सावन में हरिद्वार: स्वामी कैलाशानंद गिरि का विशेष रुद्राभिषेक, दक्षिण काली मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
हरिद्वार के सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में 1 अगस्त 2026 को सावन के पावन महीने में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने भगवान शिव का विशेष रुद्राभिषेक संपन्न कराया। श्रावण कृष्ण पक्ष तृतीया के अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य अनुष्ठान में सम्मिलित होने पहुँचे।
अनुष्ठान का क्रम और साधना
स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज प्रतिदिन आधी रात से सुबह 4 बजे के बीच गंगा में पवित्र स्नान करने के पश्चात मंदिर में शिव पूजा और रुद्राभिषेक करते हैं। उनके सेवादार विनोद कुमार ने बताया, 'गुरुजी सावन की पूर्णिमा से यह आध्यात्मिक अनुष्ठान प्रारंभ करते हैं और रक्षाबंधन तक निरंतर जारी रखते हैं।'
विनोद कुमार के अनुसार, 'पूरे सावन के दौरान गुरुजी मौन व्रत रखते हैं और दिन में लगभग 23 से 24 घंटे भगवान शिव की पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं।' यह साधना का वह स्वरूप है जो इस मंदिर को अन्य तीर्थस्थलों से विशिष्ट बनाता है।
दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को चौंकाया
रुद्राभिषेक के दौरान एक असाधारण घटना सामने आई। मंदिर में दर्शन के लिए आईं श्रद्धालु स्वरिमा दीक्षित ने बताया, 'स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के गंगा जल से रुद्राभिषेक के दौरान शिव जी की मूर्ति के पास लगभग 17 से 18 साँप दिखाई दिए।' उनके अनुसार यह अद्भुत और दिव्य नज़ारा था जिसने सभी उपस्थित भक्तों को विस्मित कर दिया।
कांवड़ यात्रा में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
इस बीच, उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कई जिलों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। एटा जिले से आए एक कांवड़ यात्री ने बताया, 'रास्ते में सुरक्षा के इंतज़ाम बहुत अच्छे हैं। सड़कें साफ हैं, कहीं ट्रैफिक जाम नहीं है और बिजली की व्यवस्था भी दुरुस्त है।' उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासन की सराहना की।
सावन में हरिद्वार का महत्व
गौरतलब है कि सावन का महीना शिव भक्तों के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। हरिद्वार प्रतिवर्ष इस अवधि में लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र बनता है, जो गंगाजल लेकर शिवालयों में अभिषेक करते हैं। सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की यह विशेष साधना परंपरा श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
आगे की स्थिति
रक्षाबंधन तक यह अनुष्ठान-क्रम जारी रहेगा, और श्रद्धालुओं की आमद के और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए हैं।