10 अगस्त 2026
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गुप्त वृंदावन धाम में CM भजनलाल शर्मा ने किया शिलापूजन, 2027 में होगा उद्घाटन

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गुप्त वृंदावन धाम में CM भजनलाल शर्मा ने किया शिलापूजन, 2027 में होगा उद्घाटन

सारांश

जयपुर के जगतपुरा में बन रहे 17-मंजिला गुप्त वृंदावन धाम में CM भजनलाल शर्मा ने शिलापूजन किया। मकराना संगमरमर और भैसलाना के काले पत्थर से बनेंगी राधा-कृष्ण की मूर्तियाँ। 12 मई 2027 को अक्षय तृतीया पर उद्घाटन प्रस्तावित है।

मुख्य बातें

CM भजनलाल शर्मा ने 10 अगस्त 2026 को जयपुर के गुप्त वृंदावन धाम में शिलापूजन संपन्न किया।
राधारानी की मूर्ति के लिए मकराना का सफेद संगमरमर और भगवान कृष्ण की मूर्ति के लिए भैसलाना का काला पत्थर चुना गया।
पांडे मूर्ति भंडार लगभग 7-8 वर्षों से इन विशेष पत्थरों की खोज में था।
हरे कृष्ण मूवमेंट, जयपुर द्वारा छह एकड़ में विकसित 17-मंजिला धाम में 180×108 फीट की मेहराबदार छतरी और 70 फीट ऊँचा प्रवेश द्वार होगा।
परिसर में 25,000 वर्ग फुट का दर्शन हॉल, 14 प्रस्तुति कक्ष , वैदिक संग्रहालय और ऑडियो-विज़ुअल थिएटर शामिल होंगे।
मंदिर का उद्घाटन 12 मई 2027 को अक्षय तृतीया पर प्रस्तावित है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 10 अगस्त 2026 को जयपुर के जगतपुरा स्थित गुप्त वृंदावन धाम में राधा-कृष्ण की मूर्तियों के लिए विशेष रूप से चयनित पत्थरों का शिलापूजन संपन्न किया। यह समारोह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित हुआ, जिसमें मंदिर के अध्यक्ष अमितासन दास ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

शिलापूजन समारोह का विवरण

शिलापूजन के पश्चात मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूजा-अर्चना की और भगवान कृष्ण-बलराम की महा-आरती में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा, 'गुप्त वृंदावन धाम नई पीढ़ी को राजस्थान की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।'

मूर्तियों के लिए विशेष पत्थरों का चयन

राधारानी की मूर्ति के लिए मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले, बारीक दानेदार सफेद संगमरमर का चयन किया गया है — जो अपनी श्रेष्ठ शिल्प-क्षमता के लिए विश्वप्रसिद्ध है। वहीं भगवान कृष्ण की मूर्ति के लिए पावटा के निकट भैसलाना की प्राचीन खदानों से प्राप्त विशेष काले पत्थर को चुना गया है।

उल्लेखनीय है कि पांडे मूर्ति भंडार लगभग सात से आठ वर्षों से इन विशिष्टताओं को पूरा करने वाले पत्थरों की खोज में लगा था। पत्थरों की पहचान के बाद उन्हें राधा-श्यामसुंदर जी की मूर्तियाँ बनाने हेतु धाम में सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखा गया है। शिलापूजन के साथ ही अब मूर्ति-निर्माण की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से आरंभ हो गई है।

गुप्त वृंदावन धाम की भव्य परियोजना

हरे कृष्ण मूवमेंट, जयपुर द्वारा विकसित यह धाम लगभग छह एकड़ भूमि पर बन रहा है। 17-मंजिला इस परिसर में लगभग 180 फीट लंबी और 108 फीट चौड़ी एक विशाल मेहराबदार छतरी होगी, जो रात में अत्याधुनिक प्रोजेक्शन मैपिंग के माध्यम से भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं को प्रदर्शित करेगी।

मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 70 फीट ऊँचा होगा और राजस्थान की समृद्ध स्थापत्य परंपरा से प्रेरित होगा — इसमें 108 मोरों की कलात्मक आकृतियाँ इस क्षेत्र के विशिष्ट शिल्पकौशल को उजागर करेंगी।

परिसर में लगभग 25,000 वर्ग फुट में फैला एक विशाल दर्शन हॉल, 14 प्रस्तुति कक्ष, एक ऑडियो-विज़ुअल थिएटर और एक वैदिक संग्रहालय भी शामिल होगा। इसे 'ग्रीन बिल्डिंग' कॉन्सेप्ट पर पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।

उद्घाटन और आगे की योजना

मंदिर का उद्घाटन 12 मई 2027 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर प्रस्तावित है। इस केंद्र का उद्देश्य सनातन संस्कृति, वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। पारंपरिक वास्तुकला, भक्तिपूर्ण अनुभव और आधुनिक तकनीक के संगम से निर्मित यह धाम जयपुर और राजस्थान में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊँचाइयाँ देने की संभावना रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ध्यान देने योग्य है कि इस परियोजना में सरकारी वित्त पोषण की भूमिका स्पष्ट नहीं है — धाम हरे कृष्ण मूवमेंट द्वारा विकसित किया जा रहा है। जब तक सार्वजनिक-निजी भागीदारी का ब्यौरा सामने नहीं आता, राज्य की भागीदारी की सीमा और जवाबदेही के सवाल खुले रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुप्त वृंदावन धाम क्या है और यह कहाँ बन रहा है?
गुप्त वृंदावन धाम जयपुर के जगतपुरा में हरे कृष्ण मूवमेंट द्वारा लगभग छह एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा एक 17-मंजिला आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है। इसमें राधा-कृष्ण मंदिर, वैदिक संग्रहालय, दर्शन हॉल और आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग सुविधा होगी।
गुप्त वृंदावन धाम का उद्घाटन कब होगा?
मंदिर का उद्घाटन 12 मई 2027 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर प्रस्तावित है।
राधा-कृष्ण की मूर्तियों के लिए किन पत्थरों का चयन किया गया है?
राधारानी की मूर्ति के लिए मकराना के बारीक दानेदार सफेद संगमरमर और भगवान कृष्ण की मूर्ति के लिए पावटा के निकट भैसलाना की प्राचीन खदानों से प्राप्त विशेष काले पत्थर का चयन किया गया है। पांडे मूर्ति भंडार लगभग सात से आठ वर्षों से इन विशिष्टताओं को पूरा करने वाले पत्थरों की खोज में था।
CM भजनलाल शर्मा ने शिलापूजन में क्या किया?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 10 अगस्त 2026 को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिलापूजन संपन्न किया, पूजा-अर्चना की और भगवान कृष्ण-बलराम की महा-आरती में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह धाम नई पीढ़ी को राजस्थान की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ेगा।
गुप्त वृंदावन धाम में क्या-क्या सुविधाएँ होंगी?
इस परिसर में लगभग 25,000 वर्ग फुट का दर्शन हॉल, 14 प्रस्तुति कक्ष, एक ऑडियो-विज़ुअल थिएटर और एक वैदिक संग्रहालय होगा। 180×108 फीट की मेहराबदार छतरी रात में प्रोजेक्शन मैपिंग के ज़रिये कृष्ण लीलाएँ प्रदर्शित करेगी और 70 फीट ऊँचे प्रवेश द्वार पर 108 मोरों की कलात्मक आकृतियाँ होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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