1951 से 2026 तक: पश्चिम बंगाल में 93.71% मतदान, असम-तमिलनाडु-केरल-पुडुचेरी में भी मतदाता और भागीदारी दोनों बढ़े

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1951 से 2026 तक: पश्चिम बंगाल में 93.71% मतदान, असम-तमिलनाडु-केरल-पुडुचेरी में भी मतदाता और भागीदारी दोनों बढ़े

सारांश

1951 के पहले आम चुनाव से 2026 तक — भारत निर्वाचन आयोग के ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि असम, बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मतदाता आधार कई गुना बढ़ा और मतदान प्रतिशत ने नई ऊँचाइयाँ छुईं। पश्चिम बंगाल का 93.71% मतदान आजादी के बाद का सर्वोच्च रिकॉर्ड है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मई 2026 को पाँच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का 1951 से 2026 तक का चुनावी डेटा जारी किया।
पश्चिम बंगाल ने 93.71% मतदान के साथ आजादी के बाद का सर्वोच्च विधानसभा मतदान प्रतिशत दर्ज किया; मतदाता संख्या 76 लाख (1951) से बढ़कर 6.38 करोड़+ (2026) हुई।
असम में 2026 में मतदान 86.33% रहा; 1983 में हिंसा के कारण यह केवल 32% था।
तमिलनाडु में 86.03% मतदान; मतदाता 1.59 करोड़ (1967) से 4.94 करोड़ (2026) हुए।
केरल में 9 अप्रैल 2026 को 79.53% मतदान; मतदाता 58 लाख (1957) से 2.16 करोड़+ (2026) हुए।
पुडुचेरी ने 91.19% मतदान दर्ज किया; मतदाता 1.71 लाख (1964) से 8.67 लाख (2026) हुए।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 15 मई 2026 को असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की सात दशकों की चुनावी यात्रा का विस्तृत डेटा सार्वजनिक किया है। 1951 के पहले आम चुनाव से लेकर अप्रैल-मई 2026 के विधानसभा चुनावों तक के इन आँकड़ों में मतदाताओं की संख्या में कई गुना वृद्धि और मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। आयोग ने यह डेटा 'चुनाव का पर्व, मतदाता का गर्व' थीम के अंतर्गत जारी किया है।

पश्चिम बंगाल: आजादी के बाद का सर्वोच्च मतदान

पाँचों क्षेत्रों में पश्चिम बंगाल ने 93.71 प्रतिशत मतदान के साथ विधानसभा चुनावों में आजादी के बाद का सर्वोच्च मतदान प्रतिशत दर्ज किया है। 1950 के दशक में जब राज्य में मतदान 50 प्रतिशत से भी कम रहता था, उसकी तुलना में यह उछाल उल्लेखनीय है।

1970 के दशक के अंत से राज्य में लोकसभा और विधानसभा, दोनों चुनावों में मतदान लगातार 75 प्रतिशत के पार रहा है। मतदाताओं की संख्या 1951 के लगभग 76 लाख से बढ़कर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले 6.38 करोड़ से अधिक हो गई है — यानी सात दशकों में आठ गुने से भी अधिक की वृद्धि।

असम: हिंसा के दौर से उबरकर 86.33% तक पहुँची भागीदारी

असम में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में मतदान 86.33 प्रतिशत रहा। 1951 में राज्य में लगभग 24 लाख मतदाता थे, जो 2026 तक बढ़कर 2.16 करोड़ से अधिक हो गए हैं।

आयोग के आँकड़े एक महत्वपूर्ण अपवाद की ओर भी इशारा करते हैं — 1983 के विधानसभा चुनाव, जो राज्य में व्यापक हिंसा के बीच हुए थे। उस समय मतदान केवल लगभग 32 प्रतिशत रहा था और कई निर्वाचन क्षेत्रों में भागीदारी अत्यंत कम थी। यह चुनाव असम के इतिहास के सबसे अशांत चुनावों में गिना जाता है। उसके बाद से राज्य में मतदान प्रतिशत में लगातार सुधार आया है।

तमिलनाडु और केरल: स्थिर और उच्च जनभागीदारी

तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव में मतदान 86.03 प्रतिशत रहा। राज्य में मतदाताओं की संख्या 1967 के चुनावों के लगभग 1.59 करोड़ से बढ़कर 2026 तक लगभग 4.94 करोड़ हो गई है। 1970 के दशक के बाद से राज्य ने लगातार उच्च और स्थिर मतदान भागीदारी बनाए रखी है।

