श्रीकृष्ण जन्मभूमि कार सेवा: वृंदावन में संतों की महाबैठक, 9 अगस्त को शिला पूजन का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
वृंदावन में 7 अगस्त 2026 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और प्रस्तावित कार सेवा को लेकर संत समाज की एक महत्वपूर्ण महाबैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न अखाड़ों, पीठों और धार्मिक संगठनों के साधु-संतों ने एकजुट होकर अभियान को पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया। बैठक में 9 अगस्त को होने वाले शिला पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
महाबैठक का आयोजन और प्रमुख उपस्थिति
मोहिनी शरण महाराज के आश्रम में आयोजित इस महाबैठक में धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़, चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज और महा निर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. सत्यानंद सरस्वती सहित कई वरिष्ठ संत, महामंडलेश्वर और धार्मिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। संतों ने सर्वसम्मति से स्वामी सच्चिदानंद महाराज के प्रयासों की सराहना करते हुए यह घोषणा की कि ब्रज का संत समाज श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण के लिए पूरी तरह एकजुट है।
9 अगस्त के कार्यक्रम का कार्यक्रम
बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 अगस्त को सभी साधु-संत और श्रद्धालु चित्रगुप्त पीठ आश्रम में एकत्रित होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे यज्ञ से होगी, इसके बाद 11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य शिला पूजन किया जाएगा और दोपहर 12 बजे शंखनाद कर आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी।
संतों ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए विशेष शिलाएं तैयार कराई जा रही हैं, जिन पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की आकर्षक नक्काशी की जाएगी। शिला पूजन के बाद इन्हीं शिलाओं पर कार्यशाला में नक्काशी का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
संतों और नेताओं की प्रतिक्रिया
सौरभ गौड़ ने बताया कि चित्रगुप्त पीठाधीश्वर द्वारा लिया गया संकल्प पूरे संत समाज को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार अखाड़ा परिषद, विभिन्न अखाड़ों, द्वारों, संतों, भागवताचार्यों, विद्वानों, ब्रजवासियों और देशभर के कृष्ण भक्तों का समर्थन इस अभियान को लगातार मजबूत करेगा।
स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि ललित कुंज आश्रम में आयोजित बैठक में सभी संतों का आशीर्वाद और समर्थन प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान या संतों के खिलाफ किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई या नोटिस जारी किया जाता है, तो संत समाज उसका विरोध करेगा।
महा निर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. सत्यानंद सरस्वती ने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए व्यापक जनजागरण हुआ था, उसी तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए भी समाज में व्यापक जागरूकता लाने की आवश्यकता है। संत समाज घर-घर जाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करेगा।
मुख्य कार सेवा की तिथि पर स्थिति
स्वामी सच्चिदानंद ने स्पष्ट किया कि श्रावण मास को देखते हुए मुख्य कार सेवा की तिथि बाद में तय की जाएगी। अखाड़ा परिषद की ओर से भी श्रावण मास के बाद मुख्य कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। फिलहाल शिला पूजन और संबंधित कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह अभियान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद देश में धार्मिक स्थलों की मुक्ति को लेकर बढ़ती सक्रियता की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे की रणनीति
बैठक के अंत में उपस्थित संतों ने एक स्वर में कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से ब्रज का संत समाज पूरी तरह संगठित है। आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा आगे भी संत समाज की बैठकें होंगी, जिनमें बाल लीलाओं के चित्रण के अंतिम स्वरूप पर विचार किया जाएगा।