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राहुल गांधी ने सीबीएसई ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए, न्यायिक जांच की मांग

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राहुल गांधी ने सीबीएसई ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए, न्यायिक जांच की मांग

सारांश

राहुल गांधी ने सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली के कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि नियमों में बदलाव कर कोएम्प्ट कंपनी को फायदा पहुँचाया गया और 18.5 लाख बच्चों का भविष्य दाँव पर लगाया गया।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 29 मई 2026 को सीबीएसई ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट में अनियमितताओं के आरोप लगाए।
उनका दावा है कि टीसीएस के बजाय कोएम्प्ट को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और उसके लिए बोली शर्तों में ढील दी गई।
गांधी ने सीबीएसई से बढ़ाकर कोएम्प्ट के सभी कॉन्ट्रैक्ट की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की।
18.5 लाख छात्रों के डिजिटल मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
सीबीएसई ने आरोपों को 'गलत और भ्रामक' बताया; कहा कि 28 अगस्त 2025 को जारी निविदा में सामान्य वित्तीय नियमों का पालन हुआ।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 12वीं के मूल्यांकन तंत्र में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी स्वीकार की है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 29 मई 2026 को सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग स्कीम' (ओएसएम) के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए और इस एडटेक कंपनी के चयन की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। यह बयान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा 12वीं कक्षा के सीबीएसई मूल्यांकन तंत्र में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के ठीक एक दिन बाद आया।

मुख्य आरोप

गांधी ने सोशल मीडिया पर एक न्यूज़ क्लिप साझा करते हुए दावा किया कि ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट टीसीएस के बजाय कोएम्प्ट नाम की एक कंपनी को दिया गया और उस कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए बोली की कई शर्तों में ढील दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस वर्ष से ओएसएम प्रणाली लागू करने में अनावश्यक जल्दबाजी दिखाई।

गांधी ने कहा, 'शिक्षा मंत्री और सीबीएसई कहते हैं कि सही प्रक्रिया का पालन किया गया — यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या कॉन्ट्रैक्ट ईमानदारी से उस सबसे अच्छी कंपनी को दिया गया जो यह काम सही तरीके से कर सकती थी।' उन्होंने आगे कहा, '18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो नियमों में बदलाव किए जाने के बाद ही योग्य साबित हो पाई।'

जांच का दायरा बढ़ाने की मांग

गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। उनके अनुसार, इस जांच का दायरा केवल सीबीएसई तक सीमित न रखकर कोएम्प्ट को दिए गए हर कॉन्ट्रैक्ट तक विस्तारित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के विरुद्ध किसी कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए।

सीबीएसई का पक्ष

सीबीएसई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए गांधी के आरोपों को 'गलत और भ्रामक' बताया और कहा कि ये तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। बोर्ड के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर बोर्ड परीक्षाओं 2026 की आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन के लिए प्रस्ताव-अनुरोध जारी किया गया था और कॉन्ट्रैक्ट 'सामान्य वित्तीय नियम' के प्रोटोकॉल के अनुसार योग्य बोलीदाता को दिया गया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब सामने आया जब 12वीं कक्षा के एक छात्र को गलती से किसी अन्य परीक्षार्थी की भौतिक विज्ञान की आंसर शीट भेज दी गई। इस घटना ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर देशव्यापी बहस छेड़ दी। सीबीएसई और शिक्षा मंत्री ने कुछ छात्रों के मामले में गड़बड़ियाँ स्वीकार करते हुए सिस्टम में सुधार का वादा किया है।

आगे क्या

गौरतलब है कि भाजपा मंत्रियों ने गांधी पर पलटवार किया है, जिसे उन्होंने राजनीतिक हमला बताया है। फिलहाल न्यायिक जांच पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला संसद के आगामी सत्र में भी गूँजने की संभावना है, क्योंकि 18.5 लाख से अधिक छात्रों के परिणाम और भविष्य इस प्रणाली से जुड़े हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि असली प्रश्न यह है कि बोली शर्तों में बदलाव क्यों और किसके आदेश पर हुए। शिक्षा मंत्री का जिम्मेदारी स्वीकार करना एक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन जब तक कॉन्ट्रैक्ट चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा नहीं होती, 18.5 लाख छात्रों के परिजनों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई ओएसएम विवाद क्या है?
सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग स्कीम' (ओएसएम) के तहत 12वीं कक्षा की आंसर शीट का डिजिटल मूल्यांकन किया जाता है। आरोप है कि इस प्रणाली का कॉन्ट्रैक्ट टीसीएस जैसी स्थापित कंपनी की बजाय कोएम्प्ट नामक कंपनी को दिया गया और उसके लिए बोली शर्तों में बदलाव किए गए।
राहुल गांधी किस जांच की मांग कर रहे हैं?
राहुल गांधी ने स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है जिसका दायरा सीबीएसई तक सीमित न हो, बल्कि कोएम्प्ट को दिए गए सभी कॉन्ट्रैक्ट को शामिल करे। उनका तर्क है कि 18.5 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता अनिवार्य है।
सीबीएसई ने आरोपों पर क्या कहा?
सीबीएसई ने आरोपों को 'गलत और भ्रामक' बताया है। बोर्ड के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर निविदा जारी की गई थी और सामान्य वित्तीय नियमों के तहत योग्य बोलीदाता को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया।
इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
12वीं कक्षा के एक छात्र को गलती से किसी दूसरे परीक्षार्थी की भौतिक विज्ञान की आंसर शीट भेज दी गई, जिसने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर देशव्यापी बहस छेड़ दी। इसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गड़बड़ियों की जिम्मेदारी स्वीकार की।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सरकार की ओर से न्यायिक जांच पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला संसद के आगामी सत्र में उठने की संभावना है और सीबीएसई ने मूल्यांकन प्रणाली में सुधार का वादा किया है।
राष्ट्र प्रेस
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