कृष्ण जन्मभूमि विवाद: स्वामी सच्चिदानंद का आह्वान — जन्माष्टमी 'मूल स्थान' पर, संतों से मथुरा पहुँचने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। श्री चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद ने 3 जुलाई को देशभर के संतों और सनातन धर्मावलंबियों से मथुरा पहुँचने का आह्वान किया और घोषणा की कि इस वर्ष जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के मूल जन्मस्थान पर मनाई जाएगी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि अब न्यायालयों पर निर्भर रहने की बजाय राम मंदिर आंदोलन जैसी व्यापक जनशक्ति जुटाने का समय आ गया है।
स्वामी सच्चिदानंद का आह्वान
डॉ. स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि सनातन समाज वर्षों से न्यायालयों के माध्यम से अपने आराध्य के जन्मस्थान को वापस पाने की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी है। उनके शब्दों में, 'हम कब तक अदालतों के चक्कर लगाते रहेंगे? कब तक सरकारों का इंतजार करते रहेंगे?' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा है।
उन्होंने दावा किया कि कृष्ण जन्मभूमि परिसर के बाहर स्थित विवादित गुंबद को हटाए बिना वहाँ भव्य मंदिर निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने कारसेवा के आयोजन की भी घोषणा की और कहा कि भव्य व दिव्य मंदिर निर्माण के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाया जाएगा।
याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी का संकल्प
विवाद के प्रमुख याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी ने कहा कि उन्होंने कई वर्ष पहले यह संकल्प लिया था कि जब तक कृष्ण मंदिर मुक्त नहीं होगा, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और आज भी वे उस संकल्प पर कायम हैं। उन्होंने कहा, 'जिस तरह 500 साल बाद राम मंदिर वापस मिला, उसी तरह हम चाहते हैं कि भगवान कृष्ण की जन्मभूमि भी मुक्त हो।' फलाहारी के अनुसार यह स्थान कथित तौर पर अभी भी एक मस्जिद के नियंत्रण में है।
अखिलेश यादव से समर्थन की अपील
स्वामी सच्चिदानंद ने बताया कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर समर्थन माँगा है। उनका तर्क था कि अखिलेश यादव ने यदुवंश में जन्म लिया है, इसलिए उन्हें भी इस मुहिम में साथ आना चाहिए। हालाँकि, अखिलेश यादव की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
प्रशासन की नज़र, मामले न्यायालय में विचाराधीन
स्वामी सच्चिदानंद के इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मथुरा प्रशासन इन संवेदनशील बयानों और संभावित गतिविधियों को देखते हुए स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। गौरतलब है कि कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पहले से ही विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन है और इससे जुड़े कई मामले अभी लंबित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर के बाद धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों पर राष्ट्रीय बहस पहले से ही तीव्र है।
आगे क्या
स्वामी सच्चिदानंद की घोषणा के अनुसार जन्माष्टमी पर मूल जन्मस्थान पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है, जो प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए एक नई चुनौती बन सकती है। न्यायालयों में लंबित मामलों के बीच इस तरह के जनआंदोलन की घोषणा विवाद को नया आयाम देती है।