चार राज्यों में 25 करोड़ मतदाताओं ने किया मतदान, 2029 की दिशा तय करेंगे नतीजे
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 3 मई — तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम के लगभग 25 करोड़ मतदाताओं ने विधानसभा चुनावों में अपना मत डाला है। प्रारंभिक आँकड़ों के अनुसार इन चुनावों में स्थानीय राज्य-गौरव और राष्ट्रीय राजनीतिक लक्ष्यों के बीच गहरा टकराव उभरकर सामने आया है, जो 2029 के आम चुनावों की दिशा तय कर सकता है।
पश्चिम बंगाल: रिकॉर्ड मतदान, कड़ी टक्कर
पश्चिम बंगाल में 92.93 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में असाधारण भागीदारी का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश में है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक सीमांत दावेदार से मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में उभरी है।
इस चुनाव की तीव्रता को आरजी कर मेडिकल कॉलेज त्रासदी के बाद उठी जनभावना ने और भड़काया, जिसने महिलाओं की सुरक्षा और व्यवस्थागत जवाबदेही को केंद्रीय मुद्दा बना दिया। सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती भी इस चुनावी माहौल की गंभीरता को रेखांकित करती है।
TMC अपने सुदृढ़ जमीनी नेटवर्क और लक्ष्मी भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बल पर चुनाव लड़ रही है, वहीं BJP की रणनीति सत्ता-विरोधी लहर और प्रशासनिक खामियों को भुनाने पर टिकी है। एग्जिट पोल बेहद करीबी मुकाबले का संकेत दे रहे हैं, जहाँ वोट शेयर का हर एक अंश निर्णायक साबित हो सकता है।
तमिलनाडु: त्रिध्रुवीय राजनीति का उदय
तमिलनाडु में 85.1 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। परंपरागत रूप से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के बीच द्विध्रुवीय रहे इस मुकाबले में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) के प्रवेश ने नई हलचल मचा दी है।
आंतरिक सर्वेक्षणों के अनुसार मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला DMK गठबंधन 120 से 145 सीटों के साथ सबसे आगे बना हुआ है। वहीं, TVK चेन्नई और मदुरै जैसे शहरी क्षेत्रों में 30 प्रतिशत तक वोट शेयर हासिल कर सकती है, जो द्रविड़ियन यथास्थिति के लिए दीर्घकालिक चुनौती है।
यदि DMK लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटती है, तो यह सामाजिक न्याय के द्रविड़ियन मॉडल की पुष्टि होगी। हालाँकि, TVK का मजबूत प्रदर्शन एक ऐसे राज्य में त्रिध्रुवीय राजनीति के नए युग का संकेत दे सकता है, जो लंबे समय से बाहरी प्रभावों का प्रतिरोध करता रहा है।
केरल: ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल की कोशिश
केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के नेता पिनारयी विजयन राज्य के आधुनिक इतिहास में पहली बार लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, आँकड़े कड़ी टक्कर की ओर इशारा करते हैं — कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के 140 सदस्यीय विधानसभा में लगभग 72 सीटें जीतने का अनुमान है।
गौरतलब है कि यह चुनाव विचारधारा से अधिक संरचनात्मक मुद्दों पर केंद्रित रहा — विशेष रूप से उच्च साक्षरता और कम प्रारंभिक वेतन के बीच बढ़ती खाई पर, जिसने युवाओं को विदेशी रोजगार बाजारों की ओर पलायन करने पर विवश किया है।
असम: BJP का दबदबा बरकरार
असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लगातार तीसरी जीत की ओर बढ़ता दिख रहा है। एग्जिट पोल के अनुमानों के अनुसार NDA 126 सदस्यीय विधानसभा में 85 से 100 सीटें जीत सकता है।
कांग्रेस के नेतृत्व वाला छह-दलीय विपक्षी गठबंधन BJP की संगठनात्मक मशीनरी को तोड़ने में नाकाम दिख रहा है। यह प्रभुत्व जातीय पहचान की राजनीति और केंद्रीकृत विकास के सफल संयोजन को दर्शाता है। असम में एक और जीत इसे BJP के पूर्वोत्तर विस्तार का स्थायी मुख्यालय बना देगी।
राष्ट्रीय परिदृश्य पर असर
इन चार राज्यों के नतीजे 2029 के आम चुनावों की रणनीतिक दिशा तय करेंगे। यह निर्धारित होगा कि मौजूदा राष्ट्रीय वर्चस्व निर्बाध जारी रहेगा, या एक पुनर्जीवित क्षेत्रीय और विपक्षी मोर्चा राजनीतिक परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।