बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन का मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई दो हफ्ते स्थगित
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को दो हफ्तों के लिए स्थगित किया।
- वकील श्याम दीवान ने समय मांगा।
- कोर्ट ने मौजूदा प्रबंधन में कोई बड़ा बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया।
- सेवायतों ने परंपरा को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर आपत्ति जताई।
- नई हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया गया है।
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई वर्तमान में दो हफ्तों के लिए स्थगित कर दी गई है। इस मुद्दे पर कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन मैनेजमेंट कमेटी के लिए उपस्थित हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने समय की मांग की।
वकील श्याम दीवान ने बताया कि उन्हें स्टेटस रिपोर्ट देर रात प्राप्त हुई है और उन्होंने इसे ठीक से पढ़ने का समय नहीं पाया है, इसलिए सुनवाई के लिए कुछ और समय देने की अपील की। इस पर कोर्ट ने सुनवाई को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अब इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोर्ट मंदिर की मौजूदा व्यवस्था में कोई बड़ा या संरचनात्मक परिवर्तन नहीं करना चाहता। इसका मतलब है कि अभी जो सिस्टम चल रहा है, उसमें तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा।
यह मामला मंदिर के सेवायतों (पुजारियों) द्वारा दायर की गई याचिका से संबंधित है। सेवायतों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मैनेजमेंट कमेटी के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कमेटी ने कुछ ऐसे निर्णय लिए हैं, जो परंपराओं के विरुद्ध हैं और इससे मंदिर की धार्मिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
याचिका में विशेष रूप से दो मुद्दों का उल्लेख किया गया है: पहला, मंदिर में दर्शन के समय को बढ़ाना और दूसरा, देहरी पूजा को रोकना। सेवायतों का कहना है कि ये दोनों निर्णय बिना उचित विचार-विमर्श के लिए गए हैं, जिससे मंदिर की पुरानी परंपराओं को नुकसान हो रहा है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मैनेजमेंट कमेटी में गोस्वामी (पुजारियों) की नियुक्ति मनमाने तरीके से की गई है, जो पारदर्शी प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं हुई। इस कारण सेवायतों में नाराजगी है और उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।
ज्ञात रहे कि पिछले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट ऑर्डिनेंस, 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी थी। साथ ही, मंदिर के प्रबंधन को सही तरीके से चलाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में 12 सदस्यों की एक उच्च पावर्ड कमेटी का गठन किया गया था, जो वर्तमान में मंदिर के कार्यों की निगरानी कर रही है।