26 जुलाई 2026
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अर्धउष्ट्रासन से पीठ-गर्दन को मिलती है मजबूती, आयुष मंत्रालय ने बताए रक्त संचार सुधारने के फायदे

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अर्धउष्ट्रासन से पीठ-गर्दन को मिलती है मजबूती, आयुष मंत्रालय ने बताए रक्त संचार सुधारने के फायदे

सारांश

आयुष मंत्रालय ने एक्स पर अर्धउष्ट्रासन की सिफारिश की — यह हल्का बैकबेंड आसन पीठ-गर्दन को मजबूत बनाने, रक्त संचार सुधारने और कब्ज से राहत दिलाने में सहायक बताया गया है। डेस्क पर घंटों बैठकर काम करने वालों के लिए यह सलाह खासतौर पर प्रासंगिक है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 26 जुलाई 2026 को एक्स पर अर्धउष्ट्रासन के नियमित अभ्यास की सलाह दी।
यह योगासन पीठ और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलापन बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
मंत्रालय के अनुसार, यह सिर और हृदय क्षेत्र में रक्त संचार को बेहतर बना सकता है।
कब्ज और पीठ दर्द से राहत दिलाने में भी यह आसन उपयोगी बताया गया है।
गलत शारीरिक मुद्रा और लंबे समय तक बैठे रहना पीठ-गर्दन की समस्याओं का प्रमुख कारण माना जाता है।

आयुष मंत्रालय ने 26 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अर्धउष्ट्रासन के नियमित अभ्यास की सलाह देते हुए कहा कि यह हल्का बैकबेंड योगासन पीठ और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, लचीलापन बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। मंत्रालय के अनुसार, यह योगासन सिर और हृदय क्षेत्र में रक्त संचार को भी बेहतर बना सकता है, जिससे शरीर को ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति में सुधार हो सकता है।

क्यों जरूरी है अर्धउष्ट्रासन

आज की जीवनशैली में लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, गलत शारीरिक मुद्रा (बैड पोश्चर), लगातार बैठे रहना और नियमित व्यायाम का अभाव — ये तीन प्रमुख कारण हैं जिनसे पीठ और गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और वे धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं।

इसके अलावा, शरीर में रक्त संचार कम होने पर अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पाते। इसके परिणामस्वरूप हाथ-पैरों का ठंडा पड़ना, सुन्नपन, झुनझुनी और घाव भरने में अधिक समय लगने जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

आयुष मंत्रालय की सलाह

आयुष मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में कहा कि अर्धउष्ट्रासन का नियमित अभ्यास कब्ज और पीठ दर्द से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। मंत्रालय के अनुसार, यह योगासन सिर और हृदय क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है, जिससे पूरे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू हो सकती है। मंत्रालय ने इसे स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली की दिशा में एक प्रभावी कदम बताया है।

अर्धउष्ट्रासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस योगासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:

पीठ और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूती: यह आसन रीढ़ की हड्डी को सहारा देने वाली मांसपेशियों को सक्रिय करता है, जिससे दीर्घकालिक दर्द में राहत मिल सकती है। रक्त संचार में सुधार: सिर और हृदय क्षेत्र में बेहतर रक्त प्रवाह से ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति सुधरती है। कब्ज से राहत: पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। शरीर में लचीलापन: नियमित अभ्यास से शरीर की समग्र गतिशीलता बेहतर हो सकती है।

किसे विशेष रूप से होगा फायदा

यह योगासन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी बताया गया है जो लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करते हैं, जिन्हें पीठ दर्द या गर्दन में अकड़न की शिकायत रहती है, या जो अपने रक्त संचार को बेहतर बनाना चाहते हैं। गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय समय-समय पर विभिन्न योगासनों के बारे में जागरूकता फैलाता रहा है, और यह सलाह उसी श्रृंखला का हिस्सा है।

सावधानी और आगे का कदम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी नए योगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले, विशेषकर यदि पहले से कोई चिकित्सीय स्थिति हो, तो योग्य योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है। आयुष मंत्रालय की यह पहल देश में निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या एक पोस्ट पर्याप्त मार्गदर्शन देती है। अर्धउष्ट्रासन के लाभ स्थापित हैं, परंतु बिना प्रशिक्षित निर्देशन के गलत तरीके से किए गए योगासन से चोट का जोखिम भी हो सकता है — जिसका उल्लेख मंत्रालय की सलाह में नहीं था। निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना सराहनीय है, लेकिन डिजिटल स्वास्थ्य संचार में 'किसे न करना चाहिए' और 'कैसे करें' जैसी जानकारी भी उतनी ही जरूरी है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्धउष्ट्रासन क्या है और इसे कैसे किया जाता है?
अर्धउष्ट्रासन एक हल्का बैकबेंड योगासन है जिसमें घुटनों के बल बैठकर पीछे की ओर झुका जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह शरीर को मजबूत बनाने, लचीलापन बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर रखने में सहायक माना जाता है।
अर्धउष्ट्रासन के क्या-क्या स्वास्थ्य लाभ हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस योगासन के नियमित अभ्यास से पीठ और गर्दन की मांसपेशियाँ मजबूत हो सकती हैं, सिर और हृदय क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर हो सकता है, और कब्ज व पीठ दर्द में राहत मिल सकती है। यह शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति को भी सुधार सकता है।
अर्धउष्ट्रासन किन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है?
यह योगासन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी बताया गया है जो लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करते हैं या जिन्हें पीठ दर्द, गर्दन की अकड़न या खराब रक्त संचार की शिकायत रहती है। गलत शारीरिक मुद्रा और व्यायाम के अभाव से पीड़ित लोग इससे लाभ उठा सकते हैं।
क्या अर्धउष्ट्रासन करने से पहले किसी सावधानी की जरूरत है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नए योगासन को दिनचर्या में शामिल करने से पहले — विशेषकर यदि पहले से कोई चिकित्सीय स्थिति हो — तो योग्य योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है। गलत तरीके से किए गए आसन से चोट का जोखिम हो सकता है।
रक्त संचार कम होने के क्या लक्षण होते हैं?
शरीर में रक्त संचार कम होने पर हाथ-पैरों का ठंडा पड़ना, सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना और चोट या घाव भरने में अधिक समय लगना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। ऐसे में नियमित योगाभ्यास रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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