10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ऐतिहासिक मतदान: बंगाल में 92.88% और तमिलनाडु में 84.69% वोटिंग, मनोज झा बोले- लोकतंत्र की जीत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ऐतिहासिक मतदान: बंगाल में 92.88% और तमिलनाडु में 84.69% वोटिंग, मनोज झा बोले- लोकतंत्र की जीत

सारांश

पश्चिम बंगाल में 92.88% और तमिलनाडु में 84.69% ऐतिहासिक मतदान पर राजद सांसद मनोज झा ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया। सपा ने संदेह जताया तो संजय राउत ने SIR को कारण बताया। दोनों राज्यों में टूटे दशकों पुराने रिकॉर्ड।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल में 152 सीटों पर पहले चरण में 92.88 प्रतिशत मतदान हुआ — राज्य के इतिहास का सर्वाधिक।
तमिलनाडु में 84.69 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो आजादी के बाद राज्य का सर्वोच्च मतदान है।
राजद सांसद मनोज झा ने रिकॉर्ड वोटिंग को लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत बताया।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने बंगाल में अचानक 30 प्रतिशत मतदान बढ़ोतरी पर संदेह जताया।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने SIR प्रक्रिया को उच्च मतदान का मुख्य कारण बताया।
बंगाल में 2011 का 84.33 प्रतिशत और तमिलनाडु में 2011 का 78.29 प्रतिशत का पुराना रिकॉर्ड टूटा।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल में पहले चरण के विधानसभा चुनाव में 92.88 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84.69 प्रतिशत का ऐतिहासिक मतदान दर्ज होने के बाद देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक और उत्साहजनक संकेत करार दिया है।

मनोज झा की प्रतिक्रिया: लोकतंत्र की विजय

राजद के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने रिकॉर्ड मतदान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों राज्यों में हुई भारी वोटिंग यह साबित करती है कि भारत का लोकतंत्र जीवंत और सशक्त है। उन्होंने कहा, तमिलनाडु में करीब 86 प्रतिशत और बंगाल में 92.59 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो अपने आप में उत्साहजनक है। उनके अनुसार जब मतदाता बड़ी संख्या में घर से निकलकर अपना मत देते हैं, तो यह लोकशाही की परिपक्वता को दर्शाता है।

विपक्ष में मतभेद: सवाल भी, समर्थन भी

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने हालांकि पश्चिम बंगाल के मतदान प्रतिशत पर संदेह जताया। उन्होंने कहा, 92 प्रतिशत मतदान और उसमें अचानक 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी अपने आप में संदेह पैदा करती है। यह टिप्पणी बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस उच्च मतदान के पीछे एक अलग राजनीतिक कारण बताया। उन्होंने कहा, बंगाल में जिस तरह एसआईआर को लागू किया गया, उसी के कारण लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया। राउत के अनुसार पश्चिम बंगाल में 92 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84-85 प्रतिशत मतदान के दौरान एक प्रकार का राजनीतिक तूफान देखने को मिला।

चुनाव आयोग के आंकड़े: इतिहास रचा गया

भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार आधी रात तक पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर पहले चरण का मतदान 92.88 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सर्वाधिक मतदान है।

इससे पहले 2011 के विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड था, जब 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ था और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस पहली बार सत्ता में आई थी। उस छह चरणीय चुनाव में औसत मतदान 84.33 प्रतिशत रहा था।

तमिलनाडु में भी आजादी के बाद का सर्वोच्च मतदान

तमिलनाडु में इस बार 84.69 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो स्वतंत्रता के बाद से राज्य का सबसे अधिक मतदान है। इससे पहले 2011 के विधानसभा चुनाव में यहां 78.29 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो अब तक का रिकॉर्ड था।

गहन विश्लेषण: रिकॉर्ड वोटिंग के मायने क्या हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों की दृष्टि से देखें तो बंगाल में इतना उच्च मतदान कई संकेत देता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां बंगाल में 76.97 प्रतिशत मतदान हुआ था, वहीं इस बार 92.88 प्रतिशत का आंकड़ा एक असाधारण उछाल है। यह उछाल स्वाभाविक रूप से दोनों पक्षों के दावों और संदेहों को जन्म देता है।

गौरतलब है कि बंगाल में एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर पहले से ही विवाद था। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया ने मतदाताओं में एक प्रकार की सतर्कता और प्रतिक्रिया पैदा की, जो उन्हें मतदान केंद्रों तक खींच लाई। दूसरी ओर, तमिलनाडु में उच्च मतदान को वहां की मजबूत राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और द्रविड़ राजनीति की जड़ों से जोड़कर देखा जा रहा है।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भारत का राष्ट्रीय औसत मतदान 2024 के लोकसभा चुनाव में 65.79 प्रतिशत रहा था। ऐसे में बंगाल और तमिलनाडु का यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर भी लोकतांत्रिक भागीदारी की नई परिभाषा गढ़ता है।

आगे क्या?

रिकॉर्ड मतदान के बाद अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। पश्चिम बंगाल में शेष चरणों के चुनाव और तमिलनाडु में परिणाम यह तय करेंगे कि इस भारी जनभागीदारी का लाभ किस राजनीतिक दल को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत सत्ताविरोधी लहर का संकेत हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि परिणाम आने के बाद ही होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक संदेश है — लेकिन यह संदेश किसके पक्ष में है, यह अभी स्पष्ट नहीं। इतिहास गवाह है कि 2011 में जब बंगाल ने 84 प्रतिशत वोट डाले थे, तब 34 साल की वाम सत्ता उखड़ गई थी। इस बार का 92 प्रतिशत आंकड़ा या तो सत्ताविरोधी लहर का प्रतीक है, या फिर SIR जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के खिलाफ जनता की प्रतिक्रिया — दोनों ही स्थितियां सत्तारूढ़ TMC के लिए सहज नहीं हैं। मुख्यधारा की मीडिया जहां इसे लोकतंत्र की जीत के रूप में पेश कर रही है, वहीं असली सवाल यह है कि इस भारी भीड़ के पीछे उत्साह है या आक्रोश।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनाव में कितने प्रतिशत मतदान हुआ?
पश्चिम बंगाल में 2026 के पहले चरण के विधानसभा चुनाव में 92.88 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक है। इससे पहले 2011 में 84.33 प्रतिशत का रिकॉर्ड था।
तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव में कितना मतदान हुआ?
तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव में 84.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो आजादी के बाद राज्य का सर्वोच्च मतदान है। इससे पहले 2011 में 78.29 प्रतिशत का रिकॉर्ड था।
मनोज झा ने बंगाल और तमिलनाडु की वोटिंग पर क्या कहा?
राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि दोनों राज्यों में हुआ रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र के लिए एक अच्छा और उत्साहजनक संकेत है। उन्होंने इसे भारतीय लोकशाही की मजबूती का प्रमाण बताया।
संजय राउत ने बंगाल में उच्च मतदान का क्या कारण बताया?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि बंगाल में SIR प्रक्रिया लागू होने के कारण लोग बड़ी संख्या में मतदान करने निकले। उनके अनुसार इस प्रक्रिया ने मतदाताओं में एक प्रतिक्रियात्मक जागरूकता पैदा की।
समाजवादी पार्टी ने बंगाल के मतदान पर क्या सवाल उठाए?
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि 92 प्रतिशत मतदान और उसमें अचानक 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी संदेह पैदा करती है। उन्होंने इस उछाल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले