चार राज्यों में 25 करोड़ मतदाताओं ने किया मतदान, 2029 की दिशा तय करेंगे नतीजे

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चार राज्यों में 25 करोड़ मतदाताओं ने किया मतदान, 2029 की दिशा तय करेंगे नतीजे

सारांश

25 करोड़ मतदाताओं का फैसला अब मतपेटियों में बंद है। बंगाल में 92.93% का रिकॉर्ड मतदान, तमिलनाडु में विजय की TVK का तूफान, केरल में ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल की कोशिश और असम में BJP का अजेय किला — ये चार नतीजे 2029 की राष्ट्रीय राजनीति का नक्शा खींचेंगे।

Key Takeaways

25 करोड़ मतदाताओं ने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम में मतदान किया। पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 92.93% मतदान; TMC और BJP के बीच कड़ा मुकाबला, आरजी कर त्रासदी बनी बड़ा मुद्दा। तमिलनाडु में DMK 120-145 सीटों पर आगे; अभिनेता विजय की TVK शहरी क्षेत्रों में 30% तक वोट शेयर पा सकती है। केरल में LDF ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल की कोशिश में; UDF को 72 सीटों के आसपास का अनुमान। असम में NDA 85-100 सीटें जीतने की स्थिति में; BJP का पूर्वोत्तर में दबदबा मजबूत। इन नतीजों से 2029 के आम चुनावों की रणनीतिक दिशा तय होगी।

नई दिल्ली, 3 मईतमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम के लगभग 25 करोड़ मतदाताओं ने विधानसभा चुनावों में अपना मत डाला है। प्रारंभिक आँकड़ों के अनुसार इन चुनावों में स्थानीय राज्य-गौरव और राष्ट्रीय राजनीतिक लक्ष्यों के बीच गहरा टकराव उभरकर सामने आया है, जो 2029 के आम चुनावों की दिशा तय कर सकता है।

पश्चिम बंगाल: रिकॉर्ड मतदान, कड़ी टक्कर

पश्चिम बंगाल में 92.93 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में असाधारण भागीदारी का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश में है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक सीमांत दावेदार से मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में उभरी है।

इस चुनाव की तीव्रता को आरजी कर मेडिकल कॉलेज त्रासदी के बाद उठी जनभावना ने और भड़काया, जिसने महिलाओं की सुरक्षा और व्यवस्थागत जवाबदेही को केंद्रीय मुद्दा बना दिया। सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती भी इस चुनावी माहौल की गंभीरता को रेखांकित करती है।

TMC अपने सुदृढ़ जमीनी नेटवर्क और लक्ष्मी भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बल पर चुनाव लड़ रही है, वहीं BJP की रणनीति सत्ता-विरोधी लहर और प्रशासनिक खामियों को भुनाने पर टिकी है। एग्जिट पोल बेहद करीबी मुकाबले का संकेत दे रहे हैं, जहाँ वोट शेयर का हर एक अंश निर्णायक साबित हो सकता है।

तमिलनाडु: त्रिध्रुवीय राजनीति का उदय

तमिलनाडु में 85.1 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। परंपरागत रूप से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के बीच द्विध्रुवीय रहे इस मुकाबले में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) के प्रवेश ने नई हलचल मचा दी है।

आंतरिक सर्वेक्षणों के अनुसार मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला DMK गठबंधन 120 से 145 सीटों के साथ सबसे आगे बना हुआ है। वहीं, TVK चेन्नई और मदुरै जैसे शहरी क्षेत्रों में 30 प्रतिशत तक वोट शेयर हासिल कर सकती है, जो द्रविड़ियन यथास्थिति के लिए दीर्घकालिक चुनौती है।

यदि DMK लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटती है, तो यह सामाजिक न्याय के द्रविड़ियन मॉडल की पुष्टि होगी। हालाँकि, TVK का मजबूत प्रदर्शन एक ऐसे राज्य में त्रिध्रुवीय राजनीति के नए युग का संकेत दे सकता है, जो लंबे समय से बाहरी प्रभावों का प्रतिरोध करता रहा है।

