गुप्त वृंदावन धाम में CM भजनलाल शर्मा ने किया शिलापूजन, 2027 में होगा उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 10 अगस्त 2026 को जयपुर के जगतपुरा स्थित गुप्त वृंदावन धाम में राधा-कृष्ण की मूर्तियों के लिए विशेष रूप से चयनित पत्थरों का शिलापूजन संपन्न किया। यह समारोह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित हुआ, जिसमें मंदिर के अध्यक्ष अमितासन दास ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
शिलापूजन समारोह का विवरण
शिलापूजन के पश्चात मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूजा-अर्चना की और भगवान कृष्ण-बलराम की महा-आरती में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा, 'गुप्त वृंदावन धाम नई पीढ़ी को राजस्थान की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।'
मूर्तियों के लिए विशेष पत्थरों का चयन
राधारानी की मूर्ति के लिए मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले, बारीक दानेदार सफेद संगमरमर का चयन किया गया है — जो अपनी श्रेष्ठ शिल्प-क्षमता के लिए विश्वप्रसिद्ध है। वहीं भगवान कृष्ण की मूर्ति के लिए पावटा के निकट भैसलाना की प्राचीन खदानों से प्राप्त विशेष काले पत्थर को चुना गया है।
उल्लेखनीय है कि पांडे मूर्ति भंडार लगभग सात से आठ वर्षों से इन विशिष्टताओं को पूरा करने वाले पत्थरों की खोज में लगा था। पत्थरों की पहचान के बाद उन्हें राधा-श्यामसुंदर जी की मूर्तियाँ बनाने हेतु धाम में सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखा गया है। शिलापूजन के साथ ही अब मूर्ति-निर्माण की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से आरंभ हो गई है।
गुप्त वृंदावन धाम की भव्य परियोजना
हरे कृष्ण मूवमेंट, जयपुर द्वारा विकसित यह धाम लगभग छह एकड़ भूमि पर बन रहा है। 17-मंजिला इस परिसर में लगभग 180 फीट लंबी और 108 फीट चौड़ी एक विशाल मेहराबदार छतरी होगी, जो रात में अत्याधुनिक प्रोजेक्शन मैपिंग के माध्यम से भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं को प्रदर्शित करेगी।
मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 70 फीट ऊँचा होगा और राजस्थान की समृद्ध स्थापत्य परंपरा से प्रेरित होगा — इसमें 108 मोरों की कलात्मक आकृतियाँ इस क्षेत्र के विशिष्ट शिल्पकौशल को उजागर करेंगी।
परिसर में लगभग 25,000 वर्ग फुट में फैला एक विशाल दर्शन हॉल, 14 प्रस्तुति कक्ष, एक ऑडियो-विज़ुअल थिएटर और एक वैदिक संग्रहालय भी शामिल होगा। इसे 'ग्रीन बिल्डिंग' कॉन्सेप्ट पर पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।
उद्घाटन और आगे की योजना
मंदिर का उद्घाटन 12 मई 2027 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर प्रस्तावित है। इस केंद्र का उद्देश्य सनातन संस्कृति, वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। पारंपरिक वास्तुकला, भक्तिपूर्ण अनुभव और आधुनिक तकनीक के संगम से निर्मित यह धाम जयपुर और राजस्थान में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊँचाइयाँ देने की संभावना रखता है।