ऐतिहासिक मतदान: तमिलनाडु में 84.64%25 और पश्चिम बंगाल में 91.74%25 वोटिंग, CEC ज्ञानेश कुमार ने किया सलाम
सारांश
Key Takeaways
- तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को 234 सीटों पर हुए मतदान में 84.64 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई — आजादी के बाद राज्य का सर्वोच्च मतदान।
- पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 सीटों पर 91.74 प्रतिशत मतदान हुआ — यह भी स्वतंत्र भारत में राज्य का अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत।
- दक्षिण दिनाजपुर में 94.77 प्रतिशत के साथ पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया।
- तमिलनाडु के करूर जिले में 92.28 प्रतिशत के साथ राज्य में सबसे अधिक वोटिंग हुई।
- CEC ज्ञानेश कुमार ने इसे लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत बताते हुए दोनों राज्यों के मतदाताओं को ECI की ओर से सलाम किया।
- दोनों राज्यों में मतदान पूर्णतः शांतिपूर्ण रहा और कहीं से किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 23 अप्रैल 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर दोनों राज्यों के करोड़ों मतदाताओं को सलाम किया और इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया।
कितना रहा मतदान प्रतिशत?
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शाम 6 बजे तक तमिलनाडु में 84.64 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 91.74 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ये आंकड़े स्वतंत्र भारत के चुनावी इतिहास में दोनों राज्यों के लिए अब तक के सर्वोच्च हैं।
तमिलनाडु में एक ही चरण में 234 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जबकि पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 सीटों पर वोट डाले गए। दोनों राज्यों में मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं, जो जन-भागीदारी की मजबूती का प्रमाण है।
CEC ज्ञानेश कुमार का बयान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस अवसर पर कहा, "आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ है। ECI पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हर मतदाता को सलाम करता है।" उनका यह बयान लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है।
पश्चिम बंगाल के जिलावार मतदान आंकड़े
पश्चिम बंगाल में कई जिलों ने 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। दक्षिण दिनाजपुर में सर्वाधिक 94.77 प्रतिशत, कूचबिहार में 94.40 प्रतिशत, बीरभूम में 93.61 प्रतिशत और जलपाईगुड़ी में 93.01 प्रतिशत वोटिंग हुई।
इसके अलावा मुर्शिदाबाद में 92.88 प्रतिशत, मालदा में 92.22 प्रतिशत, उत्तर दिनाजपुर में 92.04 प्रतिशत और झारग्राम में 91.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अलीपुरद्वार, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर जैसे जिलों में मतदान प्रतिशत 89 से 91 के बीच रहा।
पर्वतीय क्षेत्रों में दार्जिलिंग में 88.01 प्रतिशत और कलिम्पोंग में 82.93 प्रतिशत मतदान हुआ — जो तुलनात्मक रूप से कम, लेकिन भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए उल्लेखनीय है।
तमिलनाडु के जिलावार मतदान आंकड़े
तमिलनाडु में करूर जिले ने 92.28 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक मतदान दर्ज किया। इसके बाद सलेम में 90.38 प्रतिशत, इरोड में 89.93 प्रतिशत और धर्मपुरी में 89.99 प्रतिशत मतदान हुआ।
नमक्कल, तिरुपुर, तिरुपत्तूर और वेल्लोर जिलों में 85 से 89 प्रतिशत के बीच वोटिंग रही। चेन्नई, मदुरै और तिरुनेलवेली जैसे शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन फिर भी यह संतोषजनक स्तर पर बना रहा — जो शहरी मतदाता जागरूकता में सुधार का संकेत है।
शांतिपूर्ण मतदान और सुरक्षा व्यवस्था
चुनाव आयोग के अनुसार दोनों राज्यों में मतदान पूर्णतः शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। किसी भी बड़े जिले से हिंसा या अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं आई। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनात किया गया था और व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पिछले कई चुनावों में हिंसा की घटनाएं सुर्खियां बनती रही हैं। ऐसे में इस बार का शांतिपूर्ण और रिकॉर्ड मतदान एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह चुनाव आयोग की कड़ी तैयारियों और मतदाताओं की परिपक्वता दोनों का प्रमाण है।
ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक निहितार्थ
भारत में सामान्यतः विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय औसत मतदान 60 से 70 प्रतिशत के बीच रहता है। ऐसे में तमिलनाडु का 84.64 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल का 91.74 प्रतिशत मतदान न केवल इन राज्यों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत जनता की सत्ता के प्रति जवाबदेही की मांग को दर्शाता है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल मतदान प b>78.03 प्रतिशत रहा था। इस बार के आंकड़े उससे कहीं अधिक हैं, जो स्पष्ट संकेत देते हैं कि मतदाताओं में राजनीतिक चेतना और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का भाव गहरा हुआ है।
अगले चरणों के मतदान और अंतिम परिणामों पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी। चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि शेष चरणों में भी इसी स्तर की सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।