15 जुलाई 2026
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मथुरा-काशी पर संतों का बड़ा बयान: 'सब हमारा है और हमारा ही होगा', राम मंदिर ट्रस्ट बैठक 22 जुलाई को

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मथुरा-काशी पर संतों का बड़ा बयान: 'सब हमारा है और हमारा ही होगा', राम मंदिर ट्रस्ट बैठक 22 जुलाई को

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट की 22 जुलाई की बैठक से पहले अयोध्या के संतों ने मथुरा-काशी पर दावेदारी दोहराई, कृष्ण जन्मभूमि के लिए कार सेवा का समर्थन किया और सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल फैसले की उम्मीद जताई — यह बयानबाज़ी धार्मिक स्थलों पर बड़ी राष्ट्रीय बहस की पृष्ठभूमि में आई है।

मुख्य बातें

कमल नयन दास (महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी) ने कहा — 'मथुरा-काशी सब कुछ हमारा है और सब हमारा ही होगा।' 22 जुलाई 2026 को राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में CEO नियुक्ति और उत्तराधिकार के मुद्दे पर चर्चा होनी है।
महंत सीताराम दास ने मथुरा में अगस्त में कार सेवा का समर्थन किया; संत समाज को पूरी तरह तैयार बताया।
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा — 'ज्ञानवापी' नाम मंदिर का हो सकता है, मस्जिद का नहीं; साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करने की बात कही।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट शीघ्र आने की उम्मीद; संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासन पर भरोसा जताया।
पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने अयोध्या के सकारात्मक विकास और आगे बढ़ने पर जोर दिया।

अयोध्या में 15 जुलाई 2026 को राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक से पहले संतों, महंतों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद, मथुरा में प्रस्तावित कार सेवा और ज्ञानवापी मामले पर अपने विचार रखे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने मथुरा और काशी को लेकर स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'मथुरा-काशी सब कुछ हमारा है और सब हमारा ही होगा।'

ट्रस्ट बैठक और उत्तराधिकार का प्रश्न

22 जुलाई को प्रस्तावित राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति और महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकार से जुड़े विषयों पर चर्चा होनी है। कमल नयन दास ने इस संदर्भ में कहा कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, कोई सरकारी संस्थान नहीं, इसलिए इसके मामलों में उसी भावना के अनुरूप निर्णय होने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो उनकी दृष्टि में देश और सनातन धर्म के हित में नहीं हैं। उनके अनुसार, यदि पिछले चुनाव के दौरान भ्रामक प्रचार नहीं हुआ होता तो प्रधानमंत्री अब तक उन प्रावधानों को समाप्त कर चुके होते।

कृष्ण जन्मभूमि विवाद और न्यायपालिका पर भरोसा

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई को लेकर न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि होने के कारण सनातन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मभूमि होने के कारण समान रूप से आस्था का केंद्र है।

सीताराम दास ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर पूरा विश्वास है और न्यायालय से न्यायपूर्ण निर्णय की अपेक्षा है। यह ऐसे समय में आया है जब कृष्ण जन्मभूमि मामले में सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई की तारीख निकट आ रही है।

मथुरा में कार सेवा और राम मंदिर चढ़ावा जांच

मथुरा में अगस्त माह के दौरान कार सेवा शुरू होने की खबरों पर सीताराम दास ने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन में कार सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनके अनुसार, संत समाज ने कृष्ण जन्मभूमि के लिए भी कार सेवा का आह्वान किया है और इसी माध्यम से वहाँ भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवाद और एसआईटी जांच पर सीताराम दास ने कहा कि संत समाज और हिंदू समाज को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले प्रशासन और विशेष जांच दल पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि अंतरिम रिपोर्ट के बाद एसआईटी शीघ्र ही अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

ज्ञानवापी पर महामंडलेश्वर का बयान

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने ज्ञानवापी विवाद पर कहा कि 'ज्ञानवापी' नाम किसी मंदिर का हो सकता है, किसी मस्जिद का नहीं। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संविधान, कानून और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं और सर्वोच्च न्यायालय जो भी निर्णय देगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।

विष्णु दास ने राम मंदिर चढ़ावे की एसआईटी जांच पर विश्वास जताया और कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में भी अयोध्या जैसी निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद जताई। संत सत्येंद्र दास वेदांत जी महाराज ने भी कहा कि देशभर के संत और श्रद्धालु बड़ी उम्मीद के साथ सर्वोच्च न्यायालय की ओर देख रहे हैं।

बाबरी मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी का रुख

बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने अयोध्या की वर्तमान स्थिति पर कहा कि अयोध्या भगवान राम की नगरी है और लोगों को यहाँ आकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। उन्होंने शहर को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

अंसारी ने कहा कि अतीत की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से आगे बढ़ते हुए अयोध्या के विकास और सकारात्मक वातावरण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि अंसारी का यह बयान उस समय आया है जब मंदिर परिसर और उसके आसपास के मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में 22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इन विवादों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक धार्मिक ट्रस्ट के पदाधिकारी के लिए असामान्य है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि ट्रस्ट के भीतर CEO नियुक्ति और उत्तराधिकार का विवाद दरअसल संस्थागत नियंत्रण की लड़ाई है — और इसके नतीजे अयोध्या से कहीं आगे तक असर डालेंगे।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर ट्रस्ट की 22 जुलाई की बैठक में क्या होगा?
22 जुलाई 2026 को होने वाली राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति और महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी से जुड़े विषयों पर चर्चा होनी है। कमल नयन दास ने कहा है कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और निर्णय उसी भावना से होने चाहिए।
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। अयोध्या के संतों ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए अयोध्या जैसे निष्पक्ष फैसले की उम्मीद जताई है; हालाँकि कोर्ट ने अभी तक कोई आदेश नहीं दिया है।
मथुरा में कार सेवा कब और क्यों प्रस्तावित है?
संत समाज ने अगस्त 2026 में मथुरा में कार सेवा शुरू करने का आह्वान किया है। महंत सीताराम दास के अनुसार, जिस प्रकार अयोध्या में कार सेवा ने राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन में भूमिका निभाई थी, उसी तरह मथुरा में भी कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए यह माध्यम अपनाया जा रहा है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी जांच कहाँ तक पहुँची है?
राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवाद की जांच एसआईटी कर रही है। संतों के अनुसार अंतरिम रिपोर्ट आ चुकी है और एसआईटी शीघ्र ही अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी; मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासन पर संत समाज ने भरोसा जताया है।
ज्ञानवापी विवाद पर संतों का क्या कहना है?
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि 'ज्ञानवापी' नाम किसी मंदिर का हो सकता है, किसी मस्जिद का नहीं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संविधान और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं और न्यायालय का जो भी फैसला होगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
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