वैभव सूर्यवंशी को सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश: ईशान किशन ने खोला ड्रेसिंग रूम का राज़
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन ने खुलासा किया है कि ड्रेसिंग रूम में वैभव सूर्यवंशी को सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रखकर क्रिकेट पर केंद्रित रहने में मदद की जा रही है। 26 जुलाई को जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में किशन ने यह बात कही। महज 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले वैभव पहले टी20 में सिर्फ 18 गेंदों में अर्धशतक जड़ने के बाद से लगातार सुर्खियों में हैं।
ईशान किशन ने क्या कहा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईशान ने कहा, 'वैभव असल में बहुत समझदार हैं। उन्हें पता है कि वह क्या कर रहे हैं, उन्हें कैसे बैटिंग करनी है, मैदान के बाहर और मैदान पर कैसा व्यवहार करना है। हालांकि, साथ ही, मुझे लगता है कि वह जिस बैकग्राउंड से आते हैं, वहां कई तरह की ध्यान भटकाने वाली चीजें हो सकती हैं। दोस्तों के सर्कल में भी ऐसी चीजें होती हैं।'
किशन ने आगे जोड़ा, 'उसी बैकग्राउंड से आने के कारण, मुझे पता है कि जब आप क्रिकेट खेलते हैं, जब आप भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो किन चीजों पर ध्यान देना जरूरी होता है। सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि अभिषेक, अक्षर और कई दूसरे खिलाड़ी — हम सब यही पक्का करते हैं कि वह अभी ज्यादा से ज्यादा क्रिकेट के बारे में सोचे, न कि सोशल मीडिया पर क्या हो रहा है या रन न बनने पर अपनी बॉडी लैंग्वेज को खराब होने दें।'
ईशान किशन का दूसरे टी20 में धमाकेदार प्रदर्शन
बात सिर्फ मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रही — ईशान ने बल्ले से भी कमाल किया। उन्होंने 44 गेंदों में 9 चौके और 2 छक्कों की मदद से 81 रन की तूफानी पारी खेली। वहीं, तिलक वर्मा ने 29 गेंदों में 5 चौके और 3 छक्कों के साथ नाबाद 60 रन बनाए।
मैच का स्कोरकार्ड
ईशान और तिलक की आतिशी साझेदारी के दम पर भारत ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 219 रन का स्कोर खड़ा किया। जवाब में जिम्बाब्वे की पूरी टीम 219 रन पर ढेर हो गई और भारत ने मैच जीत लिया।
वैभव सूर्यवंशी: उभरता सितारा
गौरतलब है कि वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखकर इतिहास रच दिया। पहले टी20 में 18 गेंदों में अर्धशतक उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी का प्रमाण था। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय क्रिकेट युवा प्रतिभाओं को तराशने पर विशेष ध्यान दे रहा है। सीनियर खिलाड़ियों का यह सामूहिक प्रयास दर्शाता है कि टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम युवा खिलाड़ियों के मानसिक विकास को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है जितनी तकनीकी कौशल को। आने वाले मैचों में वैभव का प्रदर्शन यह तय करेगा कि यह सामूहिक निवेश कितना फलदायी साबित होता है।