1 अगस्त 2026
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सावन में हरिद्वार: स्वामी कैलाशानंद गिरि का विशेष रुद्राभिषेक, दक्षिण काली मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

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सावन में हरिद्वार: स्वामी कैलाशानंद गिरि का विशेष रुद्राभिषेक, दक्षिण काली मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

सावन की पवित्र तृतीया पर हरिद्वार के सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने विशेष रुद्राभिषेक किया। मध्यरात्रि गंगा स्नान के बाद 23-24 घंटे की साधना और मौन व्रत — और अभिषेक के दौरान 17-18 साँपों के प्रकट होने की घटना ने श्रद्धालुओं को अचंभित कर दिया।

मुख्य बातें

स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने 1 अगस्त 2026 को सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर, हरिद्वार में विशेष रुद्राभिषेक संपन्न कराया।
स्वामीजी सावन की पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक प्रतिदिन मौन व्रत रखते हुए 23-24 घंटे शिव पूजा में लीन रहते हैं।
प्रतिदिन आधी रात से सुबह 4 बजे के बीच गंगा स्नान के बाद रुद्राभिषेक का क्रम जारी रहता है।
रुद्राभिषेक के दौरान शिव मूर्ति के पास 17-18 साँप दिखाई देने की घटना ने श्रद्धालुओं को चकित किया।
उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए कई जिलों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

हरिद्वार के सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में 1 अगस्त 2026 को सावन के पावन महीने में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने भगवान शिव का विशेष रुद्राभिषेक संपन्न कराया। श्रावण कृष्ण पक्ष तृतीया के अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य अनुष्ठान में सम्मिलित होने पहुँचे।

अनुष्ठान का क्रम और साधना

स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज प्रतिदिन आधी रात से सुबह 4 बजे के बीच गंगा में पवित्र स्नान करने के पश्चात मंदिर में शिव पूजा और रुद्राभिषेक करते हैं। उनके सेवादार विनोद कुमार ने बताया, 'गुरुजी सावन की पूर्णिमा से यह आध्यात्मिक अनुष्ठान प्रारंभ करते हैं और रक्षाबंधन तक निरंतर जारी रखते हैं।'

विनोद कुमार के अनुसार, 'पूरे सावन के दौरान गुरुजी मौन व्रत रखते हैं और दिन में लगभग 23 से 24 घंटे भगवान शिव की पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं।' यह साधना का वह स्वरूप है जो इस मंदिर को अन्य तीर्थस्थलों से विशिष्ट बनाता है।

दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को चौंकाया

रुद्राभिषेक के दौरान एक असाधारण घटना सामने आई। मंदिर में दर्शन के लिए आईं श्रद्धालु स्वरिमा दीक्षित ने बताया, 'स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के गंगा जल से रुद्राभिषेक के दौरान शिव जी की मूर्ति के पास लगभग 17 से 18 साँप दिखाई दिए।' उनके अनुसार यह अद्भुत और दिव्य नज़ारा था जिसने सभी उपस्थित भक्तों को विस्मित कर दिया।

कांवड़ यात्रा में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम

इस बीच, उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कई जिलों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। एटा जिले से आए एक कांवड़ यात्री ने बताया, 'रास्ते में सुरक्षा के इंतज़ाम बहुत अच्छे हैं। सड़कें साफ हैं, कहीं ट्रैफिक जाम नहीं है और बिजली की व्यवस्था भी दुरुस्त है।' उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासन की सराहना की।

सावन में हरिद्वार का महत्व

गौरतलब है कि सावन का महीना शिव भक्तों के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। हरिद्वार प्रतिवर्ष इस अवधि में लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र बनता है, जो गंगाजल लेकर शिवालयों में अभिषेक करते हैं। सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की यह विशेष साधना परंपरा श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।

आगे की स्थिति

रक्षाबंधन तक यह अनुष्ठान-क्रम जारी रहेगा, और श्रद्धालुओं की आमद के और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की 23-24 घंटे की साधना और मौन व्रत की परंपरा इस मंदिर को भीड़-केंद्रित तीर्थस्थल से अलग एक साधना-स्थल के रूप में स्थापित करती है। रुद्राभिषेक के दौरान साँपों के प्रकट होने की घटना श्रद्धा और जिज्ञासा दोनों को जगाती है — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत में धार्मिक पर्यटन और कांवड़ यात्रा की व्यवस्था राज्य सरकारों के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज का रुद्राभिषेक अनुष्ठान कब से कब तक चलता है?
यह अनुष्ठान सावन की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन तक प्रतिदिन जारी रहता है। स्वामीजी प्रतिदिन आधी रात से सुबह 4 बजे के बीच गंगा स्नान के बाद रुद्राभिषेक करते हैं।
सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर हरिद्वार, उत्तराखंड में स्थित है और सावन के महीने में देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
रुद्राभिषेक के दौरान साँप दिखने की घटना क्या थी?
श्रद्धालु स्वरिमा दीक्षित के अनुसार, स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के गंगाजल से रुद्राभिषेक के दौरान शिव मूर्ति के पास लगभग 17-18 साँप दिखाई दिए। यह घटना उपस्थित भक्तों के लिए अत्यंत अद्भुत और दिव्य अनुभव रही, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए क्या व्यवस्थाएँ की गई हैं?
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। एटा से आए एक श्रद्धालु के अनुसार सड़कें साफ हैं, ट्रैफिक जाम नहीं है और बिजली की व्यवस्था भी दुरुस्त है।
सावन में हरिद्वार का क्या महत्व है?
सावन का महीना शिव भक्तों के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। हरिद्वार में गंगाजल लेकर शिवालयों में अभिषेक करना इस अवधि की प्रमुख धार्मिक परंपरा है और प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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