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बड़ी खबर: बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल का मतदान रहा शांतिपूर्ण, किसी भी बूथ पर नहीं हुई पुनर्मतदान की सिफारिश

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बड़ी खबर: बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल का मतदान रहा शांतिपूर्ण, किसी भी बूथ पर नहीं हुई पुनर्मतदान की सिफारिश

सारांश

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को हुए मतदान में किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं हुई। बंगाल में 92% और तमिलनाडु में 85.15% मतदान दर्ज। बंगाल का दूसरा चरण 29 अप्रैल और तमिलनाडु के नतीजे 4 मई को आएंगे।

मुख्य बातें

23 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में संपन्न मतदान में किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई।
तमिलनाडु के 75,064 बूथों पर 85.15% मतदान दर्ज, राज्य की 234 सीटों पर 5.7 करोड़+ मतदाताओं ने वोट डाले।
पश्चिम बंगाल के 44,376 बूथों पर 92%+ मतदान, पहले चरण में 152 सीटों पर 3.6 करोड़ मतदाताओं ने भाग लिया।
बंगाल के पहले चरण में 16 जिले शामिल — उत्तर और दक्षिण बंगाल दोनों के प्रमुख जिले।
बंगाल में दूसरा चरण 29 अप्रैल को और तमिलनाडु के नतीजे 4 मई 2026 को आएंगे।
तमिलनाडु में TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) और NTK जैसी नई पार्टियां पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को चुनौती दे रही हैं।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के मतदान को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ी जानकारी साझा की है। दोनों राज्यों में कुल 1,19,440 मतदान केंद्रों पर हुए मतदान में किसी भी एक बूथ पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई, जो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और शांतिपूर्ण संचालन का प्रमाण है।

तमिलनाडु: एकल चरण में ऐतिहासिक मतदान

तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान संपन्न हुआ। राज्य के 75,064 मतदान केंद्रों पर 5.7 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यहां 85.15 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य में मतदाताओं की उत्साहजनक भागीदारी को दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में पिछले कई दशकों से द्रविड़ राजनीति का वर्चस्व रहा है। इस बार मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) और विपक्षी एआईएडीएमके (AIADMK) के बीच है। इसके अलावा तमिलर काची (NTK) और अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) जैसी नई राजनीतिक शक्तियां भी मैदान में हैं, जो पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को सीधी चुनौती दे रही हैं।

4 मई 2026 को घोषित होने वाले चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि क्या मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके अपनी सत्ता बरकरार रखेगी, या फिर TVK और NTK जैसी उभरती ताकतें राज्य की राजनीति में नया समीकरण बनाएंगी।

पश्चिम बंगाल: पहले चरण में 92% से अधिक मतदान

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। राज्य के 44,376 मतदान केंद्रों पर करीब 3.6 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले। यहां 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो देश के किसी भी राज्य में इस चुनावी सत्र का अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है।

पहले चरण में 16 जिलों में मतदान संपन्न हुआ। उत्तर बंगाल के कूच बिहार, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा जिले इसमें शामिल रहे। दक्षिण बंगाल से मुर्शिदाबाद, पूर्वी मिदनापुर, पश्चिमी मिदनापुर, झारग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम बर्दवान और बीरभूम जिलों में भी मतदान हुआ।

ऐतिहासिक रूप से पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा की घटनाएं सुर्खियां बनती रही हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर हिंसा की खबरें आई थीं और कई बूथों पर पुनर्मतदान कराना पड़ा था। ऐसे में इस बार पहले चरण में शून्य पुनर्मतदान की सिफारिश को निर्वाचन आयोग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

निर्वाचन आयोग की भूमिका और चुनावी प्रबंधन

भारत निर्वाचन आयोग ने इस बार दोनों राज्यों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी सुनिश्चित की। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती और वेबकास्टिंग के जरिए बूथ-स्तरीय निगरानी ने चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखा। यह उस समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब देश में चुनावी विश्वसनीयता पर बहस जारी है।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पश्चिम बंगाल के कुछ चरणों में हिंसा की शिकायतें मिली थीं। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में शांतिपूर्ण मतदान यह संकेत देता है कि राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है।

आगे क्या: दूसरा चरण और परिणाम

पश्चिम बंगाल में शेष 142 विधानसभा सीटों के लिए दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल 2026 को होगा। इस चरण में मुख्य रूप से कोलकाता और उसके आसपास के जिले शामिल होंगे, जहां राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र रहने की संभावना है। वहीं, तमिलनाडु के मतदाता 4 मई को परिणाम का इंतजार करेंगे।

दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इस बार का शांतिपूर्ण मतदान निर्वाचन आयोग के लिए एक संस्थागत पुनर्वापसी है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह शांति टिकाऊ है या सिर्फ पहले चरण की सतर्कता का नतीजा? तमिलनाडु में TVK जैसी नई ताकत का उभार द्रविड़ राजनीति के पुराने ढांचे को तोड़ने की कोशिश है — और 4 मई का फैसला बताएगा कि मतदाताओं ने परिवर्तन को वोट दिया या परंपरा को।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को कितने बूथों पर मतदान हुआ?
पश्चिम बंगाल में 44,376 और तमिलनाडु में 75,064 मतदान केंद्रों पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ। दोनों राज्यों में किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में कितने प्रतिशत मतदान हुआ?
तमिलनाडु में 85.15 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। राज्य की 234 विधानसभा सीटों के लिए 5.7 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाले।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण का मतदान कब होगा?
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल 2026 को होगा। इस चरण में शेष 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा।
तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजे कब आएंगे?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। मुख्य मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के बीच है।
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में कौन-कौन से जिले शामिल थे?
पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें कूच बिहार, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, बांकुड़ा और बीरभूम प्रमुख थे।
राष्ट्र प्रेस
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