राहुल गांधी ने सीबीएसई ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए, न्यायिक जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 29 मई 2026 को सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग स्कीम' (ओएसएम) के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए और इस एडटेक कंपनी के चयन की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। यह बयान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा 12वीं कक्षा के सीबीएसई मूल्यांकन तंत्र में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के ठीक एक दिन बाद आया।
मुख्य आरोप
गांधी ने सोशल मीडिया पर एक न्यूज़ क्लिप साझा करते हुए दावा किया कि ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट टीसीएस के बजाय कोएम्प्ट नाम की एक कंपनी को दिया गया और उस कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए बोली की कई शर्तों में ढील दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस वर्ष से ओएसएम प्रणाली लागू करने में अनावश्यक जल्दबाजी दिखाई।
गांधी ने कहा, 'शिक्षा मंत्री और सीबीएसई कहते हैं कि सही प्रक्रिया का पालन किया गया — यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या कॉन्ट्रैक्ट ईमानदारी से उस सबसे अच्छी कंपनी को दिया गया जो यह काम सही तरीके से कर सकती थी।' उन्होंने आगे कहा, '18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो नियमों में बदलाव किए जाने के बाद ही योग्य साबित हो पाई।'
जांच का दायरा बढ़ाने की मांग
गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। उनके अनुसार, इस जांच का दायरा केवल सीबीएसई तक सीमित न रखकर कोएम्प्ट को दिए गए हर कॉन्ट्रैक्ट तक विस्तारित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के विरुद्ध किसी कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए।
सीबीएसई का पक्ष
सीबीएसई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए गांधी के आरोपों को 'गलत और भ्रामक' बताया और कहा कि ये तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। बोर्ड के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर बोर्ड परीक्षाओं 2026 की आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन के लिए प्रस्ताव-अनुरोध जारी किया गया था और कॉन्ट्रैक्ट 'सामान्य वित्तीय नियम' के प्रोटोकॉल के अनुसार योग्य बोलीदाता को दिया गया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब सामने आया जब 12वीं कक्षा के एक छात्र को गलती से किसी अन्य परीक्षार्थी की भौतिक विज्ञान की आंसर शीट भेज दी गई। इस घटना ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर देशव्यापी बहस छेड़ दी। सीबीएसई और शिक्षा मंत्री ने कुछ छात्रों के मामले में गड़बड़ियाँ स्वीकार करते हुए सिस्टम में सुधार का वादा किया है।
आगे क्या
गौरतलब है कि भाजपा मंत्रियों ने गांधी पर पलटवार किया है, जिसे उन्होंने राजनीतिक हमला बताया है। फिलहाल न्यायिक जांच पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला संसद के आगामी सत्र में भी गूँजने की संभावना है, क्योंकि 18.5 लाख से अधिक छात्रों के परिणाम और भविष्य इस प्रणाली से जुड़े हैं।