गुप्त वृंदावन धाम में सीएम भजनलाल शर्मा ने किया शिलापूजन, 12 मई 2027 को होगा उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 10 अगस्त 2026 को जयपुर के जगतपुरा स्थित गुप्त वृंदावन धाम में राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के निर्माण हेतु चयनित विशेष पत्थरों का वैदिक रीति से शिलापूजन संपन्न किया। मंदिर के अध्यक्ष अमितासन दास ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया, जिसके बाद शर्मा ने पूजा-अर्चना की और भगवान कृष्ण-बलराम की महा-आरती में सहभागिता की।
किन पत्थरों का हुआ चयन
राधारानी की प्रतिमा के लिए मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले, बारीक दानेदार सफेद संगमरमर का चयन किया गया है। वहीं भगवान कृष्ण की मूर्ति के लिए पावटा के निकट भैसलाना की प्राचीन खदानों से प्राप्त एक विशिष्ट काले पत्थर को चुना गया है। उल्लेखनीय है कि पांडे मूर्ति भंडार लगभग सात से आठ वर्षों से इन विशिष्टताओं को पूरा करने वाले पत्थरों की खोज में जुटा था। पत्थरों की पहचान होने के पश्चात उन्हें धाम में सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखा गया। शिलापूजन के बाद अब मूर्ति निर्माण की विधिवत प्रक्रिया आरंभ होगी।
धाम की भव्य परिकल्पना
गुप्त वृंदावन धाम को हरे कृष्ण मूवमेंट, जयपुर द्वारा लगभग छह एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। यह 17-मंजिला परिसर अपनी वास्तुकला में अनूठा होगा — इसमें लगभग 180 फीट लंबी और 108 फीट चौड़ी एक विशाल मेहराबदार छतरी होगी। रात के समय यह छतरी अत्याधुनिक प्रोजेक्शन मैपिंग तकनीक के माध्यम से भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं को प्रदर्शित करने की पृष्ठभूमि बनेगी। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 70 फीट ऊँचा होगा और उसमें 108 मोरों की कलात्मक आकृतियाँ राजस्थान की समृद्ध शिल्प परंपरा को जीवंत करेंगी।
आधुनिक सुविधाएँ और हरित निर्माण
परिसर में लगभग 25,000 वर्ग फुट में फैला एक विशाल दर्शन हॉल, 14 प्रस्तुति कक्ष, एक ऑडियो-विजुअल थिएटर और एक वैदिक संग्रहालय शामिल होगा। इस केंद्र को 'ग्रीन बिल्डिंग' अवधारणा पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबिलिटी और हरियाली को प्राथमिकता दी गई है। यह परियोजना पारंपरिक वास्तुकला, वैदिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संगम का एक दुर्लभ उदाहरण बनने की दिशा में है।
मुख्यमंत्री का संदेश
शिलापूजन के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, 'गुप्त वृंदावन धाम नई पीढ़ी को राजस्थान की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।' उन्होंने इस परियोजना को सनातन संस्कृति, वैदिक ज्ञान और भक्तिपूर्ण मूल्यों के संरक्षण का माध्यम बताया।
उद्घाटन और पर्यटन संभावनाएँ
मंदिर का उद्घाटन 12 मई 2027 को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर प्रस्तावित है। पूरे भारत और विश्वभर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ भगवद गीता, वैदिक संस्कृति, हरिनाम संकीर्तन और कृष्ण-भक्ति का अनुभव कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह धाम जयपुर और राजस्थान में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को एक नया आयाम प्रदान करेगा।