नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार पर हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
सारांश
मुख्य बातें
सावन माह के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोग पर हरिद्वार के कनखल स्थित प्राचीन दक्षेश्वर महादेव मंदिर में 17 अगस्त 2026 को भोर से ही श्रद्धालुओं की अटूट कतार लग गई। 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के उद्घोष से मंदिर परिसर का कोना-कोना गूंज उठा, और पूरे हरिद्वार ने शिवमय वातावरण का अनुभव किया।
दक्षेश्वर महादेव — महादेव का ससुराल
मंदिर के पंडित नितिन बिजलवान ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर को महादेव का ससुराल कहा जाता है। उनके अनुसार, 'वैसे तो हर दिन, हर रात, हर क्षण महादेव का ही है, लेकिन सावन मास महादेव को अधिक प्रिय है। इसी वजह से सावन को हम इतने उत्साह से मनाते हैं।' मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान शिव स्वयं यहाँ निवास करते हैं, इसीलिए इस माह हरिद्वार में विशेष आध्यात्मिक रौनक रहती है।
सरल भक्ति का संदेश
पूजन विधि पर पंडित नितिन बिजलवान ने श्रद्धालुओं को सरल मार्ग सुझाया। उन्होंने कहा, 'पूजन की विद्या तो अनेकों हैं, लेकिन भगवान भाव के भूखे हैं। आप ज्यादा उलझनों में ना पड़ें। एक लोटा जल भाव से आप चढ़ाइए और पुण्य के भागी बनिए।' यह संदेश उन लाखों साधारण भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है जो विस्तृत कर्मकांड से अपरिचित हैं।
नाग पंचमी का महत्त्व और पूजा विधि
नाग पंचमी के धार्मिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित जी ने बताया कि इस दिन नाग-नागिन का जोड़ा महादेव को अर्पित किया जाता है। शिवलिंग पर नाग-नागिन की पूजा की जाती है और उन्हें दूध, अक्षत तथा फल अर्पित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नाग पंचमी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि यह जीवों पर दया और उनकी रक्षा का संदेश भी देती है — जो आज के समय में पर्यावरण चेतना की दृष्टि से भी प्रासंगिक है।
व्यवस्था और स्वच्छता की अपील
पंडित नितिन बिजलवान ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मंदिर की व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत का संकल्प तभी पूरा होगा जब हम अपने धार्मिक स्थलों को साफ रखें और यह पहल स्वयं से शुरू करें। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता एक राष्ट्रीय चुनौती बनती जा रही है।
आगे का उत्सव
सावन माह में अभी एक सोमवार और शेष है, और हरिद्वार प्रशासन के अनुसार आने वाले सप्ताह में भी श्रद्धालुओं की संख्या इसी स्तर पर बने रहने की संभावना है। कनखल और हर की पौड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है।