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दिग्विजय सिंह ने PM मोदी को पत्र: CBSE की त्रि-भाषा नीति सत्र के बीच न थोपें, 9वीं के छात्रों पर असर

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दिग्विजय सिंह ने PM मोदी को पत्र: CBSE की त्रि-भाषा नीति सत्र के बीच न थोपें, 9वीं के छात्रों पर असर

सारांश

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने PM मोदी को पत्र लिखकर CBSE की त्रि-भाषा नीति को कक्षा 9 के चालू सत्र में लागू न करने की अपील की। CBSE का 15 मई 2026 का सर्कुलर उसी गवर्निंग बॉडी के दिसंबर 2025 के फैसले से टकराता है, और NCERT की पाठ्यपुस्तकें अभी तैयार नहीं हैं।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह ने 7 जून 2026 को PM नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर CBSE की त्रि-भाषा नीति पर पुनर्विचार का आग्रह किया।
CBSE ने 15 मई 2026 को सर्कुलर जारी कर 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा अनिवार्य करने का निर्देश दिया।
यह निर्देश CBSE गवर्निंग बॉडी के दिसंबर 2025 के उस फैसले से विरोधाभासी है जिसमें NCERT पाठ्यपुस्तकें आने तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया था।
NCERT ने अभी तक आवश्यक ग्रेडेड भाषा पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं की हैं; CBSE ने कक्षा 6 की किताबें उपयोग करने का सुझाव दिया।
दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों पर विशेष प्रतिकूल प्रभाव की आशंका जताई गई है।
मामला न्यायालय में विचाराधीन है और फैसला 1 जुलाई 2026 की समयसीमा के बाद आने की संभावना है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 7 जून 2026 (रविवार) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की त्रि-भाषा नीति को कक्षा 9 के मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच अनिवार्य रूप से लागू करने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने चिंतित अभिभावकों की एक हस्ताक्षरित अर्जी प्रधानमंत्री को सौंपते हुए कहा कि यह कदम लाखों छात्रों की शैक्षणिक योजना को बाधित कर सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में बताया कि CBSE ने 15 मई 2026 को एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा की शिक्षा अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने इस निर्देश और दिसंबर 2025 में हुई CBSE गवर्निंग बॉडी की बैठक के फैसले के बीच स्पष्ट विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया।

गौरतलब है कि उस बैठक में पाठ्यक्रम समिति की यह सिफारिश स्वीकृत की गई थी कि स्कूल राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा ग्रेडेड भाषा पाठ्यपुस्तकें जारी होने तक मौजूदा अध्ययन योजना जारी रखें। सिंह ने सवाल उठाया, 'यह स्पष्ट नहीं है कि CBSE ने अपनी गवर्निंग बॉडी के फैसले को इतनी स्पष्ट रूप से कैसे और क्यों पलट दिया।'

तैयारी की कमी पर चिंता

सिंह ने पत्र में रेखांकित किया कि NCERT ने अभी तक आवश्यक ग्रेडेड भाषा पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं की हैं। इसके बदले CBSE ने NCERT की कक्षा 6 की भाषा की किताबों के उपयोग का सुझाव दिया है, जिसे वे अपर्याप्त मानते हैं। उन्होंने चेताया, 'सत्र के बीच में इस नीति को अचानक लागू करना, बिना पर्याप्त शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों या बदलाव के लिए समय दिए, गंभीर व्यवधान पैदा कर सकता है — ठीक वैसे ही जैसे CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को जल्दबाजी में लागू करने के दौरान अफरातफरी मची थी।'

उन्होंने संस्कृत के बारे में भी कहा कि यह कई स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरी है, लेकिन योग्य संस्कृत शिक्षकों और सही पाठ्यपुस्तकों की भारी कमी इस भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य को ही नाकाम कर देगी।

दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों पर असर

सिंह ने उन क्षेत्रों की विशेष चुनौतियों को भी उजागर किया जहाँ हिंदी व्यापक रूप से नहीं बोली जाती। उनके अनुसार दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर वहाँ जहाँ स्थानीय आदिवासी भाषाएँ CBSE की मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची में शामिल नहीं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भाषा नीति पहले से ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच तनाव का विषय रही है।

कानूनी स्थिति और आगे की राह

सिंह ने यह भी बताया कि इस मुद्दे से जुड़ी कानूनी कार्यवाही अभी न्यायालय में विचाराधीन है, और अदालत का फैसला उस तारीख के बाद आने की संभावना है जिस तारीख तक स्कूलों को तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की, 'मौजूदा नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए इस नीति को लागू करने का काम तुरंत रोक दिया जाए।'

यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी शैक्षिक नीति को सत्र के बीच लागू करने पर विवाद हुआ हो। OSM प्रणाली का उदाहरण देते हुए सिंह ने स्पष्ट किया कि जल्दबाजी में लिए गए फैसले छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस अपील पर क्या रुख अपनाती है और क्या 1 जुलाई 2026 की समयसीमा पर पुनर्विचार किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि क्रियान्वयन की तैयारी का है: जब NCERT की पाठ्यपुस्तकें तैयार नहीं, शिक्षक उपलब्ध नहीं, और न्यायालय का फैसला आना बाकी है, तो जुलाई की समयसीमा किस आधार पर तय की गई? दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के छात्रों के लिए भाषा नीति पहले से ही संवेदनशील मुद्दा है — बिना तैयारी के जल्दबाजी उस तनाव को और गहरा कर सकती है। OSM का उदाहरण बताता है कि CBSE ने पहले भी जल्दबाजी की कीमत छात्रों को चुकाने दी है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
दिग्विजय सिंह ने CBSE की त्रि-भाषा नीति को कक्षा 9 के मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच अनिवार्य रूप से लागू करने पर चिंतित अभिभावकों की हस्ताक्षरित अर्जी प्रधानमंत्री तक पहुँचाने के लिए यह पत्र लिखा। उन्होंने सरकार से 1 जुलाई 2026 की समयसीमा पर तत्काल पुनर्विचार का आग्रह किया।
CBSE की त्रि-भाषा नीति क्या है और यह कब लागू होनी है?
CBSE ने 15 मई 2026 को एक सर्कुलर जारी कर 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत त्रि-भाषा फॉर्मूले को लागू करने का हिस्सा है।
CBSE गवर्निंग बॉडी के फैसले और नए सर्कुलर में क्या विरोधाभास है?
दिसंबर 2025 में CBSE गवर्निंग बॉडी ने यह तय किया था कि जब तक NCERT ग्रेडेड भाषा पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं करती, स्कूल मौजूदा अध्ययन योजना जारी रखें। लेकिन मई 2026 के सर्कुलर ने इसी फैसले को पलटते हुए जुलाई से नई व्यवस्था लागू करने को कहा।
दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
सिंह के अनुसार, इन क्षेत्रों में जहाँ हिंदी व्यापक रूप से नहीं बोली जाती और कई स्थानीय आदिवासी भाषाएँ CBSE की मान्यता प्राप्त सूची में नहीं हैं, वहाँ के छात्रों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। तैयार शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की कमी इस चुनौती को और बड़ा बनाती है।
इस मामले में न्यायालय की क्या भूमिका है?
इस नीति से जुड़ी कानूनी कार्यवाही फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। सिंह ने बताया कि अदालत का फैसला 1 जुलाई 2026 की समयसीमा के बाद आने की संभावना है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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