क्या सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे पर सख्त कदम उठाए?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे पर सख्त कदम उठाए?

सारांश

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के कारण सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों के बंद होने को चुनौती दी। क्या यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य पर गलत असर डाल रहा है? जानें कोर्ट की सुनवाई के महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में।

मुख्य बातें

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति गंभीर है।
स्कूलों का बंद होना गरीब बच्चों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया।
मिड-डे मील योजना को जारी रखने पर विचार किया जा रहा है।
टोल वसूली पर रोक लगाने के विकल्प पर चर्चा की जा रही है।

नई दिल्ली, 17 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की चिंताजनक स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को गहन सुनवाई हुई। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए सरकार द्वारा कक्षा 5वीं तक के स्कूलों को बंद करने के निर्णय का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सरकारी स्कूलों में अध्ययन करने वाले अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं, जिनके पास न तो स्वच्छ वायु है और न ही एयर प्यूरीफायर जैसी सुविधाएं। स्कूल बंद होने से बच्चों को मिड-डे मील भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी सेहत और पोषण पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत में कहा कि केवल स्कूलों को बंद करना कोई समाधान नहीं है। गरीब बच्चों को घर पर बैठाकर उन्हें कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है?

इस पर मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि यदि मिड-डे मील योजना जारी रहती है, तो बच्चे स्कूल आने लगेंगे, जिससे उनका प्रदूषण के संपर्क में आना निश्चित है।

सुप्रीम कोर्ट ने नर्सरी से कक्षा 5वीं तक के स्कूल बंद करने के आदेश पर दिल्ली सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है।

सीजेआई ने कहा कि प्रदूषण की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह अस्थायी कदम है। यह सरकार का नीतिगत निर्णय है।

एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि रविवार से हालात काफी गंभीर और आपातकालीन जैसे हो गए हैं। बच्चों की जान खतरे में है। इसी कारण से सड़कों पर भी प्रतिबंध और खाली करने जैसे कदम उठाए गए हैं।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वैसे भी अब स्कूलों में छुट्टियां होंगी और उम्मीद की जा सकती है कि छुट्टियों के बाद प्रदूषण का स्तर कुछ कम होगा।

सुनवाई के दौरान यह भी मांग उठी कि स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। वहीं, निर्माण पर रोक से प्रभावित श्रमिकों की आर्थिक सहायता के बारे में एएसजी ने बताया कि 2.5 लाख श्रमिकों में से अब तक 7,000 को योग्य पाया गया है और भौतिक सत्यापन के बाद उन्हें भुगतान किया जाएगा।

सीजेआई ने निर्देश दिया कि भुगतान सीधे श्रमिकों के खातों में जाए और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो।

इसके अतिरिक्त, दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर एमसीडी टोल के कारण लगने वाले भारी जाम और उससे बढ़ते प्रदूषण पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। सीजेआई ने कहा कि 31 जनवरी तक टोल वसूली रोकने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों पर नियंत्रण पाया जा सके।

दिल्ली की सीमाओं पर टोल के कारण लगने वाले जाम के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने एनएचएआई से इस संभावना पर विचार करने को कहा है कि दिल्ली में एमसीडी के 9 टोल बूथों को ऐसे स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए, जिन्हें एनएचएआई द्वारा संचालित किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण स्कूल कब बंद हुए?
दिल्ली सरकार ने कक्षा 5वीं तक के स्कूल को प्रदूषण की गंभीर स्थिति के चलते बंद करने का निर्णय लिया।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले में हस्तक्षेप किया?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्कूल बंद करने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
क्या मिड-डे मील बच्चों के लिए जरूरी है?
हाँ, मिड-डे मील बच्चों की सेहत और पोषण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
क्या स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने का सुझाव दिया गया?
सुनवाई के दौरान स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने की मांग उठाई गई।
दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर टोल के कारण क्या समस्या है?
टोल के कारण भारी ट्रैफिक जाम लगने से प्रदूषण बढ़ रहा है, जो एक गंभीर मुद्दा है।
राष्ट्र प्रेस
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