14 जुलाई 2026
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सीबीएसई तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, केंद्र-CBSE-NCERT से दो सप्ताह में माँगा जवाब

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सीबीएसई तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, केंद्र-CBSE-NCERT से दो सप्ताह में माँगा जवाब

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीएसई की संशोधित तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से दो सप्ताह में जवाब माँगा है। याचिकाकर्ता अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र के बीच विदेशी भाषाएँ बंद कर संस्कृत थोपना असंवैधानिक है। 29 जुलाई को विस्तृत सुनवाई होगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को सीबीएसई की संशोधित तीन-भाषा नीति पर केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया।
अदालत ने दो सप्ताह में जवाब माँगा; अगली विस्तृत सुनवाई 29 जुलाई को निर्धारित।
अदालत ने सीबीएसई के 9 अप्रैल और 4 मई के सर्कुलरों पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कक्षा 6 से दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य करना आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 29 और अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है।
सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि वर्तमान कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा का विषय नहीं होगी, लेकिन स्कूल-आधारित परीक्षा पास करना अनिवार्य रहेगा।
इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं का एक अन्य समूह मई 2026 से सर्वोच्च न्यायालय में पहले से लंबित है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की संशोधित तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, सीबीएसई और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को नोटिस जारी किया। अदालत ने तीनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पीठ और सुनवाई का क्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अगली विस्तृत सुनवाई 29 जुलाई के लिए निर्धारित की गई है। अदालत ने फिलहाल सीबीएसई के विवादित परिपत्रों पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। सीबीएसई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आश्वासन दिया।

याचिका में क्या है

नई याचिकाओं में सीबीएसई के सेकेंडरी स्कूल पाठ्यक्रम (कक्षा 9-10) 2026-27 तथा 9 अप्रैल और 4 मई को जारी सर्कुलरों को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता दिल्ली-एनसीआर के सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों में कक्षा 6 में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक हैं। उनके बच्चे पहले अंग्रेजी, हिंदी और एक विदेशी भाषा पढ़ रहे थे, किंतु शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद स्कूलों ने अचानक विदेशी भाषाएँ बंद कर छात्रों को संस्कृत पढ़ने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, अधिवक्ता तृप्ति टंडन और अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड रोहित कुमार ने दलील दी कि यह नीति बिना कानूनी अधिकार के लागू की गई है और असंवैधानिक है। याचिका में यह भी कहा गया है कि स्कूलों को केवल सात दिन के भीतर नया पाठ्यक्रम लागू करने का निर्देश दिया गया, जिससे छात्रों में मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति पैदा हुई।

कानूनी आधार और संवैधानिक प्रश्न

याचिका में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29 का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्राथमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम निर्धारित करने का अधिकार केवल एनसीईआरटी को है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि सीबीएसई का 2026-27 का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी द्वारा न तैयार किया गया है और न ही जारी किया गया है, इसलिए इसका कोई कानूनी आधार नहीं है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि ये सर्कुलर संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं। याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक राज्य बनाम एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ इंग्लिश मीडियम प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल्स (2014) के संविधान पीठ के फैसले का भी संदर्भ दिया है। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है कि राजभाषा अधिनियम, 1963 के तहत अंग्रेजी भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक है, इसलिए उसे विदेशी भाषा मानना उचित नहीं।

सीबीएसई के दिशा-निर्देश

सीबीएसई ने नई नीति को लागू करने के संबंध में कुछ स्पष्टीकरण जारी किए हैं। बोर्ड के अनुसार, वर्तमान में कक्षा 9 में पढ़ रहे छात्रों के लिए तीसरी भाषा (आर-3) को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा का विषय नहीं बनाया जाएगा। हालाँकि, कक्षा 10 का पास प्रमाणपत्र पाने के लिए तीसरी भाषा की स्कूल-आधारित परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यदि कोई छात्र कक्षा 9 में यह परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो उसे अगले शैक्षणिक वर्ष में दोबारा अवसर दिया जाएगा।

वहीं, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को भविष्य में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी होगी, जब यह पाठ्यक्रम और संबंधित पुस्तकें पूरी तरह लागू हो जाएँगी।

पूर्व की याचिकाएँ और आगे की राह

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं का एक अन्य समूह पहले से लंबित है। मई 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने पहले से दायर याचिकाओं पर केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी करते हुए नीति की वैधता पर सुनवाई की सहमति दी थी। उस समय भी अदालत ने क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार किया था और शिक्षकों व अध्ययन सामग्री की उपलब्धता जैसे प्रश्नों पर सुनवाई के दौरान विचार करने का संकेत दिया था। अब 29 जुलाई की सुनवाई यह तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे नीति का उद्देश्य कितना भी उचित हो। असली सवाल यह है कि क्या न्यायालय केवल प्रक्रियागत खामियों पर फैसला देगा, या तीन-भाषा सूत्र की संवैधानिक वैधता की भी गहरी पड़ताल करेगा — क्योंकि यह निर्णय देश के करोड़ों सीबीएसई छात्रों की भाषा-शिक्षा की दिशा तय करेगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति पर नोटिस क्यों जारी किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को दिल्ली-एनसीआर के अभिभावकों द्वारा दायर नई याचिकाओं पर केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र के बीच बिना कानूनी अधिकार के कक्षा 6 से दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य कर दीं और विदेशी भाषाएँ बंद कर दीं।
सीबीएसई की संशोधित तीन-भाषा नीति क्या है?
सीबीएसई की संशोधित नीति के तहत कक्षा 6 से छात्रों को दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य रूप से पढ़नी होंगी। इसके लिए 9 अप्रैल और 4 मई 2026 को सर्कुलर जारी किए गए, जिनमें 2026-27 के सेकेंडरी स्कूल पाठ्यक्रम में यह बदलाव शामिल किया गया।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई के सर्कुलर पर रोक लगाई है?
नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीएसई के विवादित सर्कुलरों पर कोई अंतरिम रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। अगली विस्तृत सुनवाई 29 जुलाई को होगी, जिसमें शिक्षकों और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं का कानूनी तर्क क्या है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29 के तहत पाठ्यक्रम निर्धारण का अधिकार केवल एनसीईआरटी को है, जबकि सीबीएसई का 2026-27 का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी ने तैयार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि ये सर्कुलर संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं।
वर्तमान कक्षा 9 के छात्रों पर इस नीति का क्या असर होगा?
सीबीएसई के अनुसार, वर्तमान कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा (आर-3) कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा का विषय नहीं होगी। हालाँकि, पास प्रमाणपत्र के लिए स्कूल-आधारित परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा, और यदि कोई छात्र कक्षा 9 में यह परीक्षा नहीं दे पाता तो उसे अगले वर्ष अवसर मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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