केरल: ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल की कोशिश

केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के नेता पिनारयी विजयन राज्य के आधुनिक इतिहास में पहली बार लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, आँकड़े कड़ी टक्कर की ओर इशारा करते हैं — कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के 140 सदस्यीय विधानसभा में लगभग 72 सीटें जीतने का अनुमान है।

गौरतलब है कि यह चुनाव विचारधारा से अधिक संरचनात्मक मुद्दों पर केंद्रित रहा — विशेष रूप से उच्च साक्षरता और कम प्रारंभिक वेतन के बीच बढ़ती खाई पर, जिसने युवाओं को विदेशी रोजगार बाजारों की ओर पलायन करने पर विवश किया है।

असम: BJP का दबदबा बरकरार

असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लगातार तीसरी जीत की ओर बढ़ता दिख रहा है। एग्जिट पोल के अनुमानों के अनुसार NDA 126 सदस्यीय विधानसभा में 85 से 100 सीटें जीत सकता है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाला छह-दलीय विपक्षी गठबंधन BJP की संगठनात्मक मशीनरी को तोड़ने में नाकाम दिख रहा है। यह प्रभुत्व जातीय पहचान की राजनीति और केंद्रीकृत विकास के सफल संयोजन को दर्शाता है। असम में एक और जीत इसे BJP के पूर्वोत्तर विस्तार का स्थायी मुख्यालय बना देगी।

राष्ट्रीय परिदृश्य पर असर

इन चार राज्यों के नतीजे 2029 के आम चुनावों की रणनीतिक दिशा तय करेंगे। यह निर्धारित होगा कि मौजूदा राष्ट्रीय वर्चस्व निर्बाध जारी रहेगा, या एक पुनर्जीवित क्षेत्रीय और विपक्षी मोर्चा राजनीतिक परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।

Point of View

जबकि केरल में LDF की जीत वामपंथी राजनीति के पुनरुत्थान का दुर्लभ उदाहरण बनेगी। तमिलनाडु में TVK का उभार यह संकेत देता है कि द्रविड़ियन राजनीति का एकाधिकार अब पहले जैसा नहीं रहेगा, और युवा मतदाता नए विकल्प तलाश रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि इन राज्यों में संरचनात्मक मुद्दे — रोजगार, पलायन, जवाबदेही — वैचारिक नारों से कहीं अधिक निर्णायक साबित हो रहे हैं।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कुल कितने मतदाताओं ने वोट डाला?
तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम में मिलाकर लगभग 25 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक 92.93% मतदान दर्ज हुआ।
पश्चिम बंगाल चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या रहे?
आरजी कर मेडिकल कॉलेज त्रासदी के बाद महिलाओं की सुरक्षा और व्यवस्थागत जवाबदेही प्रमुख मुद्दे बने। TMC अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर रही, जबकि BJP ने सत्ता-विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश की।
तमिलनाडु में विजय की TVK का क्या प्रभाव रहा?
अभिनेता विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) चेन्नई और मदुरै जैसे शहरी क्षेत्रों में 30% तक वोट शेयर हासिल कर सकती है। यह DMK-AIADMK के पारंपरिक द्विध्रुवीय मुकाबले को त्रिध्रुवीय बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है।
केरल में LDF का तीसरी बार जीतना ऐतिहासिक क्यों होगा?
केरल के आधुनिक इतिहास में कोई भी गठबंधन लगातार तीन बार सत्ता में नहीं आया है। पिनारयी विजयन के नेतृत्व में LDF यह दुर्लभ उपलब्धि हासिल करने की कोशिश कर रहा है, हालाँकि UDF को लगभग 72 सीटें मिलने का अनुमान है।
असम में NDA की स्थिति कैसी है और इसका राष्ट्रीय महत्व क्या है?
एग्जिट पोल के अनुसार हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में NDA 126 में से 85-100 सीटें जीत सकता है। यह जीत BJP के पूर्वोत्तर भारत में विस्तार को स्थायी रूप देगी और 2029 के चुनावों में पार्टी की रणनीतिक स्थिति मजबूत करेगी।
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