पोलैंड उप विदेश मंत्री बार्टोसजेव्स्की बोले — पीएम मोदी विश्व के सबसे सक्षम नेताओं में, भारत 2047 तक तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा
सारांश
मुख्य बातें
पोलैंड के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोसजेव्स्की ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'बेहद सक्षम और शानदार' वैश्विक नेता करार दिया। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने जो बदलाव देखा है, वह किसी भी पर्यवेक्षक के लिए उल्लेखनीय है।
मोदी पर बार्टोसजेव्स्की का सीधा मूल्यांकन
नई दिल्ली में एक विशेष बातचीत के दौरान बार्टोसजेव्स्की ने कहा, 'वह दुनिया के बड़े नेताओं में से एक हैं, इसमें कोई शक नहीं है। वह बेहद सक्षम और बहुत ही सफल नेता हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने शानदार तरीके से तरक्की की है।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें मोदी से मिलने और बात करने का अवसर मिला है और वे उन्हें 'व्यवहारिक और भविष्य की सोच रखने वाले नेता' मानते हैं।
बार्टोसजेव्स्की ने 2047 तक भारत के दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा, 'जब वह कहते हैं कि 2047 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, तो मुझे इस पर पूरा भरोसा है।'
यूक्रेन संघर्ष में भारत की भूमिका
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने भारत की गुटनिरपेक्ष स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के पश्चिमी देशों और रूस — दोनों के साथ ऐतिहासिक और मज़बूत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री मोदी की बात पर ध्यान देते हैं।
बार्टोसजेव्स्की के अनुसार, 'प्रधानमंत्री मोदी उन बहुत कम नेताओं में शामिल हैं जो पुतिन पर कुछ हद तक दबाव बना सकते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि मोदी ने कुछ साल पहले पुतिन से संयम बरतने की अपील की थी और उनका मानना है कि यूक्रेन संघर्ष को रोकने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है।
समुद्री सुरक्षा पर भारत-पोलैंड की साझा चिंता
बार्टोसजेव्स्की ने होर्मुज स्ट्रेट और मलक्का स्ट्रेट जैसे रणनीतिक जलमार्गों की स्वतंत्रता पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत व्यापार का मार्ग मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है और किसी एक जलमार्ग पर प्रतिबंध की स्थिति अन्य मार्गों को भी प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूएनसीएलओएस (UNCLOS) के तहत जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के मुद्दे पर पोलैंड पूरी तरह भारत के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।
अंडरवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग की पेशकश
बार्टोसजेव्स्की ने बाल्टिक सागर में समुद्र के नीचे बिछे केबल को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए कहा कि पोलैंड और स्वीडन के बीच अंडरसी केबल को क्षति पहुँचाने की कोशिश भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए — विशेषकर जब वे किसी देश की समुद्री सीमा के बाहर होती हैं — पोलैंड भारत के अनुभव से सीखना चाहता है और अपने अनुभव भी साझा करने को तैयार है।
गौरतलब है कि भारत हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है और पोलैंड ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में भारत उसका सबसे अहम साझेदार है। यह बातचीत भारत-पोलैंड रणनीतिक संबंधों की बढ़ती गहराई का संकेत देती है।