केरल में 9 अप्रैल 2026 को हुए विधानसभा चुनाव में मतदान 79.53 प्रतिशत दर्ज किया गया। राज्य ने 1957 में लगभग 58 लाख मतदाताओं के साथ अपनी चुनावी यात्रा शुरू की थी, जो अब 2.16 करोड़ से अधिक हो चुकी है। दशकों से केरल में मतदान का प्रतिशत अधिकतर 70 से 80 प्रतिशत के बीच बना रहा है।

पुडुचेरी: आकार में छोटा, भागीदारी में बड़ा

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने 91.19 प्रतिशत मतदान के साथ एक बार फिर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। 1964 में जहाँ यहाँ 1.71 लाख से कुछ अधिक मतदाता थे, वहीं 2026 तक यह संख्या लगभग 8.67 लाख तक पहुँच गई है। भौगोलिक दृष्टि से छोटा होने के बावजूद पुडुचेरी ने विधानसभा चुनावों में लगातार जोरदार भागीदारी दर्ज की है।

आँकड़ों का व्यापक संदर्भ

आयोग द्वारा जारी यह डेटा ऐसे समय में आया है जब 2026 के विधानसभा चुनाव अभी हाल ही में संपन्न हुए हैं और देश में लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। गौरतलब है कि ये पाँचों क्षेत्र भाषाई, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत विविध हैं, फिर भी सभी में मतदाता आधार और मतदान प्रतिशत दोनों में दीर्घकालिक वृद्धि देखी गई है। आँकड़ों के अनुसार, यह प्रवृत्ति भारत में लोकतांत्रिक जड़ों के गहरे होने का संकेत देती है। आगे भी चुनाव आयोग इस डेटा श्रृंखला को अन्य राज्यों के लिए भी जारी करने की योजना रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नागरिक चेतना के विस्तार से भी बढ़ती है। हालाँकि, असम का 1983 का अध्याय याद दिलाता है कि सामाजिक हिंसा और अस्थिरता इस भागीदारी को कितनी तेज़ी से नष्ट कर सकती है। पश्चिम बंगाल का 93.71% मतदान प्रभावशाली है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि उच्च मतदान प्रतिशत अकेले लोकतंत्र की गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकता — मतदाताओं की स्वतंत्र और निर्भय भागीदारी भी उतनी ही ज़रूरी है। आयोग का यह डेटा-केंद्रित दृष्टिकोण पारदर्शिता की दिशा में सही कदम है, पर इसे राज्यवार मतदाता शिक्षा और चुनावी अखंडता के आँकड़ों के साथ भी पढ़ा जाना चाहिए।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत निर्वाचन आयोग ने 2026 में कौन-सा चुनावी डेटा जारी किया?
आयोग ने 15 मई 2026 को असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी का 1951 से 2026 तक का मतदाता संख्या और मतदान प्रतिशत का विस्तृत डेटा जारी किया। यह डेटा 'चुनाव का पर्व, मतदाता का गर्व' थीम के अंतर्गत प्रकाशित किया गया।
पश्चिम बंगाल में 2026 में मतदान प्रतिशत कितना रहा और यह क्यों उल्लेखनीय है?
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में 93.71 प्रतिशत मतदान हुआ, जो आजादी के बाद का सर्वोच्च आँकड़ा है। 1950 के दशक में जब राज्य में मतदान 50 प्रतिशत से कम था, उसकी तुलना में यह उछाल सात दशकों की लोकतांत्रिक परिपक्वता को दर्शाता है।
असम में 1983 के चुनाव में मतदान इतना कम क्यों था?
1983 के असम विधानसभा चुनाव राज्य में व्यापक हिंसा के बीच हुए थे, जिसके कारण मतदान केवल लगभग 32 प्रतिशत रहा। कई निर्वाचन क्षेत्रों में भागीदारी अत्यंत कम थी, और यह चुनाव असम के इतिहास के सबसे अशांत चुनावों में गिना जाता है।
इन पाँच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या 1951 से 2026 के बीच कितनी बढ़ी?
पश्चिम बंगाल में 76 लाख से 6.38 करोड़+, असम में 24 लाख से 2.16 करोड़+, तमिलनाडु में 1.59 करोड़ (1967) से 4.94 करोड़, केरल में 58 लाख (1957) से 2.16 करोड़+ और पुडुचेरी में 1.71 लाख (1964) से 8.67 लाख तक मतदाता संख्या पहुँची है। सभी क्षेत्रों में दशकों के दौरान कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
2026 में तमिलनाडु और केरल में मतदान प्रतिशत कितना रहा?
तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव में 86.03 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि केरल में 9 अप्रैल 2026 को हुए चुनाव में 79.53 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दोनों राज्यों में 1970 के दशक के बाद से उच्च और स्थिर मतदान भागीदारी बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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