10 अगस्त 2026
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सावन के दूसरे सोमवार पर हरिद्वार, देवघर और नागांव में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों भक्तों ने किया जलाभिषेक

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सावन के दूसरे सोमवार पर हरिद्वार, देवघर और नागांव में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों भक्तों ने किया जलाभिषेक

सारांश

सावन के दूसरे सोमवार पर आस्था की लहर पूरे देश में दौड़ी — हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव से देवघर के बाबा बैद्यनाथ और असम के नागांव तक, लाखों भक्तों ने जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद लिया। तेजपुर से 75 किलोमीटर की यात्रा कर पहुँचे कांवड़ियों ने भक्ति की मिसाल पेश की।

मुख्य बातें

10 अगस्त को सावन के दूसरे सोमवार पर देशभर के शिवालयों में लाखों श्रद्धालु उमड़े।
हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों ने गंगा जल से जलाभिषेक किया।
देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जिला प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए; भीड़ के कारण कुछ श्रद्धालु जल नहीं चढ़ा पाए।
असम के नागांव में कृष्णाश्रम शिव मंदिर में हजारों भक्त जुटे; तेजपुर से 75 किलोमीटर की यात्रा कर पहुँचे श्रद्धालु भी शामिल।
महाकाल समाज के सदस्यों ने दो दिन की यात्रा कर तेजपुर घाट से नागांव तक जल अर्पित किया।

सावन के दूसरे सोमवार पर 10 अगस्त को देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ा। हरिद्वार के कनखल स्थित ऐतिहासिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर से लेकर झारखंड के देवघर और असम के नागांव तक, भक्तों ने गंगा जल अर्पित कर महादेव का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंजते रहे।

हरिद्वार: दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़

हरिद्वार के कनखल में स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर शिव भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा से जल लेकर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचे एक श्रद्धालु ने कहा, 'यह दक्षेश्वर महाराज का मंदिर है। यहाँ सती कुंड भी है। दर्शन करके हम बहुत धन्य हो गए हैं। यह एक सुंदर और पवित्र स्थान है और ऐसा लगता है मानो स्वयं भगवान शिव यहाँ विराजमान हैं।'

उन्होंने यह भी बताया कि इस मंदिर को भगवान शिव का ससुराल भी कहा जाता है। श्रद्धालु ने कहा कि यह उनकी पहली यात्रा है और वे आगे भी यहाँ आते रहने की कोशिश करेंगे। गौरतलब है कि दक्षेश्वर महादेव मंदिर पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है — यहीं दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया था, जिसके बाद माता सती ने प्राण त्यागे थे।

देवघर: बाबा बैद्यनाथ धाम में प्रशासन ने किए विशेष प्रबंध

झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भी सावन के दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएँ कीं। एक महिला श्रद्धालु रिंकी देवी ने कहा कि मंदिर में सुविधाएँ बहुत अच्छी हैं।

हालाँकि, भीड़ की अधिकता के कारण कुछ श्रद्धालुओं को जलाभिषेक करने में कठिनाई हुई। एक अन्य महिला श्रद्धालु संध्या ने बताया, 'इतनी ज़्यादा भीड़ है कि हम जल नहीं चढ़ा पाए। भीड़ की वजह से अंदर नहीं जा पाए और बाहर आकर बैठ गए हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब हर वर्ष सावन में देवघर में लाखों कांवड़िये सुलतानगंज से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हैं।

असम के नागांव में कृष्णाश्रम शिव मंदिर में हजारों भक्त

असम के नागांव स्थित प्रसिद्ध कृष्णाश्रम शिव मंदिर में भी सावन के दूसरे सोमवार पर पूरे जिले से हजारों भक्त एकत्रित हुए। श्रद्धालुओं ने जल चढ़ाकर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। तेजपुर से आए श्रद्धालु गोपाल ने कहा, 'आज सावन के पवित्र महीने का दूसरा सोमवार है। हम तेजपुर से नागांव के शिव मंदिर में पवित्र जल चढ़ाने आए हैं। यह दूरी लगभग 75 किलोमीटर है। मैं सभी का और खासकर उन सभी कांवड़ियों का दिल से धन्यवाद करता हूँ जो पूरी श्रद्धा के साथ यह यात्रा करते हैं।'

एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि महाकाल समाज की ओर से वे शनिवार को तेजपुर घाट गए थे और दो दिन की यात्रा के बाद कृष्णाश्रम शिव मंदिर पहुँचे, जहाँ उन्होंने बाबा को जल अर्पित किया।

आम जनता पर असर और आस्था की व्यापकता

सावन माह में शिव मंदिरों में उमड़ने वाली यह भीड़ भारत की धार्मिक विविधता और एकता का प्रतीक है। उत्तराखंड, झारखंड और असम जैसे भिन्न-भिन्न राज्यों में एक ही दिन लाखों श्रद्धालुओं का एकत्रित होना यह दर्शाता है कि शिव भक्ति किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। प्रशासन ने सभी प्रमुख मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। आने वाले सोमवारों पर भी इसी प्रकार की भीड़ जुटने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासनिक तैयारी की सीमाओं को उजागर करता है — जबकि हर वर्ष यह भीड़ अनुमानित है। असम के नागांव में 75 किलोमीटर की यात्रा करने वाले कांवड़ियों की उपस्थिति दर्शाती है कि यह आस्था केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में भी उतनी ही जीवंत है — एक पहलू जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन के दूसरे सोमवार पर कहाँ-कहाँ भक्तों की भारी भीड़ देखी गई?
10 अगस्त को सावन के दूसरे सोमवार पर हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर और असम के नागांव स्थित कृष्णाश्रम शिव मंदिर में लाखों भक्त जुटे। इन सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद लिया।
दक्षेश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार का क्या महत्व है?
हरिद्वार के कनखल में स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है — यहीं दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया था। इसे भगवान शिव का ससुराल भी कहा जाता है और यहाँ सती कुंड भी स्थित है।
देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सावन के दौरान क्या व्यवस्थाएँ की गईं?
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रबंध किए। हालाँकि भारी भीड़ के कारण कुछ श्रद्धालु जलाभिषेक नहीं कर पाए और बाहर ही बैठना पड़ा।
असम के नागांव में कृष्णाश्रम शिव मंदिर में कौन-से भक्त पहुँचे?
नागांव के कृष्णाश्रम शिव मंदिर में पूरे जिले के अलावा तेजपुर से लगभग 75 किलोमीटर की यात्रा कर भक्त पहुँचे। महाकाल समाज के सदस्य शनिवार को तेजपुर घाट से निकले और दो दिन की यात्रा के बाद मंदिर पहुँचे।
सावन में जलाभिषेक का क्या धार्मिक महत्व है?
सावन माह को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इस दौरान प्रत्येक सोमवार को गंगा या अन्य पवित्र नदियों का जल शिवलिंग पर अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कांवड़िये दूर-दूर से पैदल यात्रा कर पवित्र जल लाते हैं और शिवालयों में अर्पित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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