ऐतिहासिक मतदान: पश्चिम बंगाल में 89.93%25 और तमिलनाडु में 82.24%25 वोटिंग, मतदाताओं का जोश बेमिसाल
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 23 अप्रैल को 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
- तमिलनाडु में 82.24 प्रतिशत वोटिंग हुई — करूर में सर्वाधिक 89.32%25 रहा।
- बंगाल में दक्षिण दिनाजपुर (93.12%25) और कूचबिहार (92.07%25) शीर्ष पर रहे।
- तमिलनाडु में कन्याकुमारी (73.44%25) में सबसे कम मतदान दर्ज हुआ।
- पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा।
- दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल। पश्चिम बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनावों में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। चुनाव आयोग द्वारा शाम 5 बजे तक जारी अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 89.93 प्रतिशत और तमिलनाडु में 82.24 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया — जो लोकतांत्रिक भागीदारी का एक मजबूत संकेत है।
पश्चिम बंगाल में जिलावार मतदान का विवरण
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में कुल 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। दक्षिण दिनाजपुर में सर्वाधिक 93.12 प्रतिशत वोटिंग रही, जो राज्य में सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
कूचबिहार में 92.07, बीरभूम में 91.55, जलपाईगुड़ी में 91.20, मुर्शिदाबाद में 91.36 और झारग्राम में 90.53 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं पश्चिम मेदिनीपुर में 90.70 और मालदा में 89.56 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई।
अलीपुरद्वार में 88.74, बांकुड़ा में 89.91, पूर्व मेदिनीपुर में 88.55, पुरुलिया में 87.35, पश्चिम बर्धमान में 86.89, दार्जिलिंग में 86.49, उत्तर दिनाजपुर में 89.74 और कलिम्पोंग में 81.98 प्रतिशत मतदान रहा।
तमिलनाडु में जिलेवार मतदान के आंकड़े
तमिलनाडु में कुल 82.24 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। करूर में सर्वाधिक 89.32 प्रतिशत और इरोड में 87.59 प्रतिशत वोटिंग रही। धर्मपुरी में 87.28, नमक्कल में 87.63 और डिंडीगुल में 86.35 प्रतिशत मतदान हुआ।
सलेम में 88.02, रानीपेट में 86.28, तिरुपुर में 86.33, तिरुवन्नामलाई में 85.59, वेल्लोर में 85.06, विलुप्पुरम में 85.45 और तिरुपत्तूर में 85.28 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
कल्लाकुरिची में 84.22, कांचीपुरम में 84.92, नागपट्टिनम में 83.15, अरियालुर में 83.09, चेंगलपट्टू में 82.41, कोयंबटूर में 82.33, कृष्णागिरि में 82.40, तिरुचिरापल्ली में 82.76 और विरुधुनगर में 82.16 प्रतिशत वोटिंग हुई।
चेन्नई में 81.34, कडलूर में 81.91, पुडुकोट्टई में 81.55, पेरम्बलुर में 82.75, तिरुवल्लूर में 80.70 और तिरुवरुर में 80.65 प्रतिशत मतदान रहा।
अपेक्षाकृत कम मतदान वाले जिलों में कन्याकुमारी में 73.44, रामनाथपुरम में 74.41, शिवगंगा में 74.44, नीलगिरी में 75.90, तिरुनेलवेली में 75.10, थूथुकुडी में 77.56, मदुरै में 77.89, मयिलादुथुरै में 78.41, थेनी में 78.73, तंजावुर में 78.07 और तेनकासी में 79.28 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।
ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक महत्व
पश्चिम बंगाल में उच्च मतदान कोई नई बात नहीं है — राज्य ऐतिहासिक रूप से देश में सर्वाधिक मतदान प्रतिशत वाले राज्यों में शुमार रहा है। हालांकि, इस बार 89.93 प्रतिशत का आंकड़ा यह दर्शाता है कि मतदाताओं में राजनीतिक चेतना और भागीदारी की भावना चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों के लिए अनिश्चितता का संकेत हो सकता है।
तमिलनाडु में 82.24 प्रतिशत मतदान भी उल्लेखनीय है, क्योंकि दक्षिण भारत में आमतौर पर मतदान प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से ऊपर रहता है। करूर और इरोड जैसे जिलों में 87-89 प्रतिशत तक की वोटिंग यह संकेत देती है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रही।
आगे क्या होगा
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित है। दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। उच्च मतदान प्रतिशत के मद्देनजर नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं और राष्ट्रीय राजनीति पर इनका गहरा असर पड़ने की संभावना है।