहा था, 'लंबित मामलों में भड़काऊ बयानबाजी उचित नहीं है, लोगों को कानून पर भरोसा रखना चाहिए।'
तनवीर अहमद ने यह भी कहा था कि मस्जिद और मंदिर के रास्ते अलग-अलग हैं — मस्जिद में पाँच वक्त नमाज होती है और मंदिर में भजन-पूजन। उन्होंने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
आगे क्या होगा
अब सभी पक्षों की नजरें 12 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जब सर्वोच्च न्यायालय रिप्रेजेंटेटिव सूट के प्रश्न पर और मुख्य विवाद पर आगे की दिशा तय कर सकता है। यह मामला अयोध्या विवाद के बाद देश की न्यायिक व्यवस्था के सामने खड़े सबसे जटिल धार्मिक-भूमि विवादों में गिना जाता है।