सीबीएसई 10वीं-12वीं परिणामों में गड़बड़ी: केसी वेणुगोपाल ने PM मोदी को लिखा पत्र, पारदर्शिता की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने 26 मई 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 के कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ सामने आई हैं, जिससे हज़ारों छात्रों में अपने स्कोरकार्ड को लेकर गहरी चिंता फैल गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रभावित छात्रों के लिए एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर एकमुश्त समाधान की माँग की है।
क्या है आरोप
वेणुगोपाल ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'सीबीएसई के नतीजे पूरी तरह से गड़बड़ रहे हैं। डिजिटल स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रणाली में हज़ारों छात्रों के परिणाम में कई गलतियाँ सामने आई हैं, जिस वजह से छात्रों में घबराहट फैल गई है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन के लिए छात्रों से अत्यधिक शुल्क वसूल रहा है, जो कि उनके अनुसार मनमाना है।
वेणुगोपाल ने तीखे शब्दों में कहा कि जो सरकार माध्यमिक शिक्षा की एक साधारण परीक्षा भी सुचारु रूप से नहीं करा सकती, उसे 'विश्वगुरु' होने के दावे करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने नीट यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं का भी संदर्भ दिया।
सीबीएसई परिणामों का ब्यौरा
इस वर्ष सीबीएसई ने कक्षा 10वीं के परिणाम 15 अप्रैल 2026 को और कक्षा 12वीं के परिणाम 13 मई 2026 को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए थे। 12वीं का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 85.20% रहा, जिसमें छात्राओं का पास प्रतिशत 88.86% और छात्रों का 82.13% दर्ज किया गया। 10वीं बोर्ड का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 93.70% रहा।
PM मोदी को पत्र
वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र की फोटो भी अपनी पोस्ट के साथ साझा की। उन्होंने माँग की कि प्रभावित छात्रों को एक पारदर्शी और त्वरित समाधान मिले। उनका कहना है कि छात्र इस मामले में विलंब के नहीं, बल्कि जवाबदेही के हकदार हैं।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हुई है। गौरतलब है कि नीट यूजी विवाद के बाद यह दूसरा बड़ा मामला है जिसमें विपक्ष ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए हैं। सीबीएसई की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और सीबीएसई इन आरोपों का जवाब किस रूप में देते हैं और क्या प्रभावित छात्रों को राहत मिल पाती है।